राकेश टिकैत दी ये सफाई, प्रदर्शनकारी किसान डाल रहे दिल्ली की ऑक्सीजन सप्लाई में बाधा?
नई दिल्ली
केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बुधवार को इन आरोपों को दुष्प्रचार कहकर खारिज कर दिया कि वे मेडिकल ऑक्सीजन के वाहनों को शहर में नहीं जाने दे रहे हैं और कोविड-19 मरीजों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि ये आरोप सरासर गलत हैं, हाईवे खुले हैं। यहां से पूरी आपूर्ति हो रही है। भाजपा सासंद प्रवेश वर्मा ने मंगलवार रात को आरोप लगाया था कि दिल्ली में मेडिकल ऑक्सीजन की ढुलाई किसानों द्वारा सड़क जाम कर दिए जाने के कारण प्रभावित हुई है। कई किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने बुधवार को कहा कि आंदोलन के पहले दिन से ही उन्होंने आपात सेवाओं के लिए एक तरफ का मार्ग खुला छोड़ रखा है। किसान मोर्चा ने कहा कि एक भी एंबुलेंस या जरूरी वस्तु सेवा को नहीं रोका गया है। किसान नहीं, बल्कि यह सरकार ही है जिसने मजबूत और बहुस्तरीय बैरिकेड (कील) लगा दिए हैं। किसान मानवाधिाकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और वे हर मानव के अधिकार का समर्थन करते हैं।
मोर्चा ने कहा कि किसानों के विरुद्ध दुष्प्रचार किया जा रहा है कि उन्होंने सड़कें जाम कर दी हैं और दिल्ली में ऑक्सीजन नहीं आने दे रहे हैं। यह बिल्कुल गलत खबर है। हां, हम प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन हम कोविड-19 मरीजों, कोरोना योद्धाओं या आम नागरिकों के विरुद्ध नहीं प्रदर्शन कर रहे हैं। हम कृषि पर सरकार की भेदभावकारी नीति के खिलाफ हैं। वहीं, ऑक्सीजन गैस निर्माताओं के यह कहने पर कि किसान आंदोलन की वजह से ऑक्सीजन की आपूर्ति में देरी हो रही है पर गाजीपुर बॉर्डर पर डटे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि ये आरोप सरासर गलत हैं, हाईवे खुले हैं। यहां से पूरी आपूर्ति हो रही है। ये समझ में नहीं आ रहा कि गैस कंपनियों ने किसके कहने से आरोप लगाया। देश में ऑक्सीजन की कमी हो रही है तो एक बहाना ये ही लगा दो। यह राजनीतिक बयान है। किसान संगठनों ने किसी भी आवश्यक आपूर्ति को नहीं रोका है। पंजाब, हरियाणा एवं कई अन्य राज्यों के हजारों किसान तीन केंद्रीय कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं।
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