विधानसभा में पशुपालन मंत्री लाखन ने पेश किया गया MP गोवंश वध प्रतिषेध संशोधन विधेयक
भोपाल
मॉब लिंचिंग रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किया गया मप्र गोवंश वध प्रतिषेध संशोधन विधेयक 2019 बुधवार को विपक्ष के विरोध के चलते पारित नहीं हो सका। विपक्ष के तीखे विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजने का फैसला लिया। विपक्ष ने इस पर सीएम के फैसले की सराहना की।
विधानसभा में पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने विधेयक पेश किया जिसके बाद भाजपा की ओर से विधायक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इस विधेयक में सारी परिस्थितियां साफ नहीं हैं। ऐसा लगता है कि विधेयक गोकशी करने वालों को संरक्षण देने के लिए लाया गया है। विधेयक में एक राज्य से दूसरे राज्य में परिवहन किए जाने वाले गो वंश के परिवहन के लिए अनुज्ञा लेने की शर्त अनिवार्य नहीं की गई है। इसके विपरीत परिवहन करने वालों को रोकने पर सात साल की सजा का प्रावधान किया गया है।
सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि गोवध का काम करने वाले को संरक्षण देने और इसे रोकने वालों के लिए सजा देने के इस विधेयक का बीजेपी विरोध करती है। इसके बाद पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एक तरफ सरकार गौशाला खोलने की बात करती है और दूसरी तरफ गो तस्करों को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है। इसमें जल्दबाजी न की जाए और हर दृष्टि से विचार कर प्रस्ताव रखे जाएं। चौहान ने इसे प्रवर समिति को सौंपने की मांग रखी और कहा कि इसके बाद जो समिति की राय हो वह किया जाए।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब गाय ही नहीं बचेंगी तो गौशाला किस काम की रहेंगी। कांग्रेस के विजय चौरे ने इसका समर्थन किया। इसके बाद भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि सदन गौशाला की बात करता है पर यह समझ में नहीं आता कि विधेयक किसके लिए लाया गया है। अगर कोई गाय लेकर जा रहा है तो पूछने वाले को ले जाने वाले की शिकायत पर सजा हो जाएगी। सजा भी ऐसी नहीं सात साल की और उसका केस जिला न्यायालय में चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब गोवंश ले जाने वाले का इरादा गोवध का नहीं है तो उसे अनुज्ञा बनवाने में किस बात की दिक्कत होगी। इस तरह के कानून बनाने का क्या मतलब है जिसमें गाय की जिन्दगी खतरे में पड़ जाए। इसके बाद सीएम कमलनाथ ने कहा कि गोशाला की नीति हम सोच समझकर लाए हैं। इसलिए सदस्यों की मंशा को देखते हुए यह विधेयक प्रवर समिति को भेजने के लिए तैयार हैं। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने जल्द ही इसकी समिति की घोषणा करने का एलान किया।
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