उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित, पिछले 2 साल में राजस्थान में निवेश ने रफ्तार पकड़ी

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित, पिछले 2 साल में राजस्थान में निवेश ने रफ्तार पकड़ी

सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों के लिए कई योजनाएं की लागू, बड़े निवेश के लिए राइजिंग राजस्थान का सफल आयोजन,

दो वर्ष में 1,600 करोड़ रुपये का निवेश प्रोत्साहन अनुदान वितरित, पूर्ववर्ती सरकार ने अंतिम दो वर्ष में दिए थे मात्र 487 करोड़ रुपये

जयपुर, उद्योग एवं वाणिज्य मंंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि पिछले दो साल में राजस्थान में औद्योगिक निवेश ने रफ्तार पकड़ी है। राज्य सरकार की दूरगामी सोच के साथ बनाई गई नीतियों, योजनाओं और निर्णयों से प्रदेश में निवेश का सकारात्मक माहौल बना है, उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक अनुमतियां लेना और संचालन अब आसान है। प्रतिस्पर्धी लागत के चलते प्रदेश में निर्मित माल व सेवा वैश्विक बाजार के अनुकूल बन गई है। राइजिंग राजस्थान और राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति-2024 के बाद प्रदेश में लगातार निवेश बढ़ रहा है। इससे निजी क्षेत्र में भी युवाओं को रोजगार के समुचित अवसर मिल रहे हैं। प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने, सूक्ष्म और लघु उद्योगों को और मजबूत करने के साथ ही निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश में शुरू हुई यह औद्योगिक विकास की गति लगातार बढ़ती रहे।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री गुरुवार को विधान सभा में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की (मांग संख्या-56) अनुदान मांगों पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने उद्योग विभाग की 17 अरब 53 करोड़ 05 लाख 98 हजार रूपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दीं।

कर्नल राठौड़ ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुसार प्रदेश के हर एक युवा को रोजगार उपलब्ध कराते हुए सशक्त करने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसी लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व राज्य सरकार साफ नीति, नीयत और निष्पादन के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। इसी का परिणाम है कि आज हर बड़ा उद्योगपति राजस्थान में निवेश करना चाहता है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राजस्थान देश में अग्रणी, 180 सुविधाएं पेपरलैस

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने कहा कि राजस्थान में उद्योगों को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सर्वोत्तम अनुभव मिले, यही हमारी प्राथमिकता है। इसी लक्ष्य के साथ पिछले दो वर्षों में किए गए कार्यों के कारण निवेश प्रक्रिया के सरलीकरण के मामले में राजस्थान आज देश के अग्रणी राज्य में शामिल है। राजस्थान सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को और मजबूत किया गया है। इंटीग्रेटेड पोर्टल के माध्यम से वर्तमान में निवेशकों को 180 सर्विस के तहत पेपरलैस क्लीयरेंस दिए जा रहे हैं, पूर्ववर्ती सरकार के समय इनकी संख्या करीब 80 ही थी।

13 सेक्टर वाइज नीतियां और योजनाएं लागू

कर्नल राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार द्वरा पिछले 2 वर्ष में राज्य के निर्यात, एमएसएमई उद्यमों, हस्तशिल्प, हथकरघा तथा राज्य के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए प्रत्येक सेक्टर को ध्यान में रखते हुए 13 नई नीतियां और योजनाएं लागू की गई हैं। इसमें निर्यात प्रोत्साहन, एक जिला एक उत्पाद और एमएसएमई, एकीकृत कलस्टर विकास, लॉजिस्टिक सहित कई नीतियां और योजनाएं लागू की गई हैं।

रिप्स-2022 में खामियों की वजह से निवेशकों नहीं मिला वास्तिवक लाभ, रिप्स -2024 से बना निवेश का सकारात्मक माहौल

उद्योग मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय लागू की गई राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (रिप्स) 2022 में उद्यमियों को अनुदान वितरण नहीं होने से निवेशकों को इसका कोई फायदा नहीं मिला। हमारी सरकार ने इन कमियों को दूर करते हुए एक स्पष्ट विजन के साथ राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (रिप्स) 2024  लागू की। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा 2 वित्तीय वर्षों 2022-2023 एवं 2023-24 में लगभग 487 करोड़ का अनुदान वितरण किया गया। हमारी सरकार द्वारा 2 वित्तीय वर्षों में लगभग 1,600 करोड़ रुपये के अनुदान स्वीकृत किए जा चुके हैं। 

राइजिंग राजस्थान के एमओयू धरातल पर उतरे

कर्नल राठौड़ ने कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान किए गए 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों में से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के समझौतों की ग्राउंड ब्रेकिंग की जा चुकी है। इन निवेश समझौतों के सकारात्मक परिणाम भविष्य में दिखाई देंगे। इन उद्योगों की स्थापना से लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही, राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इस दौरान उन्होंने उन प्रोजेक्ट्स के बारे में बताया जिनकी ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और धरातल पर कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि अलवर में 2,200 करोड़ के निवेश पर कार्य शुरू हो चुका है। जयपुर में 310 करोड़ रुपये निवेश वाला डेटा सेंटर और 500 करोड़ रुपये निवेश का मेडिकल साइंसेज संस्थान, सवाई माधोपुर में पर्यटन परियोजनाएं, धौलपुर में प्लास्टिक पैकेजिंग इकाई, जोधपुर में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और सीकर में एग्रो आधारित उद्योगों का कार्य शुरू हो चुका है।

भूमि आवंटन में ऐतिहासिक सुधार, भविष्य की जरूरत के लिए 10 हजार एकड़ का भूमि बैंक

उद्योग मंत्री ने कहा कि राज्य में जमीन अलॉटमेंट और भू उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को और आसान बनाया गया है, ताकि छोटे उद्यमियों को भी जमीन मिल सके। भूमि आवंटन प्रक्रिया में ऐतिहासिक सुधार करते हुए 99 वर्ष की लीज व्यवस्था में संशोधन कर 33 वर्ष का प्रावधान किया गया है। साथ ही, प्रदेश की भविष्य की आवश्यकताओं के देखते हुए 10 हजार एकड़ का भूमि बैंक बनाया गया है। साथ ही, निवेशकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवश्यकतानुसार अंडर डवलप जमीन भी आवंटित की जा रही है, ताकि जल्दी काम शुरू किया जा सके।