नई औद्योगिक नीति: भगवंत मान सरकार की निवेश बढ़ाने और रोजगार पैदा करने पर फोकस
चंडीगढ़, पंजाब सरकार की नई औद्योगिक नीति को राज्य में निवेश और रोजगार बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस नीति के जरिए राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे।
राज्य में पिछले कुछ वर्षों से उद्योगों के पलायन, बेरोजगारी और आर्थिक सुस्ती को लेकर चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में सरकार ने नई औद्योगिक नीति के जरिए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रावधान किए हैं। इस नीति की खास बात यह है कि निवेशकों को अपनी परियोजना की जरूरत के अनुसार प्रोत्साहन चुनने की सुविधा दी गई है।
सरकार की ओर से सब्सिडी का प्रावधान
सरकार के अनुसार पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सीधे सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है। यदि कोई उद्योग बड़ी पूंजी लगाकर प्लांट स्थापित करता है तो सरकार शुरुआती निवेश में आंशिक भागीदारी के जरिए जोखिम कम करने का प्रयास करेगी। इससे बड़े उद्योगों को राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नई नीति केवल नए उद्योगों तक सीमित नहीं है। इसमें पहले से चल रहे उद्योगों को भी विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। औद्योगिक शहरों लुधियाना, जालंधर, गोबिंदगढ़ और बटाला के छोटे और मध्यम उद्योगों को इससे विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
न्यूनतम निवेश सीमा 25 करोड़ रुपये
नीति में सामाजिक समावेशन पर भी जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार यदि उद्योगों में महिलाओं, अनुसूचित जाति समुदाय या दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार दिया जाता है तो अतिरिक्त सब्सिडी दी जाएगी। छोटे और मध्यम उद्योगों को ध्यान में रखते हुए रोजगार सृजन सब्सिडी के लिए न्यूनतम निवेश सीमा घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दी गई है और कम से कम 50 कर्मचारियों को रोजगार देने की शर्त रखी गई है। इससे छोटे उद्योगों को भी प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
25 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान
सरकार ने सीमावर्ती जिलों पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और फाजिल्का में उद्योग लगाने वालों के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान किया है। इन जिलों में निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। नई औद्योगिक नीति में प्रोत्साहन अवधि को बढ़ाकर 15 वर्ष तक कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे सेमीकंडक्टर, फार्मा, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे पूंजी-गहन क्षेत्रों के निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
राज्य में बढ़ा निवेश
सरकार के दावे के मुताबिक निवेशकों को उनके फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 100 प्रतिशत तक इंसेंटिव मिल सकता है, जिसमें जमीन, मशीनरी, भवन, शोध और पर्यावरण से जुड़े ढांचे पर किया गया खर्च भी शामिल होगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2022 के बाद राज्य में करीब 1।55 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ है, जिसमें लगभग 55 हजार करोड़ रुपये का निवेश पिछले एक वर्ष में आया है।
सरकार का कहना है कि नई नीति के लागू होने से राज्य में उद्योगों की गतिविधियां बढ़ेंगी और इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं उद्योग जगत भी इस नीति को राज्य में निवेश के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है।
bhavtarini.com@gmail.com
