काम बढ़ा, कमाई में इजाफा- पटरी पर लौट रही है डिलिवरीमैन की जिंदगी
नई दिल्ली
उनकी नौकरी हमेशा मुश्किल और खतरनाक होती है लेकिन कोविड-19 के चलते लगे लॉकडाउन ने उसमें इजाफा कर दिया। खाने के ऑर्डर आने लगभग बंद हो गए। इसके बाद डिलिवरी राइडर्स को भविष्य धुंधला दिखने लगा जो जरूरी सामानों की डिलिवरी से नहीं जुड़े थे। संक्रमण का डर उनके दिमाग में भी था लेकिन भूख बड़ी थी। इस बीच कई अपने गांव और छोटे शहरों को लौट गए।
बालेश्वर यादव रुक गए। हालांकि खाने के ऑर्डर लगभग न के बराबर थे। ज्यादा काम के लिए उन्होंने कई फूड डिलिवरी प्लैटफॉर्म्स के साथ टाई-अप किया। जब इससे भी काम नहीं बना तो उन्होंने ई-कॉमर्स कंपनियों का रुख किया। ये कंपनियां इन हालात में भी डिलविरी कर रही थीं।
लॉकडाउन ने साबिर अली के परिवार को भी प्रभावित किया। अमेजन के साथ उनकी डिलिवरी जॉब बनी रही। उनके पिता और भाई की नौकरी हालांकि चली गई। अली के पास भी काम कम था। लेकिन अली कहते हैं कि अब वे दिन बीत चुके हैं। उनका कहना है, 'ज्यादातर सड़कें खुली है, तो मैं तेजी से डिलिवरी कर पा रहा हूं। चीजें अब काफी हद तक सामान्य हो चुकी हैं।'
ग्रोफर्स के लिए डिलिवरी करने वाले गौरव पाल भी इस बात से सहमत हैं। उनका मानना है कि काम अब काफी सुधर गया है। उन्होंने कहा कि हालात अब स्थिर हैं, शिफ्ट के घंटे कम हो गए हैं और वह अपने 10 महीने के बच्चे के साथ ज्यादा वक्त बिता पा रहे हैं। पाल ने कहा, 'छह लोगों की हमारी टीम एक दिन में 60-70 ऑर्डर डिलिवर कर रही थी। अब हम 140 से ज्यादा ऑर्डर डिलिवर कर रहे हैं। इनसेंटिव से हमारी कमाई बढ़ गई है।' उन्होंने बताया कि उनकी कमाई अब 16000 से बढ़कर 20-22 हजार हो गई है।
पिंटू भी ग्रोफर्स के लिए डिलिवरी करते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कमाई भी अब पहले से 3000 रुपये तक बढ़ गई है। उनका कहना है कि अब अनलॉक फेज में डिलिवरी पहले से दोगुनी हो गई है। उन्होने कहा, 'लॉकडाउन के दौरान हम कुछ इलाकों में नहीं जा सकते थे, कई बार मैं दिन में 10 डिलिवरी भी नहीं कर पाता था। लेकिन अब हालात बेहतर हैं।'
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