25000 घरों में वाटर मीटर लगाने को 44 करोड़ का प्रोजेक्ट, एक भी कंपनी नहीं आई

रायपुर
 स्मार्ट सिटी के एरिया बेस्ड डेवपलमेंट (एबीडी) क्षेत्र में 24 घंटे पानी सप्लाई के लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने महीनेभर पहले टेंडर जारी किया था, जो चार जुलाई को खुलने जा रहा है। प्रोजेक्ट के तहत 25 हजार घरों में 24 घंटे सातों दिन पानी सप्लाई होगा। यानी नल को ऑन (चालू) करते ही पानी मिलेगा।

वहीं पानी की बर्बादी को रोकने के लिए वाटर मीटर लगेंगे। 44 करोड़ का यह प्रोजेक्ट है। सफल रहा तो पूरे शहर में धीरे-धीरे इसे विस्तारित किया जाएगा। लेकिन सूत्र बताते हैं कि अभी तक किसी भी कंपनी ने निविदा नहीं भरी है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने सिर्फ रुचि दिखाई और बातचीत की। अगर कोई कंपनी नहीं आती है तो स्मार्ट सिटी प्रबंधन री-टेंडर पर विचार करेगा।

मीटर के आधार पर लगेगा शुल्क-

अभी निगम के नलों से पानी सप्लाई दो वक्त होती है और इसका शुल्क निर्धारित है। मीटर लगने के बाद जितना इस्तेमाल करेंगे उतना शुल्क देना होगा। इससे लोगों में पानी के प्रति जागरूकता आएगी, वे सोच-समझकर खर्च करेंगे।

चिप वाले नहीं, लगेंगे मैनुअल वाटर मीटर- स्मार्ट सिटी के इंजीनियर्स ने पहले घरों में चिप वाले वाटर मीटर लगाने का प्रोजेक्ट बनाया था, लेकिन जब सूडा को यह प्रस्ताव भेजा गया तो उसने इसे खारिज ह कर दिया। इसकी वजह थी कि चिप वाले मीटर की लागत और इसका मेंटेनेंस न हो पाना। सूडा के सूझाव पर स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने इसे रद कर, मैनुअल वाटर मीटर लगाने का निर्णय लिया। इसकी लागत करीब आधा है।

लग चुका है कई बड़े प्रोजेक्ट पर झटका-

स्मार्ट सिटी को बीते कुछ दिनों में कई बड़े प्रोजेक्ट पर झटका लग चुका है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट, जिसमें शहर की नौ सड़कों को स्मार्ट बनाना था। इसके लिए टेंडर जारी हुआ, स्मार्ट सिटी ने 108 करोड़ रुपये का बजट तय कर रखा था, लेकिन एल-1 आया 121 करोड़ का।

स्मार्ट सिटी ने इसे बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टोरेट (बीओडी) के समझ रखा जिसने 13 करोड़ अतिरिक्त के बजट पर वर्क-ऑर्डर देने पर इन्कार कर दिया। अब दोबारा से प्रोजेक्ट को संशोधित कर कुछ और सड़कों को लेते हुए 180 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी होगा।

अभी एबीडी एरिया का प्लान

यह एक अच्छा प्रोजेक्ट है। अभी एबीडी एरिया के लिए प्लान बना है, बाद में पैन सिटी में विस्तारित किया जाएगा। पहले चिप वाले वाटर मीटर का प्रस्ताव था, लेकिन सूडा के सुझाव पर इसे मैनुअल ही रखा जा रहा है। इससे बजट भी बचेगा। - बीआर अग्रवाल, प्रभारी नोडल अधिकारी, रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड