खगड़िया के मतदाताओं के इरादे हैं पक्के, मुद्दे हैं जुबान पर
खगड़िया
खगड़िया जिले के मानसी बस स्टैंड के पास छोटा सा बाजार। चाय की दुकान पर कुछ लोग जमे हैं। सामने सड़कों पर सरपट दौड़ती गाड़ियां... गुरुवार का दिन। चुनाव की चर्चा शुरू करते ही, बात मुद्दों पर आती है। मुद्दे लोगों की जुबान पर है। जितने मुंह, उतने मुद्दे। मुद्दों को लेकर सबके अपने-अपने तर्क भी हैं। क्षेत्र में विकास हुआ है, इसे कोई भी नकारता नहीं है। पर, वे यह भी कहते कि लोगों की चाहतें व जरूरतें बढ़ी हैं। 50 वर्षीय व्यवसायी घनश्याम प्रसाद कहते हैं 'बहुत सुन लिया हमलोगों ने सब के दावे और वायदे, अब हमारी बारी है।' वहां पर चुनाव प्रचार का शोरगुल तो नहीं है, पर मतदाताओं में वोट देने के प्रति उत्साह छुपाए नहीं छुप रहा है। मतदाताओं के इरादे पक्के हैं।
खगड़िया जिले में चार विधानसभा क्षेत्र है- खगड़िया, परबत्ता, बेलदौर और अलौली। इनमें तीन जदयू तो एक सीट अभी राजद के पास है। इस बार के बदले समीकरण में ये सीटें किसके खाते में जाती है, यह देखना दिलचस्प होगा। एनडीए और महागठबंधन के बीच की लड़ाई में लोजपा के साथ ही अन्य गठबंधन भी यहां सक्रिय हैं। इनकी सक्रियता चुनावी परिणाम को क्या शक्ल देगी, यह जानने के लिए 10 नवंबर तक का इंतजार हमें करना होगा।
डुमरी के बाद अब अगवानी घाट पुल का इंतजार
दो सालों पहले खगड़िया के बेलदौर में डुमरी पुल के बन जाने से सहरसा व मधेपुरा जाना यहां के लोगों के लिए काफी आसान हो गया है। अब खगड़िया के ही परबत्ता में अगुआनी घाट पर बन रहे पुल के पूरा होने का लोगों को इंतजार है। खगड़िया के ठाठा गांव के निवासी नीरज कहे हैं, इस के पुल बन जाने से हम लोगों के लिए भागलपुर और मुंगेर जाना आसान हो जाएगा। सुल्तानगंज जल लेने जाने के लिए भी कांवरियों को स्टीमर का सहारा लेने की जरूरत नहीं होगी।
मक्का 12 रुपये बेच रहे तो आलू 50 में खरीद रहे
खगड़िया शहर से करीब 20 किलोमीटर दूरी पर है अलौली। अलौली विधानसभा क्षेत्र की पहचान पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. रामविलास पासवान से भी जुड़ी है। वर्ष 1969 में रामविलास पासवान पहली बार अलौली से ही विधायक बने थे। अलौली से कुछ ही दूरी पर उनका गांव शहरबन्नी है। अलौली के किसान मोहम्मद कमरान बताते हैं कि यहां हमलोगों की मुख्य फसल मक्का है। मक्का हमलोग 12 रुपए किलो बेच रहे हैं और हमें आलू 50 रुपये किलो खरीदना पड़ रहा है। लॉकडाउन के बाद से बाहर कमा रहे घर के सदस्य भी गांव लौट आए हैं। ऐसे में दोहरी मार हमलोग झेल रहे हैं।
रेलवे लाइन बिछने से लोगों में खुशी
अलौली से होते हुए खगड़िया से कुशेश्वरस्थान के लिए रेलवे लाइन बिछ रही है। अगले साल से इस लाइन पर ट्रेन सेवा शुरू होने की उम्मीद है। गांव के लोगों में इस बात की काफी खुशी है कि अब वेह भी रेलगाड़ी का सफर कर गांव पहुंच सकेंगे।
हमलोगों की कमाई आधी से भी कम हुई
खगड़िया सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मोहन चौधरी चुनावी मुद्दों के बारे में पूछने पर कहते हैं कि हमलोग नेताओं को देखें कि परिवार चलायें। लॉकडाउन के बाद से कमाई आधी से भी कम हो गई है। घर चलाना मुश्किल है। जो कुछ भी काम हो रहा है वह वर्चुअल। आगे वे कहते हैं, जो भी हो, वोट देने तो जाएंगे ही।
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