पूर्व भाजपा मंडल उपाध्यक्ष भागचंद आर्मो की नक्सलियों ने गोली मारकर की हत्या

पूर्व भाजपा मंडल उपाध्यक्ष भागचंद आर्मो की नक्सलियों ने गोली मारकर की हत्या

पुलिस मुखबिरी के शक में दिया वारदात को अंजाम

शव के पास पर्चा छोड नक्सलियों ने पुलिस मुखबीरो को दिया अल्टीमेटम

rafi ahmad ansari बालाघाट। मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में दहशत का पर्याय बने नक्सलियों द्वारा पुलिस मुखबीरी के शक में ग्रामीणो को मौत के घाट उतारने का सिलसिला अनवरत जारी है लेकिन पुलिस हमेशा मृतको को पुलिस का मुखबीर होने की बात से नकारते आई है। पूर्व में नक्सलियों ने कई ग्रामीणों को पुलिस मुखबिरी के शक में मौत के घाट उतार चुके है तो वही बिती रात्री नक्सलियों ने फिर एक ग्रामीण की हत्या कर दी। और साथ ही पुलिस की मुखबीरी करने वाले लोगो को खबरदार रहने की चेतावनी दी है। ऐसे में नक्सल प्रभावित आदिवासी अंचलो के ग्रामीण पुलिस और नक्सलियों के बीच चल रही कश्मकश में फंसकर दहशत में आ गयें है। उल्लेखनीय है कि पुलिस मुखबिरी के शक में आदिवासी गा्रमीण अपनी जान से हाथ धो बैठ रहे है और पुलिस उन्हे अपना मुखबीर होने से नकार देती है। पूर्व में भी पुलिस मुखबिरी के शक की बुनियाद पर नक्सलियों ने कई ग्रामीणो की हत्या कर दी है। वही ताजा मामला, रूपझर थाने के बिठली पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम बम्हनी से सामने आया है जहां बिती रात दर्जन भर की सख्ंया में आये हथियार बंद नक्सलियों ने बम्हनी निवासी भाजपा मंडल के पूर्व उपाध्यक्ष भागचंद पिता मेहतर आर्मो उम्र 48 वर्ष की पुलिस मुखबिरी के शक में गोली मारकर हत्या कर दी। जिसकी सुचना पुलिस को दी गई, लेकिन सूचना के बाद भी पुलिस समय रहते मौके पर नही पहुंची, जिससे मृतक के परिजनो ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। घटना की जानकारी लगने पर जब जिला मुख्यालय से पत्रकारो की टीम मौके पर पहुंची तो मृतक का परिवार व ग्रामीण शोक में डूबे नजर आये। इस दौरान घटना के संबध में विस्तृत चर्चा करते हुए मृतक भागचंद की पत्नि हेमलता मार्को ने बताया कि बिते 29 जून की रात्री करीब साढे 08 बजे मृतक व उसका पूरा परिवार भोजन करने थाली पर बैठे थे। तभी हथियार बंद 03 नक्सली घर में आये और भागचंद को बाहर बुलवाया और स्वंय भागचंद अर्मो उसके पुत्र भुमेंश्वर अर्मो और बडे भाई रायसिंह अर्मो का मोबाईल जप्त कर लिया। उस दौरान 03 महिला नक्सली घर के आंगन में तैनात दी और कुछ नक्सली बाहर पहरा दे रहे थें। जैसे भागचंद बाहर आया तो नक्सलियों ने उसे कुछ कार्य का हवाला देकर अगवा कर लिया और उसे बंदी बनाकर गांव के बाहर जंगल की ओर ले गयें। जिसके बाद भागचंद लौटकर घर नही आया। ऐसे में परिजन चिन्तित हो उठे और गा्रमीणो को जानकारी दी। जहां सभी मिलकर भागचंद की खोजबीन करने लगे कि इसी बीच तडके 04 बजे हर्रानाला रोड पर भागचंद का खून से लथपथ शव नजर आया। जिसकी आंख के पट्टी बांधकर नक्सलियों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। साथ ही उसके शव के पास नक्सलियोे एक पर्चा भी छोडा था, जिसमें पुलिस मुखबीरी के शक में भागचंद की हत्या किये जाने का उल्लेख था। जहां इस हत्या की जिम्मेंदारी मलाजखंड-तांडा दलम भाकपा माओवादी एरिया कमेटी के नक्सलियों ने ली है। साथ ही नक्सलियों ने पुलिस की मुखबीरी करने वाले अन्य लोगो को भी चेतावनी दी है। घटना के बाद रात भर मृतक भागचंद का शव सडक पर ही गिरा पडा रहा। लेकिन सुबह तडके जानकारी लगने पर ग्रामीणो ने घटना की सूचना पुलिस को दी, परंतु सुचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर नही पहुचंी और एक निजी वाहन की मदद से शव को पोस्टमार्टम के लिये उठाकर ले गई। आपको बता दे, मृतक भागचंद कृषि कार्य एवं आटो चलाकर परिवार का संचालन करता था। इसके साथ वह क्षेत्र में एक सामाजिक कार्यकर्ता भी था। जहां वह वन सुरक्षा समिति का अध्यक्ष एवं भाजपा मंडल का पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुका है। इसके अलावा, वर्ष 2007 से यह बम्हनी गांव नक्सल दृष्टिकोण से अतिसंवेदनशील रहा है। जानकारी यह भी मिली है कि मृतक पूर्व ही नक्सलियों की हिटलिस्ट में रह चुका है। और यह भी जानकारी मिली है कि 26 मई 2012 को बम्हनी के समीप पचामा-दादर पहाडी पर पुलिस नक्सली मुठभेंड में दो नक्सली मारे गये थे। इस मामले में भी मृतक भागचंद अर्मो का नाम उनकी हिटलिस्ट में शामिल था। साथ ही साथ यह भी जानकारी आ रही है कि नक्सली कमांडर दीपक को आत्मसमर्पण कराने में भी मृतक के द्वारा भूमिका निभाई जा रही थी। इसी प्रकार तेंदुपत्ता संग्रहण कार्य में मृतक मुंशी का कार्य कर चुका है, जिसमें पैसो के देने-देन की बात सामने आ रही है, जिसको लेकर नक्सली मृतक पर संदेह जताये हुए थें। पंरतु इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम का महौल छा गया है और ग्रामीण दहशत में आ चुके है। इधर घटना को लेकर मृतक की पत्नि का आरोप है कि हम ग्रामीणो का जीना दुभर हो गया है। पुलिस की सुनते है तो नक्सली मार देते है और नक्सलियों की सुनते है पुलिस परेशान करती है। ऐसे में ग्रामीण करे तो क्या करें..? दो वक्त की रोटी भी ग्रामीण सुकुन के साथ नही खा पा रहे है। इधर घटना की जानकारी पर चर्चा करते हुए एसपी अभिषेक तिवारी ने कहा कि घटना के बाद एरिया डोमिनेशन को लेकर आसपास के जंगल क्षेत्रो में पुलिस की सर्चिंग बढ़ा दी गई है। मृतक पुलिस का मुखबीर नहीं था, जानकारी मिली है कि पैसे के लेनदेन के चलते यह घटना कारित की गई है। नक्सली निर्दोष ग्रामीणों की हत्या करके अपना खौफ पैदा कर रहे हैं। इस मामले में कुछ नक्सलियों के नाम जानकारी में आये है जहां जांच प्रारंभ कर दी गई है।