अयोध्या : हर भक्त करा सकेगा रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला की आरती
अयोध्या
रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला की आरती अब हर श्रद्धालु करा सकता है और इच्छानुसार आराध्य को भोग प्रसाद भी चढ़ा सकेगा। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से यह अनुमति दे दी गई है। ट्रस्ट ने इसके लिए शुल्क नहीं निर्धारित किया है। कोई भी श्रद्धालु अपनी भावना से यथाशक्ति जो भी दान देगा। उसके अनुरूप उसी के नाम से आरती करा दी जाएगी या भोग प्रसाद चढ़ा दिया जाएगा। यदि कोई श्रद्धालु किसी पर्व विशेष अथवा एकादशी के अवसर पर पूजन कर भोग प्रसाद चढ़ाना चाहेगा तो उसे वह भी हो सकेगा। इसका जो व्यय होगा, वह प्रधान पुजारी की ओर से सम्बन्धित श्रद्धालु को बता दिया जाएगा।
रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येन्द्र दास बताते हैं कि इस व्यवस्था के लिए सम्बन्धित श्रद्धालु चाहे तो ट्रस्ट से सम्पर्क कर सकता है या फिर उनसे भी कर सकता। 25 मार्च को नये भवन में रामलला के विराजित होने के बाद ट्रस्ट की ओर से शयन आरती में प्रतिदिन एक-एक मंदिर के संत- महंत को आमंत्रित कर उन्हें अंगवस्त्रम व प्रसाद भेंट कर सम्मानित करने की व्यवस्था शुरू की गई थी। शयन आरती प्रतिदिन सायं छह बजे निर्धारित समय में होती है। धीरे-धीरे इस शयन आरती में संतों के साथ भक्तगणों का भी आगमन होने लगा तो फिर भक्तों ने अपनी-अपनी ओर से भी एक-एक दिन की आरती कराने व भोग प्रसाद चढ़ाने की इच्छा भी व्यक्त की तो ट्रस्ट ने अनुमति प्रदान कर दी।
सुरक्षा कारणों से मिश्री के अलावा अन्य प्रसाद चढ़ाने पर लगी थी रोक
पांच जुलाई ,2005 को रामजन्मभूमि में आतंकी संगठन लश्करे तैय्यबा के फिदाइन दस्ते के आतंकवादियों के हमले के बाद से सुरक्षा व्यवस्था का नया मानक लागू कर दिया गया था। इस कारण श्रद्धालुओं की ओर से प्रसाद चढ़ाने की व्यवस्था पर कुछ समय तक रोक लगा दी गई। फिर बाद में पारदर्शी पॉलिथीन पैक में मिश्री चढ़ाने की मंजूरी दी गई। यही व्यवस्था आम दर्शनार्थी श्रद्धालुओं के लिए आज भी लागू है। इससे पहले श्रीरामजन्मभूमि सेवा समिति की ओर से रामलला के प्राकट्योत्सव के दौरान तत्कालीन रिसीवर की अनुमति से कलश-चित्रपट व प्रसाद पुजारी गण को रंगमहल बैरियर पर ही देने की बाध्यता थी जो पुन: परिसर प्रशासन की देखरेख में पुजारी गर्भगृह तक ले जाते थे।
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