मायावती ने वाराणसी में मेडिकल अफसरों के सामूहिक इस्‍तीफे पर सरकार को घेरा 

मायावती ने वाराणसी में मेडिकल अफसरों के सामूहिक इस्‍तीफे पर सरकार को घेरा 

 लखनऊ 
बसपा अध्‍यक्ष मायावती ने वाराणसी में 32 स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र प्रभारियों के इस्‍तीफे पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा है कि समुचित सुविधाओं के अभाव में जान जोखिम में डालकर कोरोना पीडि़तों की सेवा में लगे डॉक्‍टरों पर सरकारी दबाव और धमकी से स्थिति बिगड़ रही है। उन्‍होंने कहा कि वाराणसी में 32 स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र प्रभारियों का सामूहिक इस्‍तीफा इसी का नतीजा है। उन्‍होंने सरकार से बिना भेदभाव के और पूरी सुविधा देकर उनसे सेवा ले तो बेहतर होगा। 

बसपा अध्‍यक्ष ने गुरुवार सुबह ट्वीट करके ये बातें कहीं। ट्वीट में उन्‍होंने लिखा कि कोरोना केन्द्रों और निजी अस्पतालों में भी कोरोना स्वास्थ्यकर्मियों की स्थिति काफी खराब है। इस कारण उन्हें आत्महत्या का प्रयास करने तक को मजबूर होना पड रहा है। यह अति-दुःखद है। सरकार व्यावहारिक नीति बनाकर और समुचित संसाधन देकर सही से उस पर अमल करे, बीएसपी की यह मांग है। 
 
गौरतलब है कि बुधवार को वाराणसी में डिप्‍टी कलेक्‍टर पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए 32 स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। मेडिकल अफसरों ने अपने इस्तीफे में लिखा कि 9 अगस्त को सहायक नोडल ऑफिसर/डि‍प्‍टी कलेक्‍टर ने प्रभारी चिकित्साधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए कोविड-19 के दौरान किये गए कार्यों को अपर्याप्त बताया है। नोटिस से सभी प्रभारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। टारगेट पूरा न होने पर आपराधिक कृत करार देना और मुकदमा दायर करने की धमकी दी जा रही है। इतने मानसिक दबाव में कैसे कार्य किया जा सकता है। 

मेडिकल अफसरों ने इस पत्र में एसीएमओ जंगबहादुर की मौत के लि‍ये भी प्रशासन को जि‍म्‍मेदार ठहराया है। आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से एसीएमओ को बर्खास्‍त करने की धमकी दी गयी थी।शायद इसी के सदमे से एडिशनल सीएमओ की मौत हुई है। चि‍कि‍त्‍साधि‍कारि‍यों ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि‍ इस मौत की ज़िम्मेदारी आखिर कौन लेगा। सामूहिक इस्तीफे से वाराणसी से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया। हालांकि देर शाम जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की पहल पर स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों की ओर से इस्तीफा वापस लेने का दावा किया गया।