विधानसभा में कांग्रेस ने सिंगरौली में 6 लाख पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया
पूरा जंगल अडानी को दे दिया, क्या यही है वन अधिनियम
अडाणी समूह को खदानें दी गईं, इसलिए जंगल कट रहे
भोपाल, विधानसभा के शीतकालीन सत्र में शुक्रवार को कांग्रेस ने सिंगरौली जिले के जंगल में 6 लाख पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया। वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार इसका सही जवाब नहीं दे पाए। भाजपा और कांग्रेस में बहस शुरू हो गई, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने सिंगरौली में पेड़ कटाई को अवैध बताया। जवाब में वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा, जो भी पेड़ काटे गए हैं, वह नियम अनुसार कटे हैं। जितने पेड़ काटे जा रहे हैं, उतने पेड़ लगाए भी जा रहे हैं। जितनी जमीन जा रही उतनी जमीन भी उपलब्ध कराई जा रही है। भूरिया ने कहा कि सिंगरौली से पेड़ काटकर सागर और शिवपुरी में लगाए जा रहे हैं। ये कैसा न्याय है। अडाणी को श्रेष्ठ बताने के लिए सिंगरौली के आदिवासियों के जमीन से पेड़ काटे जा रहे हैं। वहीं, कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा, अडाणी समूह को खदानें दी गई हैं, जिसके लिए पेड़ काटे जा रहे हैं।
नारेबाजी करते हुए कांग्रेस का वॉकआउट
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, जब पहले सिंगरौली ब्लॉक पेसा एक्ट के दायरे में आ रहा था, तो संसदीय कार्य मंत्री ने यह गलत जानकारी क्यों दी कि वह एरिया पेसा के दायरे में नहीं आता था। जबकि अगस्त 2023 में इसको लेकर साफ कहा गया है कि वह इलाका पेसा एक्ट के दायरे में आता है। सरकार इस बारे में जवाब दे। इसको लेकर कांग्रेस और भाजपा में बहस की स्थिति शुरू हो गई। इसके बाद कांग्रेस के विधायक नारेबाजी करते हुए बाहर निकल गए। विधायक बाला बच्चन ने कहा कि कोल ब्लॉक के लिए जमीन दी गई इसलिए ऐसा किया गया। वन मंत्री अहिरवार ने कहा कि आज की स्थिति में वह ग्राम और ब्लॉक एरिया की पेसा एक्ट के एरिया में नहीं आता, इसलिए उसे परमिशन दी गई है। जब इस पूरे मामले में वन मंत्री बार-बार कहे जाने के बाद भी सही जवाब नहीं दे पाए तो विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस पूरे मामले में नेता प्रतिपक्ष से अलग मुलाकात कर वन मंत्री जवाब देंगे।
राज्य वन मंत्री के बचाव में आए मंत्री विजयवर्गीय
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, सिंगरौली वन कटाई के सवाल का जवाब वह सदन में चाहते हैं। इसे देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राज्य वन मंत्री अहिरवार पहली बार के विधायक हैं, लेकिन उन्होंने काफी सही जवाब दिया है। सिंगरौली में कभी भी पेसा एक्ट नहीं रहा है। क्योंकि यहां आदिवासियों की संख्या कम रही है। यह बात अधिकारियों से चर्चा की बाद कह रहे हैं।
अडाणी को श्रेष्ठ बताने पेड़ काटे जा रहे
कांग्रेस विधायक भूरिया ने कहा, सिंगरौली से पेड़ काटकर सागर और शिवपुरी में लगाए जा रहे हैं। ये कैसा न्याय है। आदिवासियों के साथ सदियों से ही अन्याय हुआ है। पहले अर्जुन को श्रेष्ठ बताने के लिए एकलव्य का अंगूठा काटा गया। अब अडाणी को श्रेष्ठ बताने के लिए सिंगरौली के आदिवासियों के जमीन से पेड़ काटे जा रहे हैं। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा, अडाणी समूह को खदानें दी गई हैं, जिसके लिए पेड़ काटे जा रहे हैं। इसे पेसा एक्ट से बाहर बताया गया है। यहां पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन हुआ है। संपूर्ण सिंगरौली के संचय प्रभाव का आकलन हुआ है या नहीं हुआ है यह भी बताया जाए। पेड़ कटाई को लेकर विक्रांत भूरिया ने कहा, अगर सारी कटाई परमिशन के आधार पर हो रही है तो फिर विरोध की स्थिति क्यों बन रही है। 8 गांव अधिसूचित क्षेत्र से बाहर कैसे हो गए। जवाब में मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा, जितने पेड़ काटे जा रहे हैं, उतने पेड़ लगाए भी जा रहे हैं। इसमें समस्या नहीं होना चाहिए और सारे काम केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति से हो रहे हैं। जितनी जमीन जा रही उतनी जमीन भी उपलब्ध कराई जा रही है।
सिंगरौली में नहीं हो रही अवैध वन कटाई
कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने सिंगरौली में अवैध वन कटाई का मामला उठाया। जवाब में वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा, यह सही नहीं है कि वन क्षेत्र में अवैध कटाई हो रही है। खान और खनन मंत्रालय के निर्देश के आधार पर 2672 हेक्टेयर क्षेत्र में कटाई हुई है। जो भी पेड़ काटे गए हैं, वह नियम अनुसार कटे हैं।भारत सरकार की परमिशन के आधार पर कार्रवाई हो रही है।
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