कमलनाथ करेंगे राहुल से मुलाकात, पीसीसी चीफ का जल्द होगा एलान
भोपाल
मध्य प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष के नाम की रेस अब और तेज हो गई है। सोमवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मुख्यमंत्री कमलनाथ मुलाकात करेंगे। वह उनसे पसीसी चीफ के नाम पर चर्चा करेंगे। इस रेस में पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम शामिल बताया जा रहा है। लेकिन कमलनाथ और दिग्विजय सिंह उनके नाम पर सहमत नहीं है। दोनों ही अपने अपने खेमे के नेता को इस पद पर देखना चाहते हैं।
सूत्रों के अनुसार कमलनाथ ने सत्ता और संगठन में समन्वय कायम रखने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए सहमति जताई है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने राजनैतिक गुरु स्व. अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह को या फिर मध्यप्रदेश में पिछड़े वर्ग की आबादी को खुश रखने के लिए पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. सुभाष यादव के बेटे और मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव को पसंद किया है। दिग्विजय सिंह का खेमा यह मानता है कि पूरे प्रदेश में दिग्विजय समर्थकों को भटकाव का सामना न करना पड़े, इसलिए जरूरी है कि अरुण यादव जैसे ईजी गोइंग नेता को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी जाए। लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह तय किया है कि इस बात का ऑकलन होना चाहिए, प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गत पिछड़े 15 वर्षों में किसके कार्यकाल में अच्छा प्रदर्शन रहा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की 2003 से लेकर 2018 तक की यात्रा में सफलता के नाम पर सुरेश पचौरी इसलिए आगे आते हैं, क्योंकि 2008 में उनके कार्यकाल में कांग्रेस भवन का निर्माण हुआ, संगठन का ढांचा तैयार हुआ और विधानसभा में 2003 के मुकाबले में कांग्रेस की सीटें भी बढ़ीं। कांग्रेस संगठन के लिए दिन-रात एक करना, भाजपा के शिवराज सरकार के खिलाफ धरना और उपवास के मुद्दे महत्वपूर्ण साबित हुए लेकिन 2008 की विधानसभा चुनाव में 78 बागियों ने कांग्रेस को सत्ता में नहीं आने दिया, वरना पचौरी में कोई कमी निकालने की सोच भी नहीं सकता। रहा सवाल अजय सिंह या अरुण यादव का, इन दोनों को आगे बढ़ाने के लिए दिग्विजय सिंह ने कमर कस ली है, जबकि मुख्यमंत्री समावेशी राजनीति पर भरोसा करते हुए सबको सम्मानजनक तरीके से एडजेस्ट करना चाहते हैं, ऐसी खबर अब मीडिया में आने लगी है।
निगम मंडल में होंगी नियुक्तियां
दूसरी तरफ प्रदेश के राजनीतिक हालातों को समझने वाले जानकारों का कहना है, कि भले ही प्रदेश की कमलनाथ सरकार को बाहर से कोई खतरा न हो, लेकिन पार्टी के अंदर ही कुछ नेताओं में नाराजगी बढ़ रही है। हाल में ही सरकार को समर्थन दे रहे बुरहानपुर सीट से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा की नाराजगी भी उनके बयानों में दिखी है। अब ख़बर है कि मंत्रीमंडल विस्तार के लिए पार्टी आलाकमान से हरी झंडी न मिलने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ जल्द ही निगम मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियां कर सकते हैं। इससे वो पार्टी के उन विधायकों को संतुष्ट करने की कोशिश करेंगे, जिन्हें मंत्री पद से वंचित रहना पड़ा है। इसके अलावा पार्टी को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों के अलावा उन दिग्गजों को भी साधा जा सकता है, जिन्हें विधानसभा चुनावों में अप्रत्याशित रूप से हार मिली है।
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