जीत दर्ज करने को क्या है पार्टी के सामने बड़ी चुनौती, बिहार चुनाव में अब क्यों खुश नजर आ रही है कांग्रेस?
नई दिल्ली
बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी नेता और कार्यकर्ताओं की नाराजगी झेल चुकी कांग्रेस के चेहरे पर अब खुशी साफ झलक रही है। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी उम्मीदवारों की सभाओं में जुटती भीड़ से कांग्रेस को एक बार फिर सत्ता में वापसी की उम्मीद जगी है। पर खुशी के साथ कांग्रेस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि, कोरोना के इस दौर में सभाओं में जुटे मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाना आसान नहीं है।
कांग्रेस बिहार में लंबे वक्त से सत्ता से बाहर है। प्रदेश कांग्रेस संगठन भी बहुत मजबूत नहीं है। ऐसे में पार्टी के लिए जनसभाओं में जुट रही भीड़ को वोट में तब्दील करना आसान नहीं होगा। कांग्रेस नेता मानते हैं कि राजद अपनी सीटों पर समर्थक वोट को मतदान केंद्र तक ले जाने में सफल रहेगा। क्योंकि, उसके पास जमीनी स्तर पर संगठन है और प्रचार के दौरान मिल रहे समर्थन से कार्यकर्ता उत्साहित है, पर कांग्रेस संगठन इतना मजबूत नहीं है।
प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी ने कई बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिया है। इनका स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ कोई तालमेल नहीं है। इसके साथ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जो टिकट दिए गए है, वह दूसरे जिलों में दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में उनके पास कोई अपनी टीम नहीं है। ऐसे में महामारी के दौर में ज्यादा से ज्यादा मतदान कराना बड़ी चुनौती है। चुनाव का जिम्मा संभाल रही केंद्रीय टीम इस बारे में रणनीति तैयार कर रही है।
बिहार प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार झा कहते हैं कि लोगों में राज्य सरकार के प्रति बहुत गुस्सा है। लोगों ने जेडीयू-भाजपा सरकार को विदा करने की तैयारी कर ली है। कोरोना के बावजूद लोग जब जनसभाओं में जुट रहे हैं, तो यह माने का कोई कारण नहीं है कि वह वोट करने नहीं जाएंगे। कई नेता मानते हैं कि इस बार वोट प्रतिशत कुछ कम रह सकता है। क्योकि, कोरोना से बचने के उपायों के साथ मतदान करने में ज्यादा वक्त लगेगा।
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