गणेश पुराण के दौरान ईसाई धर्म से तीन परिवारों ने की सनातन धर्म में वापसी 

गणेश पुराण के दौरान ईसाई धर्म से तीन परिवारों ने की सनातन धर्म में वापसी 
गणेश पुराण के दौरान ईसाई धर्म से तीन परिवारों ने की सनातन धर्म में वापसी 

गणेश पुराण के दौरान ईसाई धर्म से तीन परिवारों ने की सनातन धर्म में वापसी 

सिद्धेश्वर धाम साई दरबार के पंडित ललित नारायण मिश्रा ने कराई घर वापसी 

मंडला - सोमवार को तीन परिवारों की घर वापसी का बड़ा दावा किया गया है। ईसाई धर्म अपना लिए इन लोगों को फिर सनातन धर्म में वापसी कराई गई है। मंडला जिले के नर्मदा तट स्थित सुरंगदेवरी ग्राम के सिद्धेश्वर धाम साई दरबार में आयोजित साईं जन्मोत्सव के उपलक्ष में आयोजित गणेश पुराण के दौरान इन परिवारों की घर वापसी पंडित ललित नारायण मिश्रा ने कराई है। कार्यक्रम स्थल पर तिलक लगाकर व माला पहनाकर कराई गई घर वापसी। पंडित ललित नारायण मिश्रा का दावा है कि पिछले दो सालों में वे अब तक 9 परिवारों की घर वापसी करवा चुके है। आज जिन तीन परिवारों के 15 लोगों की घर वापसी का दावा किया गया है उनमे से 4 व्यक्ति ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे शेष दूर होने की वजह से कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच सके थे। कार्यक्रम के दौरान जिन लोगों की घर वापसी कराई गई है उनमे गंगा राम उइके, हरिया बाई उइके, जानकी बाई सोयाम व सुखवतिया बाई सोयाम शामिल है। ईसाई धर्म से पुनः सनातम धर्म में वापस हुए लोगों ने बताया कि किसी वजह से वे दूसरे धर्म में चले गए थे लेकिन अब पुनः अपने सनातम धर्म में वापस लौट आए है। पंडित ललित नारायण मिश्रा का कहना है कि सबसे पहले उन्होंने दो वर्ष पहले एक ऐसे परिवार की घर वापसी कराई थी जिनकी बेटी को खून की उलटी होती थी। इसके बाद 5 परिवारों की घर वापसी कराई। अभी जिन तीन परिवारों की घर वापसी कराई गई है उनके परिवार में लगातार किसी न किसी की मौत होती थी। 

सिद्धेश्वर धाम साई दरबार सुरंग देवरी मण्डला के पंडित ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि हम तो सनातन के प्रचारक है किसी धर्म के विरोधी नहीं सब अपनी जगह महान है। मैं एक बात मानता हूं जो पूछ रहा है कहीं ना कहीं किसी कारण से पुज रहा है। परंतु मैंने सनातन में जन्म लिया है और अपने घर में रोशनी करना यह मेरा प्रथम दायित्व बनता है। बस उसी के चलते हैं नर्मदा मैया की ऐसी कृपा है, साईनाथ महाराज की ऐसी कृपा है कि दरबार लगता है अपने यहां पर। 2 साल पहले एक विश्वकर्मा परिवार था। उनकी बच्ची को खून की उल्टी हुआ करती थी। वह करीब एक-एक लोटे खून की उल्टी करती थी। वह कई जगह गए क्रिश्चियन भी बने लेकिन उन्हें आराम नहीं लगा। फिर वह दरबार आए और जिस दिन वह दरबार आए हैं, वह दिन है और आज का दिन है कि आज तक उसे बच्ची को दोबारा कहीं खून की उल्टी नहीं हुई। जैसे ही उन्हें आराम लगा उन्होंने एक दो महीने देखा और आकर मुझसे बोले कि महाराज जी हम पुनः वापसी करना चाहते हैं। तो प्रथम हमने उस परिवार की वापसी कराई हुई थी, 6 लोगों की वापसी थी वह। पिछले साल पांच परिवारों की वापसी हुई थी। इस वर्ष तीन परिवारों की वापसी हुई है। वो ऐसे वापसी हुई है कि कि उनके परिवार में कोई ना कोई की मृत्यु हो जाती थी, तो वह इस चक्कर में यहां वहां घूमते थे। हमारा जो उद्देश्य है किसी प्रकार का कोई आडंबर या अंधविश्वास फैलाना नहीं है। हम नहीं जानते क्या होता है। हमारी श्रद्धा परमात्मा पर इतनी है कि हम पूरी श्रद्धा से मां नर्मदा का जल और दरबार की वभूति देते हैं और वह उससे ठीक हो जाते हैं। इस वर्ष हमने तीन परिवारों की वापसी की है जिसमें 15 लोग हैं। कुछ लोग आ नहीं सके हैं, उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से हमसे बात की थी कि महाराज हम लोग बाहर रहते हैं परंतु हम वापसी चाहते हैं और उनके परिवार वापस आया हुआ है। माता-पिता, भाई - बहन यहां सभी बैठे हुए हैं। तो हमारा उद्देश्य यह है कि हम अपने घर को प्रकाशमान करना चाहते है तो हमारा घर सर्वश्रेष्ठ सनातन है। सनातन ही प्रकृति है. सनातन कोई देवता नहीं है। सृष्टि ही सनातन है. आकाश सनातन है. वायु सनातन है. जल सनातन है. पांच तत्व जो है वह अटल सनातन है और सनातन का विनाश कभी नहीं हो सकता। 

घर वापसी करने वाली सुखवतिया बाई सोयाम ने कहा कि ईसाई धर्म में गई थी। करीब डेढ़ साल रही वहां, आराम नहीं लग रहा था, सब बीमार पड़ रहे थे तो फिर यह धर्म में आई। यही धर्म में फिर हम वापस हुई गए। सास - ससुर खत्म हो गए, पति खत्म हो गया, मैं अकेली हूं, दो बच्ची है लड़का है, हम तीन परिवार हैं। इसी तरह गंगाराम उइके ने बताया कि गलती से मैं चला गया था। थोड़ा समझ नहीं पाए थे इसलिए हो गया था। बड़े परिवार में आ गए, सनातन परिवार में आ गए। अपने परिवार के संग अपने धर्म में आ गए, घर वापसी की। हम मियां बीवी और बच्चे हैं। अब अच्छा लग रहा है।