JNU हिंसा में हो सकता है ABVP का हाथ!, व्हाट्सएप्प चैट-तस्वीरें कर रहीं इशारा
नई दिल्ली
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू में रविवार को हिंसा किसने की, कौन थे वे नकाबपोश जिन्होंने करीब 4 घंटे तक छात्रों-टीचरों पर लाठी-डंडों से प्रहार कर तांडव मचाया, पुलिस इन सभी सवालों के जवाब खंगाल रही है। मगर सोशल मीडिया पर वायरल व्हाट्सएप्प ग्रुप के चैट और कुछ तस्वीरें इस ओर इशारा कर रही हैं कि इस हमले के पीछे कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का हाथ हो सकता है। व्हाट्सएप्प ग्रुप के जो चैट सामने आए हैं, उससे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुए उपद्रव का लिंक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, एबीवीपी ने इस हमले में शामिल होने से साफ तौर पर इनकार किया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट के अनुसार, व्हाटसएप्प ग्रुप पर हमले के लिए कोऑर्डिनेशन का पहला संकेत शाम करीब 5:30 बजे दिखाई पड़ता है, जब एक यूजर 'फ्रेंड्स ऑफ आरएसएस' नामक व्हाट्सएप्प ग्रुप पर 'यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट' व्हाट्सएप्प ग्रुप का लिंक साझा करता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के सदस्यों और सार्वजनिक रूप से इंटरनेट पर उपलब्ध फाइलों के अनुसार, इस यूजर की पहचान जेएनयू के एबीवीपी नेता योगेंद्र भारद्वाज के रूप में की गई है।
स्क्रीनशॉट में योगेंद्र भारद्वाज का नाम अगले पोस्ट में भी दिखता है, जिसमें वह लेफ्ट के खिलाफ एकजुटता का आह्वान करता दिख रहा है। भारद्वाज के फोन नंबर से पता चलता है कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृति विभाग से जुड़ा हुआ है। योगेंद्र डीयू के संस्कृत विभाग में 'एड-हॉक' शिक्षक के रूप में काम करता है।
एबीवीपी की जेएनयू इकाई के सचिव मनीष जांगिड़ ने पुष्टि की है कि व्हाट्सएप ग्रुप जरूर मौजूद है, मगर कहा कि उनके सहयोगियों के नंबर को वामपंथी संगठन के प्रतिद्वंद्वियों ने बदनाम करने के लिए व्हाट्सएप्प समूहों में जोड़ा। उन्होंने आगे कहा कि हमारे नंबर कुछ सर्वर का उपयोग करके लिए गए थे और हमें समूह में एडमिन के रूप में जोड़ दिया गया। हम उन व्हाट्सएप्प समूहों के बारे में नहीं जानते थे।
एबीवीपी के राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक राहुल चौधरी ने भी एबीवीपी के किसी सदस्य की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि हम इन दिनों किसी भी व्हाट्सएप्प समूह में किसी को भी जोड़ सकते हैं, स्क्रीनशॉट ले सकते हैं और लोगों को बदनाम कर सकते हैं। अगर उनके (वामपंथी समूह) पास व्हाट्सएप ग्रुपों पर योजना बनाने और साजिश रचने के लिए हमारे खिलाफ सबूत हैं तो उन्हें पुलिस को देना चाहिए। इसके अलावा, जेएनयूएसयू के एक काउंसलर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि भारद्वाज एबीवीपी के सदस्य थे और संस्कृत विभाग में पढ़ते थे। हिन्दुस्तान टाइम्स ने कथिततौर पर भारद्वाज के नंबर पर फोन भी लगाया, मगर स्विच ऑफ मिला।
एबीवीपी के सदस्य से जुड़ा एक दूसरा व्हाट्सएप नंबर विकास पटेल का है। 'फ्रेंड्स ऑफ आरएसएस' व्हाट्सएप्प ग्रुप में विकास पटेल मैसेज करता है, जिसमें लिखा होता है- डीयू के लोग खजान सिंह स्विमिंग पूल से भी प्रवेश कर सकते हैं। वह कहता है- 'डीयू के लोगों की एंट्री आप खजान सिंह स्विमिंग साइड से करवाइए, हमलोग यहां 25-30 लोग हैं।'
उस नंबर को फेसबुक पर एबीवीपी के कम्युनिटी ग्रुप द्वारा किए गए पोस्टों में देखा गया था, जहां पटेल उस नंबर से जुड़े हैं। एक फेसबुक प्रोफाइल में भी पटेल ने खुद को एबीवीपी के सदस्य के रूप में बताया था, जिसे बाद में हटा दिया गया। जब हिन्दुस्तान टाइम्स ने इस नंबर पर कॉल किया तो स्विच ऑफ मिला।
जेएनयूएसयू के उपाध्यक्ष साकेत मून ने कहा कि 'हम में से कई लोगों ने विकास पटेल को परिसर के अंदर भीड़ के साथ एक स्टिक (छड़ी) के साथ देखा। उसने अब अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट कर दिया है। विकास पटेल एबीवीपी के सदस्य हैं और यहां के छात्र थे।' हालांकि, चौधरी ने पटेल या किसी अन्य एबीवीपी सदस्य द्वारा सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने से इनकार कर दिया।
जेएनयूएसयू के सदस्यों ने आरोप लगाया कि कई अन्य लोग जो व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा थे और जिन्होंने ग्रुप में पोस्ट किए, वे एबीवीपी के सदस्य या समर्थक थे। हालांकि हिन्दुस्तान टाइम्स को इसका दूसरा साक्ष्य नहीं मिला कि ये नंबर किनके थे।
एक तीसरा नंबर भी सोशल मीडिया पर अटेंशन का विषय बन गया, जब पता चला कि यह तीसरा नंबर कांग्रेस से जुड़े राजनीतिक सलाहकार का है। इस नंबर का इस्तेमाल करने वाले कांग्रेस से जुड़े राजनीतिक सलाहकार आनंद मंगनेले हैं। उन्होंने हिन्दुस्ताइन टाइम्स को बताया कि वह उन दोस्तों को चेतावनी देने के लिए समूह में शामिल हुए थे, जहां हमले हो रहे थे। मंगनाले ने पोस्ट किया था, 'जेएनयू के समर्थन में लोग मुख्य द्वार पर आ रहे हैं। वहां कुछ करना है?'
उन्होंने कहा कि वह सदस्यों की जासूसी करने के लिए समूह में थे। मैं व्हाट्सएप ग्रुप में रात 8:30 बजे शामिल हुआ था, यानी ग्रुप बनने के लगभग 3 घंटे बाद। उनसे जानकारी निकालने के लिए मैंने ऐसा नाटक किया, जैसे कि मैं उनमें से ही एक हूं।
जब एबीवीपी और आरएसएस के समर्थकों ने कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में मंगेले के पदों को हाइलाइट किया तो उन्होंने इनकार किया कि वह पार्टी से जुड़े थे। हिन्दुस्तान टाइम्स से उन्होंने कहा, 'मुझे लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस की मदद के लिए काम पर रखा गया था, लेकिन मैं उनसे जुड़ा नहीं हूं।'
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें और वीडियो में कथिततौर पर एबीवीपी के सदस्यों को लाठी और हथौड़े के साथ देखा गया। हालांकि, हिन्दुस्तान टाइम्स इन वायरल तस्वीरों और वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता। इस तरह के एक फोटो में, दो कथित एबीवीपी सदस्यों को लाठी लेकर जेएनयू कैंपस में जाते हुए देखा गया। चौधरी ने कहा कि इनमें से कुछ पोस्ट को मॉर्फ किया जा सकता है।
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