घरेलू उड़ान क्षेत्र की रफ्तार हुई धीमी
नई दिल्ली
दिग्गज विमानन कंपनियों की बदहाली का नकारात्मक असर घरेलू उड़ान क्षेत्र पर भी पड़ ही गया। पिछले चार सालों से करीब 20 फीसदी की विकास दर से बढ़ने वाला यह क्षेत्र इस बार पांच फीसदी की विकास दर के लिए भी संघर्ष करता नजर आ रहा है। आलम ये है कि पिछले साल छह महीने में जहां इस घरेलू यात्रियों की संख्या में 22% का इजाफा था, वहीं इस साल जनवरी से जून के बीच यात्रियों की संख्या में मात्र तीन फीसदी का इजाफा हुआ है।
नागरिक उड्डयन महानिदेशक के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार के गठन के बाद से ही देश का नागरिक उड्डयन उद्योग तेजी से बढ़ने लगा था और पिछले चार सालों में घरेलू यात्रियों की संख्या में लगातार 20 फीसदी की औसत से इजाफा होता रहा है। सरकार की ओर से घोषित उड़ान योजना ने भी इस तेजी में बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि, इस साल की शुरुआत से ही इस रफ्तार पर लगाम करने लगी।
मार्च का महीना आते-आते जेट एयरवेज के बंद होने, एयर इंडिया की बदहाली और इंडिगो जैसी सफल एयरलाइंस में पायलटों की कमी के चलते उड़ानों के रद्द होने का सिलसिला बढ़ता गया और इस दौरान मार्च में यात्रियों की संख्या में नगण्य इजाफा हुआ, वहीं अप्रैल में मामूली वृद्धि हुई।
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