गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना में अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई, 181 हेल्पलाइन से 90 हजार लाभार्थियों से फीडबैक: सहकारिता राज्य मंत्री
जयपुर। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं शिकायतों के त्वरित समाधान की दिशा में विभाग द्वारा नवाचार के रूप में 181 हेल्पलाइन के माध्यम से योजना के 90 हजार लाभार्थियों को कॉल कर फीडबैक लिया जा रहा है। प्राप्त शिकायतों एवं सूचनाओं का विश्लेषण कर किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी एवं अनियमितता पाए जाने पर कार्यवाही की जा रही है।
उन्होंने कहा कि विभाग को योजना के तहत ऋण वितरण में अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें बाड़मेर जिले में प्राप्त एक गंभीर शिकायत पर विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए तत्कालीन प्रबंध निदेशक को 16 सीसी के तहत कार्रवाई की तथा निलंबित किया गया एवं प्रकरण में संलिप्त शाखा प्रबंधकों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई। इसके साथ ही धारा 55 के तहत समिति गठित कर प्रकरण की जांच करवाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस मामले में 385 अवधिपार ऋणियों को ऋण वितरित किया गया था, इनमें से विभाग द्वारा 317 ऋणियों से ऋण की वसूली की जा चुकी है एवं शेष 68 से भी शीघ्र ही वसूली सुनिश्चित की जाएगी। इस प्रकरण की पूरी जाँच के लिए विभाग द्वारा एसीबी को पत्र भी लिखा गया है।
सहकारिता राज्य मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक कालीचरण सराफ द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रही थे। उन्होंने बताया कि जयपुर जिलें में कुल 14,513 गोपालकों द्वारा ऋण के लिए आवेदन किया गया, जिनमें से 7,852 गोपालकों को लगभग 38 करोड़ 43 लाख की राशि का ऋण वितरण किया जा चुका है।
इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में सहकारिता राज्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना वर्ष 2024-25 में प्रारम्भ की गई। योजनान्तर्गत 17 फरवरी, 2026 तक 1,60,981 गोपालकों द्वारा आवेदन किया गया तथा 90,491 गोपालकों को 681.32 करोड़ की राशि रूपये का ऋण वितरण किया गया।
राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 में राजस्थान गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना दिनांक 24 जून, 2024 को लागू की गई। गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना की कठोर शर्तों में 04 दिसम्बर,2024 को संशोधन किये गये है। योजना व योजना में किए गए संशोधन का विवरण उन्होंने सदन के पटल पर रखा।
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