स्मार्ट तकनीक और नवाचारों से राजस्थान में विद्युत आपूर्ति को बेहतर बनाने पर मंथन

स्मार्ट तकनीक और नवाचारों से राजस्थान में विद्युत आपूर्ति को बेहतर बनाने पर मंथन

जयपुर। जयपुर में आयोजित दो दिवसीय 10वीं डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट-2026 के दूसरे दिन बुधवार को ‘वितरण नेटवर्कों के लिए फ्लेक्सिबिलिटी संबंधी समाधान तथा सौर पीवी और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के मानक’ विषय पर तकनीकी सत्र आयोजित हुआ। ऊर्जा विभाग एवं ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन की सहभागिता से आयोजित सत्र में विद्युत वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने, नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण, पीक डिमांड प्रबंधन तथा स्मार्ट तकनीकों के उपयोग पर चर्चा हुईl

सत्र की अध्यक्षता ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन के महानिदेशक आलोक कुमार ने की। केपीएमजी के पार्टनर विकास गाबा ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई। सत्र में टीईआरसी के चेयरमैन हेमंत वर्मा, डी-शेयरिंग जापान के सीईओ नाओकी सकाई, जयपुर डिस्कॉम की एसई श्रीमती दीप्ति माथुर तथा सीपीआरआई के अतिरिक्त निदेशक सुधीर कुमार आर सहित विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

नवीकरणीय ऊर्जा के साथ ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी पर जोर

विशेषज्ञों ने बताया कि देश में लगभग 165 गीगावाट सौर, 58 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफ टॉप सोलर के विस्तार से स्वच्छ ऊर्जा का महत्व बढ़ रहा है। इससे ग्रिड संचालन में नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। दिन में अधिक सौर उत्पादन और शाम को मांग बढ़ने की स्थिति के प्रभावी प्रबंधन के लिए ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट मीटरिंग, मांग पक्ष प्रबंधन और डिजिटल तकनीकों का समन्वित उपयोग आवश्यक है।

सत्र में रिसोर्स एडेक्वेसी  पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि अधिकतम मांग के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए पर्याप्त उत्पादन क्षमता, विद्युत खरीद अनुबंध, मजबूत ट्रांसमिशन-वितरण नेटवर्क तथा बैटरी और पंप्ड स्टोरेज जैसी व्यवस्थाओं की दीर्घकालिक योजना जरूरी है।   

बैटरी स्टोरेज और स्मार्ट मीटरिंग से मांग प्रबंधन

सत्र में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के लिए ग्रिड-फॉर्मिंग इन्वर्टर, स्मार्ट मीटर डेटा आधारित मांग पक्ष प्रबंधन, डायनेमिक टाइम ऑफ यूज टैरिफ  पर चर्चा की गई। 100 किलोवाट से अधिक के नए विद्युत लोड के साथ न्यूनतम दो घंटे की BESS व्यवस्था अनिवार्य करने के प्रस्ताव, फ्लेक्सिबल सेवाएं देने वाले उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन, वर्चुअल पावर प्लांट्स (VPPs), एग्रीगेटर्स और ऊर्जा बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के नियामकीय एवं वित्तीय उपायों पर भी विचार हुआ।

विभिन्न राज्यों के नवाचारों का उल्लेख

सत्र में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 100 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र के साथ 40 मेगावाट/120 मेगावाट-घंटा बैटरी स्टोरेज परियोजना, त्रिपुरा के दुर्गम क्षेत्रों में सौर माइक्रोग्रिड तथा जयपुर डिस्कॉम की डिजिटल ट्विन पहल के उदाहरण प्रस्तुत किए गए। बैटरी स्टोरेज से दिन में उत्पादित सौर ऊर्जा का शाम के पीक आवर्स में उपयोग तथा माइक्रोग्रिड से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली उपलब्ध कराने की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया गया।

डिजिटल ट्विन और AI आधारित तकनीकों से बेहतर होगा नेटवर्क प्रबंधन

जयपुर डिस्कॉम की डिजिटल ट्विन पहल के तहत बिजली के खंभों, लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों, फीडरों, सब-स्टेशनों का  digitisation कर नेटवर्क की निगरानी, विश्लेषण और प्लानिंग को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। जीआईएस मैपिंग, स्मार्ट मीटर और सेंसर आधारित डेटा से ओवरलोडिंग एवं तकनीकी खराबियों की पहचान, फॉल्ट लोकेशन निर्धारित करने, आपूर्ति बहाली और नेटवर्क विस्तार की योजना में सहायता मिल सकती है।

जयपुर डिस्कॉम द्वारा क्लीन-टेक स्टार्टअप Flock Energy और सहयोगी संस्थाओं के साथ किए गए AI एवं IoT आधारित मांग प्रबंधन प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। होम एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम (HEMS), स्मार्ट प्लग और IoT उपकरणों से घरेलू बिजली खपत का अध्ययन कर एयर कंडीशनर जैसे अधिक ऊर्जा खपत वाले उपकरणों के उपयोग को पीक आवर्स से अन्य समय में स्थानांतरित करने की संभावनाओं का परीक्षण किया गया। इसके अतिरिक्त, GreenTree Global और Flock Energy के सहयोग से रूफटॉप सोलर की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

विश्वसनीय और किफायती विद्युत आपूर्ति के लिए समन्वित रणनीति जरूरी

सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट मीटरिंग, डिजिटल नेटवर्क प्रबंधन, मांग पक्ष प्रबंधन और संसाधन पर्याप्तता को एकीकृत दृष्टिकोण से अपनाना होगा। तकनीकी मानकों, नियामकीय व्यवस्थाओं और वित्तीय प्रोत्साहनों के विकास तथा विभिन्न राज्यों के नवाचारों के आदान-प्रदान से विद्युत वितरण निगमों की परिचालन दक्षता बढ़ाने, पीक डिमांड का प्रभावी प्रबंधन करने और आमजन को अधिक विश्वसनीय एवं बेहतर विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।