यूपी के गांव में बनाया था ठिकाना, रोहिंग्या पासपोर्ट मामले में नूर आलम को ATS तलाश रही 

यूपी के गांव में बनाया था ठिकाना, रोहिंग्या पासपोर्ट मामले में नूर आलम को ATS तलाश रही 

 लखनऊ  
अवैध ढंग से भारत आए म्यांमार के नागरिकों का जाली दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बन जाने के मामले में एटीएस को अभी कई लोगों की तलाश है। इसमें अजीजुलहक का बहनोई नूर आलम भी शामिल है। गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ में पता चला है कि बांग्लादेश और म्यांमार से रोहिंग्या नागरिकों को भारत लाने में नूर आलम की अहम भूमिका रही है। वह इस काम में खासा सक्रिय रहा है।
 
वर्ष 2001 में बांग्लादेश के रास्ते भारत आने के बाद अजीजुलहक ने यूपी के संतकबीरनगर जिले के नौरो गांव को अपना ठिकाना बनाया था। इस गांव के बदरे आलम ने अपने बेटे के रूप में उसका राशन कार्ड बनवा दिया था। इसके बाद उसने खलीलाबाद के अब्दुल मन्नान की मदद से हाईस्कूल की फर्जी मार्कशीट बनवा ली थी। फिर संत कबीनगर जिले के ही नरेश की मदद से उसका पासपोर्ट बन गया था। अजीजुलहक ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे दो पासपोर्ट बनवाए थे। वर्ष 2017 में वह अपनी मां आबिदा खातून, बहन फातिमा खातून तथा दो भाइयों जियाउलहक और मोहम्मद नूर को भी भारत ले आया था और उनके भी फर्जी दस्तावेज तैयार कराए थे।

 सूत्रों के अनुसार अब्दुल मन्नान और नरेश की गिरफ्तारी के बाद एटीएस की टीमें अजीजुलहक के बहनोई नूर आलम की तलाश में जुटी हैं। नरेश को एटीएस अहमदाबाद से गिरफ्तार करके ले आई है। एटीएस का मानना है कि नूर आलम की गिरफ्तारी से यह पता चलेगा कि उसके जरिए कितने रोहिंग्या भारत आए हैं और वे कहां रह रहे हैं?