जिले की महिलाओं द्वारा आत्मनिर्भरता का नया इतिहास लिखा जा रहा है: कलेक्टर

कोण्डागांव
ग्राम बनचपई - चुड़ी की चमक से बदलेगी तस्वीर चुड़ी हर भारतीय महिलाओं के प्रिय आभुषणों में से एक है और स्त्रियों के सोलह श्रृंगार में कंगन या चुड़ी प्रमुख स्थान रखता है वैसे भी चुड़ी भारतीय महिलाओं के सोहाग का प्रतीक रहा है परन्तु यहां पर चुड़ी का जिक्र केवल उसके महत्व को दर्शाने के लिए नहीं है बल्कि इसलिए कि चुड़ी की बदौलत अब जिले की ग्रामीण महिलाऐं स्व-रोजगार के नए क्षेत्र में कदम रखने जा रही है। इस क्रम में विकासखण्ड फरसगांव के लगभग पन्द्रह सौ के आबादी वाला ग्राम बनचपई की महिलाओं ने चुड़ी को कलात्मक रुप देकर आमदनी का नया जरिया ढुंढा है। इस कार्य में प्रशिक्षित होने के बाद महिलाऐं प्रतिदिन तीन सौ से चार सौ रुपये आय अर्जित करेंगी। इस प्रकार सिर्फ वनोपज एवं खेतो में रोजी-रोटी की कार्य करने वाली महिलाओं की रचनात्मकता को जिले के ऊर्जावान कलेक्टर नीलकंठ टीकाम के नेतृत्व में एक नया आयाम देने का प्रयास किया गया है। दिनांक 11 सितम्बर को अपने बनचपई प्रवास के दौरान महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए जिला कलेक्टर ने कहा कि महिलाऐं सीखे, निरंतर सीखे और अच्छी तरह सीखे। क्योंकि इस हुनर की बदौलत वे घर परिवार एवं समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करने का हकदार रहेंगी। अब तक महिलाओं को सिर्फ घर, खेत और वनो तक ही सीमित रखा गया था लेकिन जिला प्रशासन द्वारा उनके लिए संभावनाओं का दरवाजा खोल दिया गया है और इसमें हर वो महिला प्रवेश कर सकती है जिसमें कुछ कर दिखाने की चाह हो।

इसी तरह ग्रामीण युवाओं को भी स्व-रोजगार से जुड़ने की प्रेरणा देते हुए जिला कलेक्टर ने कहा कि एलईडी बल्ब का प्रशिक्षण दिया जाना भी इसी कड़ी में शामिल है बल्ब निर्माण से वे प्रतिदिन तीन सौ रुपये की आय अर्जन करेंगे और इस प्रशिक्षण की सबसे अच्छी खुबी यह है कि उन्हें घर के नजदीक ही स्व-रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे और अब उन्हें जीवन-यापन के लिए कहीं और पलायन करने की जरुरत नहीं होगी। युवको को नसीहत देते हुए कहा कि अपनी आय की बचत राशि का सदुपयोग करे ताकि भविष्य में उसे बड़े व्यवसाय प्रारंभ करने पर व्यय कर सके।

यह एक विरोधाभास ही है कि जिस उच्चतर माध्यमिक शाला भवन को आज से दस-पन्द्रह साल पहले माओवादियों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था और उसी शाला भवन के खण्डहर एवं अवशेषों में आज ग्राम कोनगुड़ की नारी शक्ति स्व-सहायता समूह द्वारा पुर्ननिर्माण एवं स्वावलंबन के बीज बोये जा रहे है। एक महिला समूह द्वारा सीमेंट, कांक्रीट ईंट निर्माण का जिम्मा उठाना यहां के वक्त एवं हालात में हो रहे सुखद बदलाव के स्पष्ट संकेत है। इस संबंध में नारी शक्ति स्व-सहायता समूह की अध्यक्षा ने बताया कि स्व-सहायता समूह द्वारा एनआरएलएम बिहान के तहत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक शाखा बड़ेडोंगर से लिंकेज के माध्यम से कर्ज लिया गया है और ईंट निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है। महिलाओं ने कही और जगह उपलब्ध न होने की दशा में इसी ध्वस्त शाला के खण्डहर में ही तत्काल अपना कार्य प्रारंभ कर दिया है और उन्हें लगातार ईंट निर्माण के ऑडर भी प्राप्त हो रहे है।

कहते है पेट के रास्ते ही दिल जीते जाते है अर्थात् अच्छा खाना निश्चित ही तन-मन को तृप्त करता है इसी कथन को सार्थक करते हुए विकासखण्ड माकड़ी की लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने भी भोजनालय व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रखा है। कुल दस महिलाओं सदस्यों वाले इस समूह द्वारा स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के परिसर में अन्नपूर्णा दालभात केन्द्र का शुभारंभ दिनांक 11 सितम्बर को जिला कलेक्टर नीलकंठ टीकाम के करकमलों से कराया गया। मौके पर समूह की अध्यक्षा वीणा मानिकपुरी ने बताया कि इस केन्द्र के द्वारा मरीजों एवं उनके परिजनो को मात्र दस रुपये में दाल-चावल उपलब्ध कराया जायेगा। ज्ञात हो कि इस समूह ने बिहान कार्यक्रम के तहत बैंक लींकेज के माध्यम से लोन प्राप्त कर अपना व्यवसाय प्रारंभ किया है। गौरतलब है कि इस सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में लंबे समय से एक भोजनालय की कमी महसूस की जा रही थी। इसके कारण दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को भोजन के लिए ईधर-उधर भटकना पड़ता था। ऐसे में समूह की महिलाओं द्वारा सस्ते में भोजन उपलब्ध कराना ग्रामीणों के लिए राहत की बात होगी। जिला कलेक्टर ने इस मौके पर महिलाओं को प्रोत्साहन स्वरुप कहा कि वे मरीजों एवं कुपोषित बच्चों के लिए विशेष भोजन तैयार करने का भी कार्य करे। इससे उनके व्यवसाय को एक नई गति मिलेगी।