भागलपुर क्षेत्र में उगने वाले प्रसिद्ध करतनी चावल बेचेगी पतंजलि!, बीएयू ने पत्र लिखकर की पेशकश

भागलपुर क्षेत्र में उगने वाले प्रसिद्ध करतनी चावल बेचेगी पतंजलि!, बीएयू ने पत्र लिखकर की पेशकश

भागलपुर 
बिहार के भागलपुर क्षेत्र में उगने वाले प्रसिद्ध और सुगंधित करतनी चावल बेचेगी पतंजलि!  दरअसल सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने कतरनी चावल को लेकर उत्तराखंड स्थित पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को समझौते की पेशकश की है। इसे लेकर बीएयू के कुलपति ने पतंजलि के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखा है।

पत्र में कहा है कि कतरनी चावल की पैदावार भागलपुर, बांका और मुंगेर क्षेत्र में ही होता है। उन्होंने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को भागलपुरी कतरनी धान उत्पादक संघ के साथ समझौता कर यहां के कतरनी चावल को बाजार मुहैया कराने की बात कही है। इससे यहां के किसानों को भी सही कीमत मिल सकेगा और लोगों को कतरनी चावल का असली स्वाद और सुगंध मिलेगा। 

पूरे देश में कतरनी का नाम बढ़ेगा
कतरनी चावल का जीआई सार्टिफिकेशन भागलपुरी कतरनी धान उत्पादक संघ को मिल चुका है। इसके तहत दूसरे क्षेत्र के किसान इसकी खेती नहीं कर सकते हैं। बाजार में कई पैकेट बंद उत्पाद कतरनी के नाम पर बेचे जा रहे हैं, लेकिन उसमें न तो कतरनी का स्वाद और न ही सुगंध पाया जाता है। कुलपति डॉ. एके सिंह ने पतंजलि को पेशकश दी है कि किसानों के समूह के साथ समझौता कर लोगों को सही भागलपुर कतरनी चावल पहुंचाया जाए। इससे न सिर्फ लोगों को कतरनी का स्वाद मिलेगा, बल्कि यहां के किसानों को भी फायदा मिलेगा। जगदीशपुर के किसान मन्नू यादव ने कहा कि पतंजलि अगर यहां के कतरनी चावल को बेचता है तो किसानों को काफी लाभ मिलेगा। साथ ही पूरे देश में कतरनी का नाम बढ़ेगा।

900 एकड़ में हो रही है खेती 
2017 के आंकड़े के अनुसार भागलपुर, बांका और मुंगेर में 900 एकड़ में कतरनी की खेती होती है। भागलपुर में जगदीशपुर और सुल्तानगंज, बांका में अमरपुर, रजौन और बाराहाट व मुंगेर में तारापुर और असरगंज में इसकी खेती होती है। बीएयू के पौधा प्रजनन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. मंकेश कुमार ने कहा कि कतरनी पौधे की लंबाई कम करने से लेकर उसकी सुगंध वापस लाने की दिशा में काम हो रहा है।