जीएसटी चोरी पर वाणिज्यिक कर विभाग की बड़ी कार्रवाई

जीएसटी चोरी पर वाणिज्यिक कर विभाग की बड़ी कार्रवाई

लगभग 55.33 लाख रूपए की संभावित कर देनदारी आई सामने, 25.61 लाख रूपए जमा

जयपुर। राज्य में जीएसटी प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करने और कर अपवंचन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा लगातार सघन सर्वे एवं सर्च कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विभाग की टीमों ने जयपुर, जोधपुर एवं बाड़मेर में तीन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते हुए विभिन्न अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज एवं रेकार्ड जुटाए हैं। प्रारंभिक जांच में कुल लगभग 55.33 लाख रूपए की संभावित कर देनदारी सामने आई है। इनमें से 25.61 लाख रूपए की राशि स्वैच्छिक रूप से जमा कराई जा चुकी है।

विभाग द्वारा आयुष व्हील्स इंडिया, जयपुर में 25 अगस्त को सर्वे कार्रवाई की गई। विभाग को फील्ड सूचना के आधार पर प्रतिष्ठान के एक अतिरिक्त व्यवसाय स्थल के लंबे समय से सक्रिय होने तथा हाल में उसे जीएसटी पोर्टल पर नए व्यवसाय स्थल के रूप में जोड़ने के लिए आवेदन किए जाने की जानकारी मिली थी। प्रारंभिक जांच में बिक्री को छिपाए जाने की आशंका सामने आई।

कार्रवाई के दौरान फर्म के प्रोपराइटर का बयान दर्ज किया गया तथा बिक्री एवं खरीद से संबंधित बिल, स्टॉक सारांश सहित उपलब्ध रेकार्ड की जांच की गई। मामले में लगभग 11.93 लाख रूपए की संभावित कर देनदारी सामने आई, जिसमें से 10 लाख रूपए की राशि स्वैच्छिक रूप से जमा कराई गई है। शेष दस्तावेजों एवं अभिलेखों की जांच के लिए आगे की कार्रवाई जारी है।

बाड़मेर जिले के सेड़वा क्षेत्र में चामुंडा कंस्ट्रक्शन कंपनी के विरुद्ध 27 अगस्त को सर्वे कार्रवाई की गई। यह फर्म सड़क निर्माण एवं भवन निर्माण जैसे सेवा क्षेत्र में कार्यरत है। प्रारंभिक जांच में ऐसे करदाताओं से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लिए जाने की जानकारी सामने आई, जिनका पंजीयन प्रारंभ से ही निरस्त था अथवा निरस्त किया जा चुका था। 

कार्रवाई के दौरान क्षेत्रीय प्रबंधक का बयान दर्ज किया गया तथा पंचनामा तैयार किया गया। प्रारंभिक स्तर पर 28.40 लाख रूपए की संभावित देनदारी सामने आई है। इसमें से ₹15.61 लाख की राशि 29 अगस्त को स्वैच्छिक रूप से जमा कराई गई। शेष अभिलेखों की जांच एवं आगे की कार्रवाई जारी है।

इसी क्रम में विभाग ने एआरके प्लाईलैम, आरआईआईसीओ इंडस्ट्रियल एरिया, बोरानाडा, जोधपुर में 27 अगस्त को सर्च कार्रवाई की। प्रारंभिक जांच में जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट के अधिक/गलत अथवा अपात्र दावे किए जाने की आशंका सामने आई। जीएसटी रिटर्न के विश्लेषण में यह भी पाया गया कि फर्म की लगभग पूरी आउटवर्ड टैक्स देनदारी का भुगतान आईटीसी के माध्यम से किया गया जबकि कैश लेजर के माध्यम से भुगतान बहुत कम रहा।

सर्च के दौरान प्रतिष्ठान से अनअकाउंटेड बिक्री की ओर संकेत करने वाले लूज पेपर्स मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया। इन दस्तावेजों का फर्म के बहीखातों, जीएसटी रिटर्न एवं अन्य रेकार्ड से मिलान किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में लगभग 15 लाख रूपए की संभावित कर देनदारी का आकलन किया गया है। करदाता ने जांच एवं देनदारी के अंतिम निर्धारण के अधीन कर, ब्याज एवं पेनल्टी का भुगतान करने की इच्छा व्यक्त की है।

कर अपवंचन के मामलों में विभाग की सख्त निगरानी

वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जीएसटी रिटर्न, ई-वे बिल, आईटीसी दावों, खरीद-बिक्री के रेकार्ड एवं वास्तविक कारोबार के बीच अंतर का तकनीकी एवं भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। विभाग का स्पष्ट उद्देश्य है कि ईमानदारी से कर चुकाने वाले करदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, वहीं कर अपवंचन एवं फर्जी/अपात्र आईटीसी के मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि उपरोक्त मामलों में कर देनदारी का अंतिम निर्धारण विस्तृत जांच एवं अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।