सरकार ने अबतक 15 विधेयक पारित कराए, एनडीए ने राज्यसभा में विपक्ष की ताकत खत्म की

सरकार ने अबतक 15 विधेयक पारित कराए, एनडीए ने राज्यसभा में विपक्ष की ताकत खत्म की

 नई दिल्ली
 
राज्यसभा में भाजपा अभी बहुमत से दूर है, इसके बावजूद वह विपक्ष की ताकत को खत्म करने में सफल रही है। एनडीए ने उच्च सदन में बहुमत के बिना भी विधेयकों को पारित करने की क्षमता हासिल कर ली है। सत्तापक्ष की चौकस रणनीति और विपक्ष में बिखराव के चलते यह संभव हुआ है। ऐसे में आरटीआई विधेयक की तरह तीन तलाक बिल भी राज्यसभा में आसानी से पारित हो जाने की उम्मीद है।

राज्यसभा में बहुमत के लिए सत्तापक्ष के पास 123 सांसदों का समर्थन होना चाहिए। मगर, एनडीए का संख्याबल अभी बमुश्किल 110 तक ही पहुंच पाया है। इस हिसाब से विपक्ष की संख्या ज्यादा है। पिछले सप्ताह जब विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद आरटीआई विधेयक पारित हुआ तो विपक्ष की सारी रणनीति धरी रह गई। माना जा रहा है कि तीन तलाक विधेयक पर यह स्थिति फिर दोहराई जा सकती है।

सत्तापक्ष ने अपनी रणनीति बदली : लोकसभा में मजबूत बहुमत के आत्मविश्वास से भरी सरकार ने राज्यसभा में अपनी रणनीति में कई बदलाव किए हैं। तटस्थ दलों टीआरएस, बीजद और वाईएसआर को सत्तापक्ष ने अपने पाले में कर लिया है। इन दलों के मिलाकर 15 सांसद हैं। तीन तलाक पर भी टीआरएस और बीजद सरकार के पक्ष में वोट करेंगे। दूसरे, आरटीआई बिल के दौरान सदन में सपा के कम सदस्यों की मौजूदगी को सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

दलों में तालमेल नहीं
कांग्रेस, तृणमूल और वामदलों के बीच सदन में कई मुद्दों पर तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। इससे सरकार का फायदा हो रहा है। मसलन, तीन तलाक बिल को तृणमूल कांग्रेस चयन समिति को भेजने के पक्ष में तो है, पर राज्य में सियासी नुकसान से बचने को वह इसके खिलाफ वोट नहीं करना चाहती।

सरकार ने अबतक 15 विधेयक पारित कराए
राज्यसभा में सरकार 15 बिल पारित कराने में सफल रही है। विपक्ष का आरोप है कि इनमें से 14 विधेयक ऐसे थे, जो किसी संसदीय समिति के पास नहीं भेजे गए। आरटीआई समेत कई बिलों को संसदीय समिति को भेजने की कोशिश विपक्ष ने की थी, पर कामयाबी नहीं मिली। आने वाले दिनों में तीन तलाक के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियां निवारण संशोधन बिल पर भी विपक्ष का यही रुख रहेगा।  मगर, सत्तापक्ष की तरफ से राज्यसभा में इस तरह का प्रबंधन किया गया है कि विपक्षी रणनीति के सफल होने की उम्मीद नहीं है।