पटना, बिहार विधानसभा आम चुनाव को लेकर कांग्रेस आज यानी बुधवार को घोषणा पत्र जारी करेगी। कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल, कांग्रेस के मीडिया एवं संचार विभाग के अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा सहित पार्टी के अन्य नेता इस मौके पर मौजूद रहेंगे। मीडिया समन्वय समिति के संयोजक प्रेमचंद मिश्र ने इसकी जानकारी दी।
70 सीट पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस, सभी सीट पर उम्मीदवार घोषित
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस राजद के साथ मिलकर 70 सीट पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी ने सभी सीट पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने सबसे ज्यादा टिकट सवर्ण, उसके बाद दलित और तीसरे नंबर पर मुस्लिम है। सवर्णों में पार्टी ने 9 ब्राहमण उम्मीदवार बनाए हैं। जबकि अनुसूचित जाति से 14 और 12 मुस्लिम उम्मीदवार हैं। ब्राहमण, दलित और मुस्लिम कांग्रेस को परंपरागत वोट रहा है। चुनाव में पार्टी इन मतदाताओं पर फोकस करेगी।
बिहार चुनाव के साथ यूपी में भी राजनीतिक संदेश
कांग्रेस बिहार चुनाव के साथ यूपी में भी राजनीतिक संदेश देना चाहती है। जाले विधानसभा सीट से मशकूर अहमद उस्मानी को टिकट देना इसी रणनीति का हिस्सा है। बिहार में उस्मानी को टिकट और यूपी में डॉ कफील खान की रिहाई के लिए मुहिम से साफ है कि पार्टी अब फ्रंट पर खेलना चाहती है। ताकि, मुस्लिम मतदाताओं को फिर से भरोसा जीता जा सके। हाथरस मामले में कांग्रेस का अक्रामक रुख रणनीति का हिस्सा है। पार्टी को इस पूरी मुहिम का राजनीतिक लाभ मिलता या नहीं, यह तो वक्त तय करेगा। पर पार्टी यह संदेश देने में सफल रही है कि वह दलितों के मुद्दों को लेकर अक्रामक है। जबकि ऐसे मामलों में बसपा का रुख बहुत अक्रामक नहीं रहा है। समाजवादी पार्टी के हमलों में पहले जैसी धार नहीं थी।
कांग्रेस के अंदर एक बड़ा तबका मौजूदा राजनीतिक हालात में इस तरह के जोखिम लेने के खिलाफ है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बिहार में मशकूर अहमद उस्मानी को टिकट देकर भाजपा को मुद्दा दे दिया है। अभी तक प्रचार में स्थानीय मुद्दे हावी थे, पर अब जिन्ना की एंट्री हो गई है। इन नेताओं का मानना है कि पार्टी को इस तरह के निर्णय से परहेज करना चाहिए था।
कांग्रेस ने सबसे अधिक युवा उम्मीदवारों को मैदान में उतारा
कांग्रेस(Congress) ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सभी विंग के अध्यक्षों को मैदान में उतार दिया। कांग्रेस के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है। पार्टी ने सबसे अधिक युवा उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इसका लाभ युवा नेताओं को सबसे अधिक हुआ पर छात्र संगठन एनएसयूआई को एक भी सीट नहीं मिली।
कांग्रेस के प्रत्याशियों का चयन यह दर्शाता है कि वह अब अपने पुराने नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने से परहेज करने लगी है। उसका भरोसा अपने युवा नेताओं पर अधिक है। पार्टी के चार कार्यकारी अध्यक्षों में सिर्फ एक को ही टिकट मिल सका है। उधर, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष विनीता भूषण बेगूसराय से चुनाव लड़ रही हैं। अनुसूचित जाति/जन जाति विभाग के अध्यक्ष राजेश राम कुटुम्बा से उम्मीदवार हैं। ये दोनों नेता दूसरी बार मैदान में हैं। इसके पहले 2015 के चुनाव में भी इन नेताओं ने जीत हासिल की थी। आईटी सेल के अध्यक्ष ई. संजीव को भी इस बार टिकट मिला है।
युवा कांग्रेस की कमान संभालने वाले तीन नेता चुनाव मैदान में
युवा कांग्रेस की राज्य में कमान संभालने वाले तीन नेता चुनाव मैदान में हैं। अध्यक्ष गुंजन पटेल नालंदा से चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व अध्यक्ष ललन यादव सुल्तानगंज तो नगेन्द्र कुमार पासवान विकल रोसड़ा से चुनाव मैदान में हैं। चौथे उम्मीदवार के रूप में गत बार चुनाव लड़ने वाले पूर्व अध्यक्ष कुमार अशीष का नाम भी बांकीपुर से तय था, लेकिन अंतिम समय में उनका टिकट शत्रुघ्न सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा झटक ले गये। पार्टी ने पुराने नेताओं में श्याम सुन्दर सिंह धीरज, कौकब कादरी को भी टिकट नहीं दिया। पुराने दिग्गज नेता कपिल देव प्रसाद यादव भी पटना के कुम्हरार सीट से चुनाव लड़ने से वंचित हो गये। विधायक दल के नेता सदानंद सिंह और पूर्व मंत्री अवधेश कुमार सिंह की जगह उनके पुत्रों को क्रमश: कहलगांव और वजीरगंज से चुनाव मैदान में उतारा है। इसके अलावे पार्टी के लगभग एक दर्जन उम्मीदवारों की उम्र 40 साल के आसपास है। दूसरी बार चुनाव मैदान में उतरे औरंगाबाद के आनंद शंकर की उम्र तो 40 से भी कम है।