ऊर्जा विभाग की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित
जयपुर। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि राज्य सरकार ने विगत दो वर्ष में योजनाबद्ध रूप से प्रदेश के विद्युत तंत्र को मजबूती दी है। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार वर्ष-2027 तक किसानों को दिन में बिजली देने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इस संकल्प की क्रियान्विति के मद्देनजर ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित 33 केवी के 5 हजार 565 सब स्टेशनों में से 4 हजार 115 सब स्टेशनों में दिन के दो ब्लॉक में विद्युत आपूर्ति की जा रही है।
नागर मंगलवार को विधान सभा में ऊर्जा विभाग की (मांग संख्या-54) अनुदान मांग पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने ऊर्जा विभाग की 2 खरब 63 अरब 55 करोड़ 58 लाख 41 हजार रूपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दीं। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि शेष 1450 सब-स्टेशनों में दिन में विद्युत आपूर्ति के लिए विद्युत तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है।
अक्षय ऊर्जा एवं सौर ऊर्जा में राजस्थान अग्रणी
नागर ने कहा कि राजस्थान आज अक्षय ऊर्जा एवं सौर ऊर्जा में देश में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। हमारी स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता 43.8 गीगावाट तक पहुंच गई है। मात्र दो साल में अक्षय ऊर्जा क्षमता में 20,017 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है। विगत दो वर्ष में सौर ऊर्जा में लगभग 19,913 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है। देश की कुल सौर ऊर्जा क्षमता में हमारी भागीदारी लगभग 27 प्रतिशत और अक्षय ऊर्जा में 16 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है।
बिजली की औसत खरीद दर में की 22 पैसे प्रति यूनिट की कमी
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बिजली की कुल औसत खरीद दर में कमी की है। पूर्ववर्ती सरकार के समय यह 5 रूपए 7 पैसे प्रति यूनिट रही है। इसमें हमने 22 पैसे प्रति यूनिट की कमी की है। हमारे समय में यह औसत दर 4 रूपए 85 पैसे प्रति यूनिट है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के प्रयासों का परिणाम है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में वितरण हानियां 17.10 प्रतिशत थी जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में घटकर 14.30 प्रतिशत तक आ गई। इस दौरान एटीएंडसी लॉसेज 21.81 प्रतिशत से घटकर 15.27 प्रतिशत तक आ गए हैं। गत सरकार के समय वर्ष 2022-23 में 20 पैसे एवं 2023-24 में 31 पैसे प्रति यूनिट का नुकसान (एसीएस- एआरआर गैप) था, जो अब हमारे कार्यकाल के वर्ष 2024-25 में 4 पैसे प्रति यूनिट के लाभ में परिवर्तित हो गया है।
पूर्ववर्ती सरकार ने बनाए 44 और हमने बनाए 53 जीएसएस
नागर ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रसारण तंत्र को सुदृढ़ करने पर पूरा ध्यान दिया है। विगत सरकार ने पूरे 5 वर्ष में 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी के कुल 44 ग्रिड सब स्टेशन ही स्थापित किए थे। इसके विपरीत हमने दो साल में ही 53 ग्रिड सब स्टेशन स्थापित कर दिये। इसके अलावा 33 केवी के 396 जीएसएस भी स्थापित किए हैं। इसी प्रकार पूर्ववर्ती सरकार ने राज्य के उपयोग के लिए सभी स्त्रोतों से 5 वर्ष में मात्र 3958 मेगावाट क्षमता की बढ़ोतरी की, जबकि हमारी सरकार ने दो साल में ही 8413 मेगावाट अर्थात दोगुनी उत्पादन क्षमता जोड़ी है।
पीएम-कुसुम में 3035 मेगावाट की परियोजनाएं स्थापित
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने पीएम कुसुम योजना में 3035 मेगावाट की 1340 विकेन्द्रित परियोजनाएं स्थापित की हैं। कुसुम कम्पोनेंट-ए में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है और कुसुम-सी में दूसरे स्थान पर है। हमारी सरकार के समय में दिसम्बर 2025 तक कुसुम संयंत्रों से 2,682 मिलियन यूनिट बिजली औसत 3 रूपए 21 पैसे प्रति यूनिट की दर से खरीदी गई, जिससे डिस्कॉम्स को लगभग 440 करोड़ रूपए की बचत हुई है।
रबी सीजन में की निर्बाध आपूर्ति
नागर ने कहा कि प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ रही है। रबी सीजन में पीक डिमांड बढ़कर 20 हजार 600 मेगावाट के स्तर तक पहुंच गई है। इसके बावजूद हम निर्बाध आपूर्ति कर पा रहे है। इस रबी सीजन में एक दर्जन से अधिक मौके ऐसे आए जब मांग का स्तर 19 हजार मेगावाट से अधिक पहुंच गया था। इसके बावजूद आपूर्ति में कहीं बाधा नहीं आई। सरकार के प्रभावी प्रबंधन का परिणाम है कि रबी सीजन में विद्युत आपूर्ति को लेकर कोई बाधा नहीं आई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार की यह बड़ी सफलता है।
अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए डीएलसी की दोगुनी हुई भूमि आवंटन की दर
नागर ने कहा कि सरकार ने अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए राजकीय भूमि आवंटन की दर को डीएलसी दर का दोगुना कर दिया है। इससे भूमि आवंटन से दो गुना राजस्व प्राप्त हो रहा है। राजकीय भूमि पर देय वार्षिक लीज रेंट की दर भी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दी गई है।
नागर ने कहा कि पहली बार प्रदेश में वर्चुअल नेट मीटरिंग एवं ग्रुप नेट मीटरिंग को अनुमत किया गया है। इसका लाभ मल्टी स्टोरी एवं अपार्टमेंट में रह रहे लोगों, गांव-ढाणी में बसे उपभोक्ताओं, लघु उद्योगों सहित ऐसे उपभोक्ताओं को होगा जिनके पास छत उपलब्ध नहीं है। ऐसे उपभोक्ता भी अब सौर ऊर्जा से जुड़ सकते हैं।
कनेक्शन प्रक्रिया को बनाया सरल, सुगम एवं पारदर्शी
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि ई-गवर्नेंस की दिशा में उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए बिजली मित्र एप, विजिलेंस एप, जेईएन साइट वेरिफिकेशन एप, एनसीएमएस, पीडीसी वेरिफिकेशन मॉडयूल, जीएसएस मॉनिटरिंग एप की पहल की गई है। इससे विद्युत कनेक्शन, बिल भुगतान, राजस्व वसूली, ग्रिड की मॉनीटरिंग के कार्य में अधिक पारदर्शिता आई है। कनेक्शन के लिए आवेदकों को अब विद्युत कार्यालयों में उपस्थित होने की अनिवार्यता नहीं है। आवेदक अब घर बैठे ही मोबाइल एप के माध्यम से सभी श्रेणियों के नए कनेक्शन, लोड परिवर्तन, नाम परिवर्तन आदि के लिए आवेदन कर सकते हैं। घरेलू कनेक्शन में स्टाम्प ड्यूटी की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। सिर्फ दो दस्तावेज (मालिकाना हक एवं पहचान पत्र) के आधार पर ही घरेलू कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं।
कोयला संकट का किया समाधान
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2024 से पूर्व प्रदेश की थर्मल इकाइयों को आवंटित कोयला ब्लॉक से कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय प्रयास कर खनन प्रारंभ कराया। माह दिसंबर 2024 में 775 कोयला रैक प्राप्त हुई, जो अब तक किसी भी माह में प्राप्त हुई सर्वाधिक कोयला आपूर्ति है। राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के विद्युत गृहों में लगभग 18.74 लाख मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध है, जो 20.3 दिन की आवश्यकता के लिए पर्याप्त है। सरकार ने इस कोयला संकट का समाधान किया है।
नागर ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में अजमेर डिस्कॉम के वितरण लॉसेस अब तक के न्यूनतम स्तर 7.63 प्रतिशत पर एवं इसी तरह अजमेर डिस्कॉम के एटीएंडसी लॉसेज वर्ष 2024-25 में अब तक के न्यूनतम स्तर 9.19 प्रतिशत पर तथा जयपुर डिस्कॉम के वितरण लॉसेज अब तक के न्यूनतम स्तर 13.75 प्रतिशत एवं एटीएंडसी लॉसेस 14.02 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार राजस्थान को एनर्जी सरप्लस स्टेट बनाने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है।
इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री ने विभाग की आगामी कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि:-
1. हमने 190 जीएसएस की सूची फिजिबिलिटी के आधार पर और किसानों को 2 ब्लॉक में सप्लाई देने के लिए तैयार की है। उनमें से काफी जीएसएस बजट में एवं पूरक बजट में घोषित किए जा चुके हैं। शेष फिजिबल जीएसएस कार्ययोजना के तहत स्वीकृत करेंगे।
2. पीक ऑवर्स में सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए 5000 मेगावाट ऑवर बैटरी स्टोरेज पर कार्य किया जायेगा।
3. सरकार 33 केवी जीएसएस पर सोलर प्लान्ट के साथ बैटरी स्टोरेज स्थापित करने पर भी काम कर रही है।
4. निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं बिजली की खरीद लागत में कमी के उद्देश्य से लगभग 35 करोड की अनुमानित लागत से एकीकृत ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। यह एआई एवं मशीन लर्निग पर आधारित होगी।
5. प्रसारण एवं वितरण में वित्तीय अनुशासन लाने के लिए पीएफसी एवं आरएफसी से कम ब्याज दर पर ऋण लेने की कार्ययोजना पर काम किया जाएगा।
6. करौली एवं सपोटरा क्षेत्र के 66 गाँव एवं अन्य ऐसे गाँव जो वन भूमि के अन्तर्गत बसे हुए हैं उनको ऑफ ग्रिड के माध्यम से विद्युतीकृत करने के लिए डीपीआर बनाकर आरईसी को स्वीकृति के लिए भेजा जा रहा है।
7. मैटेरियल मैनेजमेण्ट में सुधार के लिये ईआरपी प्रणाली पर कार्य कर रहे हैं जिससे मैटेरियल की रियल टाइम मॉनिटरिंग व लेखांकन संभव हो सकेगा।
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