गलती से चले गए थे पाक सीमा में , 11 साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा हुए मिर्जापुर के पुनवासी
मिर्जापुर
मिर्जापुर का रहने वाले पुनवासी 11 वर्ष बाद पाक की जेल से रिहा हुए। कुछ दिन बाद वह अपने गृह जनपद पहुंचेंगे। पाकिस्तान की ओर से 17 नवंबर की सुबह उन्हें बाघा बार्डर पर तैनात बीएसएफ को सौंप दिया। फिलहाल अटारी के तहसीलदार जगसीर सिंह ने छेरहटा में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में क्वारंटीन किया गया है। पूछताछ और मडिकल परीक्षण के बाद उन्हें परिवार को सौंपा जाएगा। इधर, जैसे ही परिवार के लोगों को पुनवासी के जनपद लौटने की खबर लगी पूरा परिवार खुशी से झूम उठा है।
पाक के लाहौर जेल में 11 वर्ष गुजारने के बाद 50 वर्षीय पुनवासी पुत्र कन्हैया भरूहना के रहने वाले हैं। छह भाइयों में पुनवासी चौथे नंबर पर हैं। पांच भाइयों में चार मंगरू, गोनू, मतरू व शंकर की मौत हो चुकी है जबकि एक भाई मिठाईलाल संदिग्ध हालात में गायब हो गया। पुनवासी की व्याहता बहन किरन बसइटा बहुती, बलहरा, लालगंज में रहती हैं। 2009 में एक ट्रक चालक के साथ पुनवासी राजस्थान घूमने गए थे। इसी दौरान भूलवश किसी तरह पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गए। पाकिस्तान के लाहौर प्रांत के नूरलवा थाने की पुलिस ने उन्हें पकड़कर जेल भेज दिया। बिना वीजा के दूसरे देश में प्रवेश करने के आरोप में पाक कोर्ट ने पुनवासी को सात साल की सजा सुनाई। सजा काटने के बावजूद भी वह लाहौर जेल में बंद रहे। इधर, जब इसकी जानकारी भारत सरकार को लगी तो पुनवासी के परिवार के लोगों को खोजा गया। भारतीय दूतावास की सक्रियता और सरकार की तत्परता से पुनवासी को जेल से छुड़ाकर वतन वापसी कराने पहल तेज हुई। आखिरकार पाक जेल से 17 नवंबर की सुबह पुनवासी को भारत-पाक के बाघा-अटारी बार्डर पर तैनात बीएसएफ को सौंप दिया गया। भारत की सीमा में प्रवेश करते ही बाघा बार्डर मां भारती के जयकारों से गूंज उठा।
कोविड जांच के बाद किया गया क्वारंटीन
मंगलवार की रात अटारी के नारायणगढ़ कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में पुनवासी को क्वारंटीन किया गया। कोविड-19 की जांच के लिए सैंपल लिया गया है। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उनसे भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ करेंगीं। संभावना है कि तीन चार दिन बाद पुनवासी को उनके गृह जनपद भेजा जाय। मिर्जापुर के एसपी अजय कुमार सिंह ने बताया कि पुनवासी को पाकिस्तान जेल से रिहा कराने की प्रक्रिया काफी दिनों से चल रही थी। जिले से रिपोर्ट भी भेज दी गई थी।
और बिखर गया परिवार
पुनवासी 11 साल पहले राजस्थान की सीमा से पाक सीमा में गए। उस समय उनकी उम्र 39 वर्ष थी। घटना के चार साल पहले उनकी शादी हुई थी। बच्चे नहीं थे। इसी बीच परिवार में एक-एक कर उनके भाइयों की मौत हो गई। मां-बाप पहले ही जा चुके थे। परिवार में पुनवासी की पत्नी इंतजार करते-करते थक चुकी थीं। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि पति का वियोग से उन्हें गहरा आघात लगा, जिससे उनकी मानसिक स्थति असमान्य हो गई। इसके बाद मायके वाले उन्हें अपने घर लेकर चले गए। लोगों का कहना है कि पुनवासी के लौटने के बाद संभव है कि उनकी पत्नी भी ठीक होकर घर लौट आएं।
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