भगवान परशुराम जयंती: राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल ने की पूजा आरती 

भगवान परशुराम जयंती: राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल ने की पूजा आरती 

जयपुर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने रविवार को बिड़ला सभागार में अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती पर आयोजित राज्य स्तरीय पूजा आरती में भाग लिया। उन्होंने भगवान परशुराम की छवि पर पुष्प अर्पित कर उनकी विधिवत आरती की और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और संपन्नता की कामना की।

राज्यपाल ने जयंती समारोह में भगवान परशुराम के जीवन प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि वह शस्त्र और शास्त्र के ही मर्मज्ञ नहीं थे, अन्याय और अनाचार का प्रतिरोध करते जीवन में आदर्श की स्थापना के प्रेरक हैं। उन्हानें भगवान परशुरामजी के अवतरण दिवस की बधाई देते हुए कहा कि अक्षय तृतीया बौद्धिक क्षमताओं के विकास से जुड़ा पर्व है। वेद व्यासजी ने इसी दिन विघ्न विनाशक गणेश को महाभारत लिखने के लिए राजी किया था। 

राज्यपाल ने कहा कि परशुराम जी बुद्धि और ज्ञान का समन्वय रखने वाले ऋषि है। उनकी जयंती भगवान परशुराम जी को स्मरण करने का अवसर नहीं है, यह उनके आदर्शों—त्याग, तप, शौर्य, और धर्म रक्षा की प्रतिज्ञा को अपने जीवन में उतारने तथा अन्याय के विरुद्ध निर्भीकता से खड़े होने का संकल्प लेने का पर्व है। 

उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम जी ने जब पृथ्वी पर अधर्म को, अन्याय को और दुष्ट शक्तियों को बढ़ते देखा तो विनाश के लिए अवतार धारण किया था। उनके हाथ में धारण किया गया फरसा उनकी वीरता, पराक्रम और धर्म की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने भीष्म, द्रोण और कर्ण को शस्त्र विद्या का ज्ञान दिया। उनका मूल नाम 'राम' था। पर, उन्होंने अपने आराध्य भगवान शिव द्वारा प्रदत्त 'परशु' (कुल्हाड़ी) धारण की इसलिए उन्हें परशुराम कहा जाने लगा।

इससे पहले राज्यपाल ने परशुराम जी पर निर्मित फिल्म भी देखी। उन्होंने वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार के किए उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।