मुआवजे के लिए महीनों से चक्कर लगा रहे कोरोना मृतकों के आश्रित
मुजफ्फरपुर
बिहार के मुजफ्फरपुर में कोरोना से मरे मरीजों के आश्रित मुआवजे के लिए कई महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। कभी बीडीओ-सीओ कार्यालय तो कभी समाहरणालय व एसकेएमसीएच दौड़ रहे हैं। इसके बावजूद उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ रही है। आश्रितों को कहा जा रहा है कि उनके मरीजों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय से नहीं आयी है। किसी का डेथ सर्टिफिकेट एसकेएमसीएच से नहीं मिल रहा है। पते का सत्यापन भी नहीं पूरा होने के कारण राशि अटकी है। सरकारी स्तर पर हो रही इस हीलाहवाली से आश्रित अब आस छोड़ने लगे हैं। सरकारी घोषणा के तहत चार लाख रुपये मुआवजा मिलना है।
'हिन्दुस्तान' की टीम ने मंगलवार को इनकी शिकायत पर पड़ताल की। इसमें पता चला कि आश्रितों ने मुआवजे के लिए कई बार समाहरणलय जाकर डीएम कार्यालय में आवेदन दिया है, लेकिन मुआवजा राशि अबतक नहीं मिली है। 49 कोरोना मरीजों की मौत, 27 को ही मुआवजा जिला प्रशासन के अनुसार, जिले में अबतक अधिकृत रूप से कोरोना से 49 मरीजों की मौत हुई है। आपदा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इसमें 27 मृतकों के आश्रित को चार-चार लाख रुपये मुआवजा दिया गया है।
एडीएम आपदा अतुल कुमार वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से 30 कोरोना मृतकों की सूची के साथ फंड आया था। इसमें से 27 के आश्रित को मुआवजा दिया गया है। एक आश्रित मुजफ्फरपुर के बाहर के थे, जबकि दो आश्रितों के भुगतान में तकनीकी समस्या है। इस कारण भुगतान नहीं हो सका है। स्वास्थ्य विभाग को करना है सत्यापन मृतकों के पता और उसके आश्रितों का सत्यापन जिला स्वास्थ्य कार्यालय को करना है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से पते के सत्यापन में देरी के कारण भी मुआवजे की राशि चार महीनों के बाद भी नहीं मिल सकी है।
केस-1 : सकरा के फरीदपुर निवासी जय शंकर साह की मौत कोरोना से 28 जुलाई को एसकेएमसीएच में हो गई थी। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत उनका दाह संस्कार सिकंदरपुर घाट पर किया गया। उनके पुत्र नीरज प्रसाद और धीरज प्रसाद लगातार बीडीओ-सीओ कार्यालय से लेकर समाहरणालय तक चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें कहा जा रहा है कि मुआवजे के लिए सूची सीएम कार्यालय से नहीं आइ्र है। जय शंकर प्रसाद की जिस समय मौत हुई, वह अपने क्षेत्र के उप मुखिया थे। उनके दोनों पुत्र ने बताया कि वह लगातार कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पैसा कब मिलेगा यह ठीक नहीं है।
केस-2 : साहेबगंज के राजीनामा नगर वार्ड संख्या 12 के अब्दुल शहीद की मौत एसकेएमसीएच में कोरोना से हो गई थी। इसके पुत्र अली बख्श ने बताया कि वह लगातार एसकेएमसीएच और डीएम कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। चार महीना होने को हैं, लेकिन अबतक मुआवजा राशि नहीं मिल सका है। उन्होंने बताया कि जब मुआवजे के लिए खोजबीन की तो जानकारी हुई कि उनके पिता का नाम एसकेएमसीएच में गलत लिखा गया है। इस कारण राशि नहीं आ रही है। अली बख्श बताते हैं कि नाम सुधार कराने के लिए अब वह डीएम कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। अली बख्श और उनके पिता मजदूरी कर घर चलाते थे।
केस-3 : सकरा के गोरिहार निवासी सकलदेव प्रसाद यादव की 20 वर्षीय पुत्री प्रिय भारती कुमारी की मौत कोरोना से एसकेएमसीएच में हुई थी। छात्रा की मौत 21 सितंबर को हुई थी। मुआवजा अबतक नहीं मिल सका है। पिता सकलदेव प्रसाद बताते हैं कि मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन एसकेएमसीएम में किया है, लेकिन अबतक प्रमाण पत्र नहीं मिल सका है। इस कारण आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मृतकों के पते और आश्रितों के सत्यापन के आधार पर रिपोर्ट विभाग को भेजी जाती है। फिर मुख्यमंत्री कार्यालय से आश्रितों के मुआवजे के लिए सूची जिला प्रशासन को भेजी जाती है। अबतक 27 लोगों को भुगतान किया गया है। शेष को मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है। -डॉ. चंद्रशेखर सिंह, डीएम
चुनाव कार्य में अधिकारी और कर्मचारी के लगे होने के कारण कोरोना मृतकों के पते और आश्रितों के सत्यापन में देरी हुई है। जितने लोगों का सत्यापन कार्य रुका हुआ है, उनका जल्द सत्यापन पूरा कर लिया जाएगा। -डॉ. शैलेंद्र प्रसाद सिंह, सिविल सर्जन
bhavtarini.com@gmail.com 
