प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेजों आटोनामी लेकर कराएंगे एग्जाम और आरजीपीवी करेगा उनका वैल्यूशन
भोपाल
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय प्रदेश के प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेजों को एकेडमिक आटोनामी देने जा रहा है। आटोनामी मिलने के बाद कालेज अपनी परीक्षाएं स्वयं करा पाएंगे, लेकिन उनका वैल्यूशन आरजीपीवी ही कराएगा।
वैल्यूशन स्वयं कराने का कारण कालेजों के वैल्यूशन पर संदेह करना है। वहीं आटोनोमी मिलने में करीब एक दर्जन शर्ते हैं, जिनको पूरा करने में कालेजों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
न्यू इंडिया की एजुकेशन पालिसी में एजुकेशन की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत प्राइवेट कालेजों को आटोनोमी देने की व्यवस्था की गई है। राज्य के सभी सरकारी इंजीनियरिंग कालेज आटोनोमी के तहत ही संचालित हो रहे हैं।
जबकि पालीटेक्निक सोसायटी के रूप में चल रही हैं। आटोनोमी लेने कई इंजीनियरिंग कालेज सामने आ रहे हैं, लेकिन शर्तों को देखकर उनके पसीने छूटने लगे हैं। इसमें सबसे खास कालेज का एनबीए या नैक का ए अग्रेडेशन होना अनिवार्य है। कालेज का संचालन लगातार दस साल रहना, कालेज को यूजीसी से 12बी और 2 एफ की मान्यता प्राप्त होने पर आरजीपीवी उन्हें एकेडमिक आटोनोमी देगा।
आधा दर्जन कालेज ही होंगे आटोनोमश
प्रदेश में डेढ़ सौ इंजीनियरिंग कालेज संचालित हो रहे हैं। इसमें से करीब चालीस कालेज दस साल से संचालित हो रहे हैं। उक्त चालीस कालेजों में से करीब आधा दर्जन कालेज ही हैं, जिनके पास एनबीए या नैक का ए अग्रडेशन लिए हुए हैं। आरजीपीवी उन्हें आटोनामी दे देता है, तो वे अपना सिलेबस तैयार कर पढ़ाई करा पाएंगे। यहां तक वे परीक्षाएं तक करा सकेंगे, लेकिन उनका वैल्यूशन आरजीपीवी द्वारा ही कराया जाएगा। इसकी वजह आरजीपीवी को उनकी गोपनीयता पर संदेह होना है। क्योंकि कई बार कालेजों का फर्जीवाड़ा शासन तक पहुंचता रहा है। इससे राज्य की प्रतिष्ठा दांव पर लगी रही है। कालेज विद्यार्थियों के पास-फेल का धंधा नहीं बना सके , जिसके लिए आरजीपीवी वैल्यूशन करने का अधिकार अपने पास रखेगा।
लंबी संबद्धता अटकी
इंजीनियरिंग कालेज आरजीपीवी से लंबी संबद्धता जारी करने की मांग कर रहे हैं। कुलपति सुनील कुमार गुप्ता से कालेज संचालकों के साथ बैठक तक आयोजित हो चुकी है। इस दौरान कालेजों ने हर साल संबद्धता लेने से मुक्ति लेने के लिए उन्हें लंबी संबद्धता देने की मांग की है। कुलपति गुप्ता ने उनसे कहाकि विवि अधिनियम में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हैं। वहीं एआईसीटीई भी उन्हें हरेक साल मान्यता की निरंतरता जारी करता है। कालेज किसी एक साल की निरंतरता हासिल नहीं करता और वह लंबी संबद्धता के चलते उक्त कोर्स में प्रवेश दिला देता है, तो विद्यार्थी के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी हो सकता है।
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