जिला सहकारी बैंक देवास से 8 करोड की धोखाधडी, 4 पर नामजद प्रकरण दर्ज
brijesh parmar
उज्जैन। ईओडब्ल्यू भोपाल ने देवास जिला सहकारी बैंक की राजोदा प्राथमिक कृषि सहकारी साख संस्था में हुए 8 करोड के धोखाधडी मामले में प्रकरण दर्ज किया है। प्रकरण में महेश जैन तत्कालीन सचिव एवं सहायक प्रबंधक, दिलीप नागर तत्कालीन पर्यवेक्षक, अनिल दुबे तत्कालीन शाखा प्रबंधक शाखा मंडी, श्रीमती रामकन्या बाई पति तंवरसिंह चौहान, अध्यक्ष बृहताकार प्राथमिक कृषि सहकारी साख संस्था मर्यादित राजोदा के साथ अन्य को आरोपी बनाया गया है।
ईओडब्ल्यू एसपी समर वर्मा ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि आरोपी अधिकारियों द्वारा किसानो के पास उपलब्ध वास्तविक भूमि से 400 हेक्टेयर अधिक भूमि दर्शाकर वास्तविक पात्रता से 5 करोड़ रूपये से अधिक राशि का ऋण नियम विरूद्ध तरीके से वितरित किया गया।एक ही सीजन में किसानों की फसल का एक से अधिक बार बीमा कर 65 लाख रूपये से अधिक के क्लेम स्वीकृत कराकर राशि प्राप्त की गई। सचिव ने किसानों के खातों से विड्राल पर स्वयं हस्ताक्षर कर 1 करोड रूपए से अधिक का आहरण किया गया।
भोपाल में शिकायत, उज्जैन ईकाई का सत्यापन
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल में पंजीबद्ध शिकायत क्रमांक-278/19 का उज्जैन इकाई के द्वारा सत्यापन करने पर पाया कि वृहत्ताकार प्राथमिक कृषि सहकारी समिति मर्यादित राजोदा जिला देवास एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित देवास के अध्यक्ष प्रबंधक, सचिव व पर्यवेक्षक ने मिलकर वर्ष 2016-2019 के बीच समिति के सदस्य किसानों की जानकारी के बिना उनकी पात्रता से अधिक ऋण स्वीकृत कर शासन की विभिन्न ऋण माफी व बीमा योजनाओं का लाभ उक्त ऋण खातों में प्राप्त दिखा. किसानों के खातों से अवैध रूप से करोड़ों रूपये निकाल लिये। आरोपीगण द्वारा शासन, बैंक व किसानों के साथ धोखाधड़ी व आपराधिक न्यासभंग करना पाये जाने से उनके विरुद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल द्वारा अपराध पंजीबद्ध किया गया।
भूमि अधिक दर्शाकर किया घोटाला
किसानों के पास उपलब्ध भूमि अनुसार उनकी साख सीमा निर्धारित कर उन्हें ऋण दिया जाना था। आरोपीगणों ने स्वयं के लाभ के लिये सदस्य किसानों के पास उपलब्ध भूमि से वर्ष 2016-2017 में 139 हेक्टेयर, वर्ष 2017-2018 में 129 हेक्टेयर व वर्ष 2018-2019 में 137 हेक्टेयर भूमि अधिक दर्शाकर पात्रता से साढे पांच करोड़ रूपयों अधिक ऋण किसानों की जानकारी के बिना स्वीकृत किये। किसानों की साख सीमा बिना स्वीकृत किए उक्त तीन वर्षों में तीन करोड़ रूपयों से अधिक का ऋण प्रदान किया गया है। 300 किसानों का कृषि बीमा उनकी सामान्य साख सीमा स्वीकृत किये बिना या एक ही फसल का एक वर्ष में एक से अधिक बार कृषि बीमा कर 65 लाख रूपयों की बीमा राशि आरेपीगणों द्वारा अवैध रूप से प्राप्त कर ली गयी, जिसके लिये किसानों के आवेदनों में स्वयं के मोबाईल नम्बर आरोपीगणों द्वारा लेख करना पाया गया।
गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज
आरोपियों ने धोखाधडी व आपराधिक न्यासभंग कर शासन, बैंक व किसानों को करोड़ो रूपयों की आर्थिक हानि कारित कर स्वयं को आर्थिक लाभ पहुंचाना प्रथमदृष्टया प्रमाणित पाया गया।ईओडब्ल्यू ने आरापीगणों के विरूद्ध धारा 420,409,467,468,471,201,120 बी भादवि एवं 13(1) (क), 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 एवं धारा 13(1) (d), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है।
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