कोरोना से जंग: बिहार में रची गई चीन की विशाल चोंच वाली लाल चिड़िया
पटना
विश्व के मशहूर चित्रकार पाब्लो पिकासो ने द्वितीय विश्वयुद्ध की त्रासदी पर जो चित्र बनाई, वह आज भी मशहूर है। ‘द ब्लैक कैट’ नामक चित्र में उन्होंने न तोप, न तलवार, न मरे-पसरे आदमी दर्शाए। पिकासो ने एक काली बिल्ली बनाई। उसकी लम्बी पूंछ थी और पीली-गुर्राती आंखों से वह घूर रही थी। उसकी आंख ही युद्ध की विभीषिका और उसका दंश बयां कर रही थी। ठीक इसी तर्ज पर जाने-माने और श्रेष्ठ छापा कलाकार पद्मश्री श्याम शर्मा ने कोरोना पर शानदार ड्राइंग बनायी है। इस ड्राइंग का शीर्षक उन्होंने ‘विशाल चोंच वाली लाल चिड़िया’ रखा है। यह चिड़िया चीन में पाई जाती है।
श्याम शर्मा ने घरबंदी के दौरान ‘कोरोना संक्रमण’ पर ड्राइंग की एक पूरी शृंखला ही बना डाली। ‘लाल चोंच वाली चिड़िया’ शीर्षक से छह बड़े आकार के ड्राइंग उन्होंने बनाए हैं। पांच श्वेत-श्याम हैं जबकि एक रंगीन। इसके अलावा छोटे आकार के 16 चित्र हैं जिन्हें अब वे फाइनल टच देने में जुटे हैं। समय अनुकूल होते ही पटना आर्ट कॉलेज में इसकी प्रदर्शनी भी लगेगी।
पटना आर्ट कॉलेज के प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त 79 वर्षीय श्री शर्मा ने इन चित्रों को तैयार करने के लिए रोजाना छह से आठ घंटे काम किया है। कहते हैं, चीन की लम्बी चोंच वाली लाल चिड़िया बहुत खतरनाक होती है। कोरोना के चित्र में हमने इसी पक्षी को लाकर बैठा दिया। मास्क लपेटे आदमी, स्ट्रेचर पर लेटे आदमी, मौत की गिरफ्त, दहशत में लोग, चाहते तो ये सब आसानी से बना देते। लेकिन कला केवल मनोरंजन नहीं है, यह ज्ञानार्जन भी है। सोच के विकास का माध्यम भी है। इसलिए प्रतीकों के रूप में दिखलाया है कि कैसे आज पूरा विश्व कोरोना की चपेट में है।
उन्होंने कहा कि इसकी त्रासदी और इससे बचने का तरीका भी कृतियों में दिखता है। छापा कला में दक्षता के बावजूद ड्राइंग फार्म को चुनने की बाबत श्री शर्मा ने कहा कि इसका अलग आनंद है। ड्राइंग बिना आर्केस्ट्रा के अकेले गाए जाने वाले गीत जैसा है। बहरहाल, लॉकडाउन का जो सकारात्मक इस्तेमाल शर्मा ने कोरोना पर एक ‘महाकाव्य’ रचने में किया है, वह बिहार समेत देशभर के दूसरे कलाकारों के लिए भी अनुकरणीय है।
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