भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कष्ट सहे, लेकिन दूसरों के लिए प्रशस्त किया सुख-समृद्धि का रास्ता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दीं जन्माष्टमी की मंगलकामनाएं
बाल-गोपाल और राधा कृष्ण की वेशभूषा में शामिल हुए नन्हें बच्चे, मुख्यमंत्री ने खिलाया माखन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मलखंभ खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन
सुमधुर भजनों की प्रस्तुति से मुख्यमंत्री निवास हुआ श्रीकृष्णमय
भारतीय अर्थव्यवस्था ने ग्रोथ रेट में अमेरिका और जापान को पछाड़ा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भेंट की गई वैदिक घड़ी
भोपाल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के नाम से भारत की पहचान दुनियाभर में बनी है। उन्होंने सृष्टि का उद्धार करने के लिए पृथ्वी पर मानव रूप में जन्म लिया। अपने जीवन में अनेकों कष्ट सहे और दुष्टों का संहार कर जनता के लिए सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया। भगवान श्रीकृष्ण ने कारागार में जन्म लेने के बाद अपनी बाल्यकाल की लीलाओं से आमजन के कई कष्टों को मुस्कुराते हुए दूर किया। उन्होंने विश्व को संदेश दिया कि हमें मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य और संयम से काम लेना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने हमें कष्टों को दूर कर मार्ग निकालने की प्रेरणा दी है। उज्जैन में महर्षि सांदीपनि के आश्रम में श्रीकृष्ण ने 64 कला और 14 विद्याएं सीखीं। श्रीकृष्ण के जीवन से हम सभी के लिए शिक्षा का महत्व प्रतिपादित होता है। सांदीपनि आश्रम में सुदामा जी के साथ उनकी मित्रता के प्रसंग हर काल में प्रासंगिक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आख्यान पर्व के अवसर पर उपस्थित जनों को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल्य स्वरूप लड्डू गोपाल का जलाभिषेक कर विधिवत पूजन-अर्चन किया। मुख्यमंत्री ने माखन और मिसरी से भरी मटकी फोड़कर राधारानी और बाल गोपाल की वेशभूषा में आए नौनिहालों को माखन खिलाया और उपहार देकर दुलार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनाएं दी।
मयूर नृत्य, मलखंभ खिलाड़ियों के करतब से दर्शक हुए मंत्रमुग्ध
श्रीकृष्ण आख्यान की कला अभिव्यक्तियों के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न कला समूहों ने श्रीकृष्ण जन्म, श्रीकृष्ण लीला, कालिया नाग मर्दन, गोवर्धन लीला, कंस वध, गीता उपदेश सहित श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित नृत्य नाटिकाओं का मंचन किया। जबलपुर से आए जुगलकिशोर नामदेव और उनके साथी कलाकारों ने मयूर नृत्य, ब्रज में आनंद उमंग भयो जय हो नंदलाल की, आज ब्रज में होली रे रसिया, श्रीकृष्ण गोबिंद हरे मुरारी जैसे सुमधुर भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिससे मुख्यमंत्री निवास का वातावरण श्रीकृष्णमय होकर भक्तिरस से सराबोर हो गया। कार्यक्रम में भारत सिंह पालीवाल के निर्देशन में उज्जैन से आए खिलाड़ियों ने मलखंभ की प्रस्तुति दी। खिलाड़ियों के अद्भुत करतब देखकर पंडाल में मौजूद सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मलखंभ खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाकर सभी का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वैदिक घड़ी भी भेंट की गई।
भव्य तीर्थ के रूप में जीवंत हो रहे प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े स्थान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को भव्य तीर्थ के रूप में विकसित कर जीवंत करने के लिए संकल्पित है। श्रीकृष्ण पाथेय में उज्जैन का सांदीपनि आश्रम, जानापाव, महिदपुर सहित अन्य तीर्थ स्थल शामिल हैं। इसी प्रकार से संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से प्रभु श्रीराम से जुड़े चित्रकूट धाम को भव्यता के साथ विकसित किया जा रहा है। हमारी सरकार ने सनातन संस्कृति के गौरवशाली अतीत से दुनिया को परिचित कराने के लिए त्यौहार और पर्वों को हर्षोल्लास के साथ व्यापक स्तर पर मनाने की शुरुआत की है।
विश्व बंधुत्व का संदेश देते हुए आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा भारत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के अथक प्रयासों से आज भारत विश्व बंधुत्व का संदेश देते हुए आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है। हमारी संस्कृति अच्छाई बांटने वाली संस्कृति है। हम इसके वैभव को पुन: प्रतिष्ठित करने के लिए कटिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों पर युद्ध के संकट का साया है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है। ग्रोथ रेट के मामले में भारत ने अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। भारत सरकार अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और अपने विदेशी रिश्तों को मजबूत करेगी।
श्रीकृष्ण के चतुर्भुज रूप की शोभा हैं सुदर्शन चक्र और पांचजन्य शंख
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आचार्य सांदीपनि का पहला आश्रम बनारस में था। इसके बाद वे परिवार के साथ उज्जैन आए और यहां विद्यार्थियों को शिक्षा देना प्रारंभ किया। सांदीपनि आश्रम की शिक्षा पद्धति प्रसिद्ध और अद्भुत थी। तत्कालीन समय में गुजरात के प्रभाषपाटण (वर्तमान में द्वारिका) क्षेत्र में जम जाति के आक्रांताओं का आतंक फैला था। जब आचार्य सांदीपनि ने उनके बच्चों को शिक्षा देने के इनकार कर दिया तो आक्रांताओं ने उनके पुत्र को बंधक बना लिया। इसके बाद महर्षि सांदीपनि उज्जैन लौट आए और इस कठिन काल में भी 11 वर्षों तक विद्यार्थियों को शिक्षित करते रहे। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने शिक्षा पूर्ण होने पर मथुरा जाकर जरासंध से युद्ध किया। आचार्य सांदीपनि के बताने पर श्रीकृष्ण जानापाव गए और भगवान परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया। श्रीकृष्ण ने तभी निश्चय कर लिया था कि गुरु के बेटे को जम आक्रांताओं से मुक्त कर उन्हें गुरु दक्षिणा के रूप में सकुशल लौटाएंगे। जब श्रीकृष्ण युद्ध समाप्त कर लौट रहे थे तो समुद्र से उन्हें पांचजन्य शंख मिला। सुदर्शन चक्र और पांचजन्य शंख भगवान श्रीकृष्ण के चतुर्भुज रूप की शोभा हैं।
जन्माष्टमी पर्व कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, वरिष्ठ समाजसेवी रघुनंदन शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय, रविन्द्र यति, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित अनेक संत-वृंद , माताएं-बहनें, बाल-गोपाल, मुख्यमंत्री निवास के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
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