वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान का द्वितीय चरण होगा 25 मई से शुरू: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान में जल संरक्षण के कार्यों को मिली नई गति
जिले और शहरी स्थानीय निकाय जल संचयन को दें प्राथमिकता: केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल
रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स के निर्माण, मरम्मत कार्यों को दें गति
जयपुर। केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 के अंतर्गत बारिश के पानी की पर्याप्त रिचार्ज कैपेसिटी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। उन्होंने राजस्थान के सभी जिलों और शहरी स्थानीय निकायों से पानी बचाने के कामों को अधिक से अधिक प्राथमिकता देते हुए जन भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान भी किया।
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री मंगलवार को नई दिल्ली से जल संचय-जन भागीदारी-2.0 की प्रगति पर आयोजित वर्चुअल बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश में अभियान के अन्तर्गत किए जा रहे कार्यो की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। पाटिल ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में की गई पहलों की सराहना करते हुए कहा कि डूंगरपुर जिले में जन सहभागिता के माध्यम से नदी का जल संरक्षण अनुकरणीय पहल है।
रामजल सेतु लिंक परियोजना राजस्थान के लिए वरदान
पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री के हर गांव, हर खेत में वर्षा जल की एक-एक बूंद को सहेजने के संकल्प से प्रेरित होकर राज्य सरकार प्रदेश को जल संपन्न बनाने की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। रामजल सेतु लिंक परियोजना राजस्थान के लिए वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि शेखावाटी क्षेत्र में यमुना का पानी लाने के लिए यमुना जल समझौते की डीपीआर का कार्य भी अंतिम चरण में है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा किशनगढ़ एयरपोर्ट से वर्चुअली बैठक में जुड़े। उन्होंने जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 में शहरी निकायों, पंचायती राज संस्थाओं, सिविल सोसाइटीज और आम जन की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अभियान के अर्न्तगत रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स के निर्माण और मरम्मत कार्यों को अपेक्षित गति प्रदान करते हुए सभी जिले निर्धारित समय में लक्ष्यों की प्राप्ति करें।
जल संचय जन भागीदारी अभियान बना जन-आंदोलन
शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में जल संरक्षण के महत्वपूर्ण उद्देश्य के क्रम में प्रारंभ किया गया जल संचय जन भागीदारी अभियान एक जन-आंदोलन बन चुका है। इस अभियान से वर्षा के एक-एक बूंद जल को सहेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने अभियान में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की। अभियान के प्रथम चरण (1.0) में हमारा प्रदेश तृतीय स्थान पर रहा। बाड़मेर एवं भीलवाड़ा जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिन्हें केंद्र सरकार ने सराहा और पुरस्कृत भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की महत्ता को राजस्थान से बेहतर कोई भी नहीं समझ सकता है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने जल संरक्षण और जल संचयन की दिशा में कर्मभूमि से मातृभूमि और वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान जैसी पहल कर प्रदेशभर में भूजल स्तर में सुधार लाने के साथ ही पारम्परिक जल स्त्रोतों को नया जीवन देने का प्रयास किया है। इन अभियानों के माध्यम से प्रदेशभर में जनचेतना आई है, जिसके आगामी समय में सुखद परिणाम सामने आयेंगे। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के द्वितीय चरण की शुरूआत गंगा दशहरा (25 मई) को शुरू करने जा रही है। जो 5 जून को पर्यावरण दिवस तक संचालित होगा।
इस अवसर पर डूंगरपुर और भीलवाड़ा जिला कलेक्टर्स ने जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 के अर्न्तगत किये गए प्रगतिरत कार्यों पर प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव जल संसाधन अभय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय अखिल अरोरा, नेशनल वाटर मिशन की अतिरिक्त सचिव मिशन डायरेक्टर अर्चना वर्मा, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के संबंधित अधिकारी सहित जिला कलेक्टर्स, नगर निकाय आयुक्त वीसी के माध्यम से जुडें।
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