चमकी बुखार: मौत से जंग जीतकर भी सामान्य नहीं रह पाएंगे मासूम
मुजफ्फरपुर
बिहार के चमकी बुखार प्रभावित मुजफ्फरपुर जिले के गंगापुर गांव के महादलित परिवार से आने वाली मुना देवी (बदला हुआ नाम) को कुछ सूझ नहीं रहा है कि वह करें तो क्या करें। दो साल पहले उनके पोते अंकुल का एईएस यानि चमकी बुखार का इलाज हुआ था और वह ठीक हो गया। आज मुना देवी का पोता तीन साल का हो गया है, लेकिन अब भी पहले की तरह सामान्य नहीं हो पाया है। इलाज के बाद जल्द ही उसके अंदर मानसिक रूप से बीमार होने के लक्षण नजर आने लगे।
मुना देवी ने बताया, 'शुरू में कुछ भी गड़बड़ नहीं था लेकिन उसका व्यवहार बदल गया।' मुना देवी ने बताया कि बच्चे को पटना से करीब 80 किमी उत्तर में अघोरिया बाजार में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने कहा, 'मैं ऐसे लोगों को जानती हूं जो अपने बच्चे को एसकेएमसीएच हॉस्पिटल में भर्ती कराने के लिए बाहर लाइन लगाए हुए थे। बच्चों की हालत बहुत खराब थी। आपको एसकेएमसीएच में भर्ती कराने के लिए किसी से पैरवी कराना पड़ता है।'
'हमेशा सामान्य व्यवहार नहीं करता मेरा बच्चा'
उन्होंने कहा, 'अगर हमने इंतजार किया होता और प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज नहीं कराया होता तो हमारे बच्चे की मौत हो जाती।' मुना देवी और उनके परिवार को बच्चे के इलाज पर अब तक काफी पैसा करना पड़ा है। उन्हें यह नहीं पता कि इलाज पर पैसे खर्च होने का सिलसिला कब खत्म होगा। मुना देवी कहती हैं, 'कई बार वह सामान्य व्यवहार करता है, लेकिन हमेशा नहीं। जब हमने डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने कहा कि यह दिमागी बुखार की वजह से है।' यह हाल बिहार और खासकर मुजफ्फरपुर के हर उस मां-बाप का है, जिनका बच्चा अस्पताल के बेड पर पड़ा चमकी बुखार यानी अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से जूझ रहा है। अब तक 108 बच्चे इलाज के अभाव में इस दुनिया को छोड़ चुके हैं, सैकड़ों बच्चे अब भी अस्पताल के बेड पर हैं। बदहवास हालत में अपने बच्चों को देखकर मां-बाप इस कदर निराश और परेशान हैं कि तस्वीरें देखकर किसी पत्थरदिल की आंखें भी नम हो जाएं।
अपने बच्चे को पुचकारते हुए इस मां को देखिए। ऐसे सैकड़ों मांएं अपने बच्चों को चिपकाए अस्पताल में मौजूद हैं और अपनी गोद में बच्चों को दम तोड़ते हुए देख रही हैं। एईएस से बच्चों की मौत पर सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक सरकार के खिलाफ गुस्सा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री और बिहार के स्वास्थ्य मंत्रियों के दौरों के बाद भी बच्चों के मरने का सिलसिला नहीं रुका है। उधर जानलेवा बीमारी के चरम पर पहुंचने के 18 दिन बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर का दौरा किया। अस्प
bhavtarini.com@gmail.com 
