कोराना का खौफ: जरूरी सेवा में लगे अधिकारी-कर्मचारी ड्यूटी से नदारद, अफसरों ने सूची तैयार करने को कहा

कोराना का खौफ: जरूरी सेवा में लगे अधिकारी-कर्मचारी ड्यूटी से नदारद, अफसरों ने सूची तैयार करने को कहा

पटना 
कोरोना वायरस के कारण फैली महामारी से हर कोई परेशान है। सरकार भी लोगों को घरों में रहने के लिए कह रही है। लेकिन कुछ ऐसे विभाग है जिसका काम पर होना आवश्यक है। उन्हें इस महामारी से लड़ने के लिए हर सुविधा दी जा रही है। बावजूद इसके जरूरी सेवाओं में लगे कर्मचारी ड्यूटी से गायब हो जा रहे हैं। ऐसे लोग संक्रमण से बचने के लिए नौकरी तक छोड़ने को तैयार हैं। शहर की सफाई में लगे हजारों कर्मचारी, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों को रोटेशन के आधार पर बुलाया जा रहा है। इसके बाद भी शहर के सैनिटाइजेशन में लगे मजदूर ड्यूटी से गायब हो जा रहे हैं। बुखार, सर्दी का बहाना बनाकर लोग घरों में ही रह रहे हैं। कई तो सफाई का काम ही छोड़ चुके हैं। गांव की ओर लौट चुके लोग अब शहर आएंगे की नहीं इसपर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

वेतन काटने की धमकी के बाद भी नहीं लौटे
र्बोंरग रोड में सफाई का काम करने वाले मजदूर ड्यूटी से गायब हैं। कूड़ा उठाव से लेकर डोर-टू-डोर में काम करते थे। लेकिन जैसे ही कोरोना को लेकर लॉक डाउन की घोषणा हुई। शहर के बाहर से काम पर आए लोग गांव लौट गए। अब उनके सुपरवाइजर लगातार बुला रहे हैं, मगर काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं। लॉक डाउन खत्म होने के बाद ही शहर पहुंचने की बात कर रहे हैं।

दवा छिड़काव से फॉगिंग पर इसका बूरा असर
राजधानी में दवा छिड़काव से फर्ॉंगग में काम करने वाले मजदूरों की संख्या बेहद कम है। इतना ही नहीं निगम के सभी छह अंचलों में आधे कर्मचारी एक दिन आते हैं दो दूसरे दिन आधे। इससे भी काम प्रभावित हो रहा है। अफसर लगातार कर्मचारियों को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों से आने वाली शिकायत का निपटारा भी नहीं हो पा रहा है। पहले से ही 50 फीसदी कर्मचारियों के साथ काम करने वाले सरकारी दफ्तरों की हालत बेहद खराब हो चुकी है।

कहीं खुल रहे दफ्तर, लेकिन चुपके से
वन विभाग के दफ्तर अब भी खुल रहे हैं। कंप्यूटर ऑपरेटरों के साथ मुख्य अफसर दफ्तर पहुंच रहे हैं। दफ्तर बंद रहने के सरकारी आदेश के बाद भी बिल की निकासी के लिए दफ्तर पहुंच रहे हैं। कुछ कर्मचारियों को अफसर जबरन भी बुला रहे हैं। नेहरू नगर और अरण्य भवन में अब भी कर्मचारी हर दिन पहुंचते हैं। जांच से बचने के लिए बाहरी प्रवेश द्वार को बंद रखा जाता है।

शहर के हर इलाके से सैनिटाइजेशन के लिए शिकायत बहुत आ रही है। लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण इसे तुरंत दूरी नहीं कर पा रहे हैं। जो हैं वो दिन-रात काम कर रहे हैं। ड्यूटी से गायब हो जाने से परेशानी और बढ़ जा रही है। 
-प्रतिभा कुमारी, कार्यपालक पदाधिकारी, पाटलिपुत्र अंचल

वर्तमान में वायरस के बचाव के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन गलियों तक दवा छिड़काव नहीं होने की शिकायत आ रही है। कर्मचारी कम हैं, इसलिए समय पूरा होते ही लौट जा रहे हैं। 
-सुशील मिश्रा, कार्यपालक पदाधिकारी, पटना सिटी