एम्स भोपाल में प्रदेश का पहला सरकारी IVF सेंटर तैयार, इसी महीने से होगा नि:संतान दंपतियों का इलाज
भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित एम्स (All India Institute of Medical Sciences) में प्रदेश का पहला सरकारी आईवीएफ (In-Vitro Fertilization) सेंटर इसी महीने से शुरू हो जाएगा। भोपाल में इस सुविधा के शुरू होने से अब राज्य के उन दंपतियों को बड़ी मदद मिलेगी, जो अब तक महंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए मजबूर थे।
बता दें कि एम्स भोपाल प्रदेश का पहला और देश का तीसरा आइबीएपफ सेंटर है। मिली जानकारी के अनुसार प्राइबेट अस्पतालों में 4—5 लाख रुपए में होने वाला इलाज यहां मात्र 50 से 80 हजार रुपए में होगा। यह सेंटर लगभग 20 करोड रुपए की लगात से बनकर तैयार हुआ है। डाक्टरों का प्रशिक्षण भी दिसंबर 2025 में पूरा हो चुका है, जिसका लाभ नि:संतान दंपतियों को इसी महीने से मिलना शुरू हो जाएगा।
क्या है IVF सेंटर
आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) आधुनिक प्रजनन तकनीक है, जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद इस भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। इसी प्रक्रिया से जन्मे बच्चे को आमतौर पर टेस्ट ट्यूब बेबी कहा जाता है।
एम्स भोपाल में क्यों खास है यह सुविधा
एम्स भोपाल में स्थापित यह IVF सेंटर अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीक से लैस है। यहां डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने के लिए IVF स्किल लैब भी तैयार की गई है, जिसमें डिजिटल सिमुलेटर के माध्यम से डॉक्टर IVF से जुड़ी प्रक्रियाओं का अभ्यास कर सकते हैं। इसमें हिस्टेरोस्कोपी, ओवम पिक-अप और एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अब तक क्या स्थिति थी
अब तक मध्य प्रदेश में IVF की सुविधा मुख्य रूप से निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध थी। वहां इलाज का खर्च 4 से 5 लाख रुपये लग जाता है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के दंपतियों के लिए इलाज कराना मुश्किल हो जाता था। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से अब कम खर्च में इलाज मिलने की उम्मीद है।
डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को भी मिलेगा लाभ
एम्स भोपाल में शुरू हुए इस IVF सेंटर से न केवल मरीजों को फायदा मिलेगा बल्कि मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों को भी आधुनिक प्रजनन तकनीक का प्रशिक्षण मिलेगा। इससे प्रदेश में बांझपन के इलाज की सुविधाएं और बेहतर होंगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिलेगी।
प्रदेश के नि:संतान दंपतियों के लिए बड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि IVF सेंटर शुरू होने से प्रदेश के हजारों दंपतियों को फायदा होगा। इससे उन्हें अपने ही राज्य में बेहतर इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिल सकेगी। एम्स भोपाल में शुरू हुए IVF (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटर का उद्देश्य निजी अस्पतालों की तुलना में कम खर्च में इलाज उपलब्ध कराना है।
इलाज में संभावित खर्च
सरकारी अस्पताल होने के कारण यहां एक IVF साइकिल का खर्च लगभग ₹40,000 से ₹80,000 तक हो सकता है।
कुछ जांच, दवाइयां और अन्य प्रक्रियाएं अलग से जुड़ सकती हैं। कुल मिलाकर पूरा इलाज करीब ₹60,000 से ₹1 लाख तक पड़ सकता है।
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