लखनऊ में 24 नवंबर से शुरू होगा कतकी मेला, टेंडर राशि में 66.43% की बढ़ोतरी

लखनऊ में 24 नवंबर से शुरू होगा कतकी मेला, टेंडर राशि में 66.43% की बढ़ोतरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के तट पर स्थित झूलेलाल वाटिका में 24 नवंबर से कतकी मेले का आयोजन किया जाएगा। सात जनवरी तक चलने वाले इस मेले के लिए नगर निगम ने 4.61 करोड़ रुपये की निविदा को मंजूरी दी है। पिछले साल के मुकाबले इस बार मेले के टेंडर की राशि में 66.43 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2025-26 में कतकी मेले का ठेका 2.77 करोड़ रुपये में दिया गया था, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 4.61 करोड़ रुपये की बोली स्वीकृत की गई है। इस तरह ठेके की राशि में करीब 1.84 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने निविदा समिति के सदस्यों की संस्तुति के बाद मेसर्स खुशी ट्रेडर्स की वित्तीय बोली को मंजूरी प्रदान की।

ठेकेदार को 24 घंटे में जमा करनी होगी 50% राशि

निविदा स्वीकृत होने के बाद संबंधित फर्म को निर्धारित नियमों के तहत स्वीकृत राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा 24 घंटे के भीतर नगर निगम के खाते में जमा करना होगा। बाकी भुगतान निर्धारित शर्तों के अनुसार किया जाएगा।

बढ़ सकती है मेले में खरीदारी और मनोरंजन की लागत

टेंडर राशि में हुई बढ़ोतरी के बीच मेले में आने वाले लोगों के खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आशंका है कि ठेका राशि की भरपाई के लिए मेले में पार्किंग, झूलों और अन्य सुविधाओं के शुल्क में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, वास्तविक दरें संबंधित एजेंसी द्वारा निर्धारित नियमों और लागू शर्तों के अनुसार ही तय होंगी। पिछले वर्षों में पार्किंग और झूलों के लिए अधिक शुल्क वसूले जाने की शिकायतों के चलते मेले में आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस बार नगर निगम के सामने उचित दरों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने और शुल्क व्यवस्था पर निगरानी रखने की चुनौती होगी।

नवाबी दौर से जुड़ी है कतकी मेले की परंपरा

कतकी मेला लखनऊ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसे बुड़क्की मेला और गंगा स्नान मेला भी कहा जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसकी परंपरा अवध के नवाबी दौर से जुड़ी हुई है। यह मेला हिंदू-मुस्लिम सामाजिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान के रूप में भी जाना जाता है। परंपरागत रूप से कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गोमती नदी में स्नान के साथ मेले की शुरुआत होती है। पहले इसका आयोजन डालीगंज पुल और सूरज कुंड के आसपास किया जाता था। समय के साथ आयोजन स्थल में बदलाव हुआ और अब यह मेला गोमती तट स्थित झूलेलाल वाटिका में आयोजित किया जाता है।

इस बार भी मेले में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में आयोजन के दौरान सुविधाओं, पार्किंग व्यवस्था और शुल्क पर निगरानी रखना महत्वपूर्ण होगा।