गरियाबंद के 25 मजदूर तेलंगाना में बंधक, प्रशासन ने दिए छुड़ाने के आश्वासन

गरियाबंद के 25 मजदूर तेलंगाना में बंधक, प्रशासन ने दिए छुड़ाने के आश्वासन

गरियाबंद
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में मजदूरों का पलायन और उनकों बंधक बनाया जाना एक गंभीर समस्या बन गई है. जिले के मजदूर बड़ी संख्या में रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ काम का लालच देकर दूसरे प्रदेशों में उन्हें बंधक बनाने की भी खबरें लगातार सामने आ रही हैं. इन सबके बीच सरकार और शासन के अपने दावे हकीकत से कोसों दूर हैं.

गरियाबंद में बाडीगांव के देवानंद नागेश के परिवार के 13 सदस्य तेलंगाना के करीमनगर में बंधक हैं. देवानंद उन्हें छुड़ाने की गुहार लगाने के लिए देवभोग एसडीएम के पास पहुंचा. वैसे कुछ दिन पहले तक देवानंद और उसकी पत्नी भी वहीं बंधक थे, लेकिन उसके ससुराल वालों ने ठेकेदार को 60 हजार रुपए देकर उन्हें तो छुड़ा लिया पर उसके माता पिता और परिवार के कुल 13 लोग अभी भी ठेकेदार के चंगुल में फंसे हुए हैं. उन्हें छुड़ाने की गुहार लगाने के लिए देवानंद अधिकारियों के चक्कर काट रहा है.

वैसे सिर्फ देवानंद का परिवार ही तेलंगाना में बंधक नहीं है बल्कि गरियाबंद के भरुवामुडा का एक ओर परिवार ठेकेदार के चंगुल में फंसा हुआ है. परिवार का मुखिया भुवन पीएम आवास मिलने के लालच में उनके साथ नहीं जा पाया, लेकिन उसकी पत्नी और नाबालिग बेटा समेत उसके परिवार के कुल 12 सदस्य तेलगांना में बंधक बने हुए हैं.

भुवन ने बताया कि कुछ महीने पहले ओडिशा का एक ठेकेदार ईंट भट्ठे पर काम करने के ज्यादा पैसे देने का लालच देकर उसके परिवार के लोगों को लेकर गया था, लेकिन वहां जाकर बहुत कम मजदूरी दी जा रही है. साथ ही काम भी ज्यादा लिया जा रहा है. यही नहीं भुवन ने बताया कि अब उनके परिवार के लोगों से ठेकेदार ने मोबाइल भी छीन लिया है और उनसे मारपीट करना शुरू कर दिया है.

अब मामला सामने आया तो जिला प्रशासन ने एक बार फिर उन्हें छुड़ाने की मुहिम शुरू कर दी है. देवभोग एसडीएम निर्भय साहू ने जल्द ही एक टीम तेलंगाना के लिए रवाना करने का आश्वासन दिया है.

जिले के मजदूरों का बंधक बनाया जाना कोई नई बात नहीं है. इसी साल अब तक सैकड़ों मजदूरों को बंधक बनाए जाने और फिर जिला प्रशासन द्वारा उन्हें छुड़ाए जाने के कई मामले सामने आ चुके है, अब एक बार फिर 25 मजदूरों के बंधक बनाए जाने की बात सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने उन्हें छुड़ाने की कवायद तो शुरू कर दी है, लेकिन सबसे अहम और महत्वपूर्ण बात यह है कि आखिर जिले के मजदूरों को पलायन के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है.