सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 समापन से पहले उमड़ा जनसैलाब

सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 समापन से पहले उमड़ा जनसैलाब

4 जनवरी समापन समारोह में मशहूर सिंगर शहजाद अली देंगे विशेष परफॉरमेंस

जयपुर। सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 का भव्य समापन रविवार, 4 जनवरी को होने जा रहा है। समापन से एक दिन पूर्व शनिवार को मेले में अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोग इस अनूठे मेले के अंतिम पलों का आनंद लेने पहुंचे, जिससे पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। आज मेले में रिकॉर्ड तोड़ बिक्री दर्ज की गई, जो मेले की लोकप्रियता और लोगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

मेले में जयपुर के प्रतिष्ठित आईआईएस कॉलेज एवं सुबोध कॉलेज के छात्र-छात्राओं की विशेष सहभागिता देखने को मिली। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने मेले का भ्रमण किया। जहां उन्होंने न केवल हस्तशिल्प एवं उत्पादों की खरीदारी की बल्कि लाइव डेमो के माध्यम से पारंपरिक कलाओं की बारीकियां भी समझीं। युवाओं में मेले को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला और कई युवा सोशल मीडिया के लिए रील्स और कंटेंट बनाते नजर आए, जिससे मेले की पहुंच डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी व्यापक रूप से बनी रही।

मेले की सांस्कृतिक संध्या ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। राजस्थानी लोक नृत्य और कत्थक फ्यूजन की मनमोहक प्रस्तुतियों पर दर्शक झूम उठे और तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। परंपरा और आधुनिकता के इस संगम ने मेले की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त किया।

रविवार, 4 जनवरी को मेले का भव्य समापन दिवस आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर फोटोग्राफी प्रतियोगिता सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं की घोषणा की जाएगी एवं पुरस्कार वितरण समारोह भी आयोजित होगा। इसे लेकर प्रतिभागियों और दर्शकों में खासा रोमांच देखने को मिल रहा है। समापन दिवस की सांस्कृतिक संध्या में फिल्म धुरंधर के मशहूर गीत “न तो कारवां की तलाश है ” से लोकप्रिय हुए शहज़ाद अली अपनी परफॉरमेंस देंगे। उनके कार्यक्रम को लेकर युवाओं में विशेष उत्साह है और बड़ी संख्या में दर्शकों के मेले में पहुंचने की संभावना है।

सरस मेला: ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वयं सहायता समूहों का सशक्त मंच

सरस मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। यह मेला देशभर के स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं को अपनी कला, हुनर और उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करता है। इन महिलाओं द्वारा निर्मित हस्तशिल्प, वस्त्र, खाद्य उत्पाद और पारंपरिक कलाकृतियां न केवल उनकी आर्थिक मजबूती का आधार बनती हैं, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और पहचान भी दिलाती हैं। सरस मेला ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।