बिहार में भाजपा को पहली बार एक साथ इतनी सीटें मिलेंगी
पटना, भाजपा के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब उसके हिस्से में विधान परिषद की सबसे अधिक सीटें एक साथ आ सकती हैं। विप में अभी 17 सीटें खाली हैं। सुशील मोदी का राज्यसभा जाना तय हो चुका है। इसके बाद विप में खाली सीटों की संख्या 18 हो जाएगी। इन सीटों में आठ सीटें भाजपा कोटे में आ सकती हैं।
पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह
भाजपा के खाते में आने वाली 8 सीटों में मनोनयन कोटे की 12 में छह तो विधानसभा कोटे की दो सीटे हैं। एक साथ इतनी संख्या में विधान पार्षद का कोटा मिलने की संभावना के मद्देनजर पार्टी के उन नेताओं-कार्यकर्ताओं में उत्साह है, जो वर्षों से पार्टी की सेवा में लगे हैं। वैसे लोग भी ऊपरी सदन में जाने की आस संजोए हैं, जिन्हें इस विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिली था, पर वे दूसरे नेताओं की तरह बगावत करने के बजाए दल के साथ निष्ठापूर्वक जुड़े रहे।
अबतक मिलीं हैं अधिकतम 5 सीट
अब तक विधान परिषद के कोटे में भाजपा को अधिकतम मनोनयन कोटे में पांच सीटें ही मिली हैं। चूंकि इस बार विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भाजपा के खाते में मनोनयन कोटे की 12 में से आधी यानी छह सीटें मिल सकती हैं।
मनोनयन कोटे को लेकर एनडीए में दो फॉर्मूला पर काम हो रहा है। एक यह कि भाजपा-जदयू बराबर यानी छह-छह सीट ले और दोनों अपने-अपने खाते में से हम और वीआईपी को एक-एक सीट दें। चूंकि हम के कोटे से एक मंत्री बन चुके हैं। ऐसे में दूसरा फॉर्मूला यह भी हो सकता है कि भाजपा और जदयू छह-छह लें और भाजपा अपने हिस्से में से ही वीआईपी को एक सीट दे। वैसे एनडीए के शीर्ष नेताओं की बातचीत के बाद ही इसपर अंतिम निर्णय होगा।
मनोनयन कोटे के अलावा भाजपा के खाते में दो सीटें विधानसभा कोटे की आने की उम्मीद हैं। विनोद नारायण झा विधायक बन चुके हैं। इनका कार्यकाल 2022 तक का था। जबकि पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी राज्यसभा जा रहे हैं। सुशील मोदी का कार्यकाल 2024 तक बचा है।
पार्टी नेताओं के अनुसार आठ सीटें आने के बाद दल में वैसे नेता अपनी गोटी सेट करने में लग गए हैं, जो विधान परिषद जाने की चाह रखते हैं। इसके लिए बिहार से लेकर दिल्ली दरबार तक लॉबिंग की जा रही है। वैसे तो पार्टी में दावेदारों की लंबी फौज है, लेकिन दल में निष्ठा रखने वालों को तरजीह मिलनी तय मानी जा रही है। बताया गया कि पार्टी सामाजिक समीकरणों का भी पूरा ख्याल रखेगी। अपने कोर वोटर सवर्ण व वैश्य के अलावा उन नेताओं को भी विधान परिषद में भेजा जा सकता है, जिन्हें इस चुनाव में टिकट नहीं मिल सका था। ऐसे नेताओं में डेढ़ दर्जन से अधिक नाम हवा में तैर रहे हैं।
मौजूदा दलगत स्थिति
कुल सदस्य : 75
जदयू : 23
भाजपा : 19
राजद : 06
कांग्रेस : 04
भाकपा : 02
हम : 01
लोजपा : 01
निर्दलीय : 02
अभी खाली 17 सीटें
12 मनोनयन कोटे की
04 स्थानीय निकाय की
01 विधानसभा कोटे की