छत्तीसगढ़ के किसानों ने ओडिशा में देखी ऑयल पाम की खेती

छत्तीसगढ़ के किसानों ने ओडिशा में देखी ऑयल पाम की खेती

रायपुर, छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के किसान ओडिशा में ऑयल पाम की खेती का अवलोकन किया। ओडिशा के किसानों द्वारा ऑयल पाम की खेती से प्राप्त आमदनी से काफी प्रभावित हुए। गौरतलब है कि सूरजपुर जिले में ऑयल पाम खेती के विस्तार एवं किसानों की आय वृद्धि के उद्देश्य से उद्यानिकी विभाग द्वारा 25 कृषकों का प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम नुआपाड़ा जिला के खरियार रोड स्थित बेलटुकरी ग्राम में प्रगतिशील कृषकलक्ष्मी चंद्राकर के प्रक्षेत्र पर आयोजित कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को ऑयल पाम उत्पादन की उन्नत तकनीकों से अवगत कराना तथा आधुनिक एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को ऑयल पाम की उन्नत किस्मों, वैज्ञानिक पौधरोपण विधि, संतुलित पोषण प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा आधुनिक सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने प्रक्षेत्र में व्यवहारिक प्रदर्शन कर उत्पादन बढ़ाने की प्रभावी तकनीकों का मार्गदर्शन प्रदान किया। किसानों ने रोपण के 4 वर्ष से 10 वर्ष तक के पौधों से प्राप्त सफल उत्पादन को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा।

ओडिशा के कृषकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रति एकड़ 1.5 से 2 लाख रुपये तक वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। दीर्घकालीन 25 से 30 वर्षों तक सतत उत्पादन, अंतरवर्ती फसलों से अतिरिक्त आमदनी तथा कम लागत में अधिक लाभ की संभावनाओं ने प्रतिभागी किसानों को अत्यंत प्रभावित किया।

कार्यक्रम में प्री यूनिक एशिया लिमिटेड कंपनी की ओर सेसंजीव ज्ञान जी ने ऑयल पाम की खेती, विपणन व्यवस्था तथा शासन द्वारा प्रदाय अनुदान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में कम लागत के साथ दीर्घकाल में अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। इस दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

उद्यानिकी तकनीकी अधिकारी श्रीमती अरुणा कुजूर एवं वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी द्वारा “नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल - ऑयल पाम योजना” के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान की जानकारी दी गई। योजना के तहत प्रति हेक्टेयर रखरखाव हेतु 6,750 रूपए (केंद्र सरकार द्वारा 5,250 एवं राज्य की ओर से 1,500 रूपए प्रदान किया जाता है), इसी तरह अंतरवर्ती फसल हेतु 10,250 (केंद्र द्वारा 5,250 एवं राज्य द्वारा 5000 रूपए ), ड्रिप सिंचाई प्रणाली हेतु 22,765 रूपए (केंद्र द्वारा 14,130 एवं राज्य द्वारा 8,635 रूपए) का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त फेंसिंग (घेराबंदी) के लिए राज्य शासन द्वारा 54,485 रूपए की पूर्ण सहायता दी जा रही है, जिससे फसल को जंगली एवं घरेलू पशुओं से सुरक्षा मिल सके।