प्रदूषण कंट्रोल कर पर्यावरण संरक्षित करने वाले उद्योग, निकाय, अस्पताल और NGO होंगे पुरस्कृत
भोपाल
प्रदेश में जुर्माना लगाकर पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले उद्योगों को नियंत्रित करने वाली सरकार अब प्रदूषण नियंत्रित करने और पर्यावरण संरक्षित करने के लिए बेहतर काम करने, नवाचार करने वाले उद्योगों, संस्थानों,अस्पतालों को पुरस्कृत भी करेगी। इसके लिए नौ श्रेणियों में एक से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक के पुरस्कार हर साल दिए जाएंगे।
प्रदेश में जो अत्यंत प्रदूषणकारी उद्योग है जिसमें डाई एंड डाईज, एल्यूमीनियम इंडस्ट्रीज, इंटीग्रेटेड आयरन एंड स्टील प्लांट, ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स, शुगर इंडस्ट्रीज, फर्टीलाईजर, सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट, डिस्लरी, फर्मेन्टेशन इंडस्ट्रीज, पल्प पेपर एंड बोर्ड मिल्स, सीमेंट इंडस्ट्रीज, थर्मल पावर स्टेशन्स, पेट्रोकेमिकल्स, क्लस्टर आॅफ टेनरीज, पेन्ट्स, पेस्टीसाईड्स, कॉपर एंड जिंक स्मेल्टिंग, पेट्रोलियम आॅयल रिफायनरीज जैसी इकाईयां शामिल है इनमें पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहतर काम करने वाली इकाई को डेढ़ लाख रुपए का पर्यावरण पुरस्कार दिया जाएगा। सामान्य उद्योग, खनिज के उत्खनन से संबद्ध खदानें और लघु उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहतर काम करने पर एक-एक लाख रुपए कापुरस्कार दिया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य स्तरीय पर्यावरण पुरस्कार के लिए उपयुक्त संस्थाओं का चयन करने के लिए राज्य सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की अध्यक्षता में एक समिति भी बना दी है। इसमें संचालक नगरीय प्रशासन, निदेशक भारतीय वन प्रबंध संस्थान भोपाल या उनके प्रतिनिधि, सीएसआईआर भोपाल के निदेशक या उनके प्रतिनिधि, एमएएनआईटी के प्राध्यापक पर्यावरण अथवा उनका प्रतिनिधि, संचालक औद्योगिक स्वास्थ्यएवं सुरक्षा विभाग इंदौर या उनके प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।
अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट से सबसे अधिक प्रदूषण फैलता है। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण के बेहतर इंतजाम करने वाले प्रदेश के दो चिकित्सालयों को एक-एक लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहतर काम करने वाले नगर निगम को डेढ़ लाख तथा नगर पालिका और नगर परिषद को एक लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम कर रहे दो गैर सरकारी स्वयंसेवी संस्थाओं को भी एक-एक लाख रुपए का पर्यावरण पुरस्कार दिया जाएगा। दो विद्यालय और शिक्षा संस्थानों को भी इस क्षेत्र में एक-एक लाख रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे।
राज्य स्तरीय पर्यावरण पुरस्कार प्राप्त करने के इच्छुक उद्योग या संस्थाओं को हर साल 31 मार्च तक की स्थिति में अपने दावे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीस अप्रैल तक प्रस्तुत करना होगा।
जल, वायु प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम के अधीन सहमति,नवीकरण, परिसंकटमय एवं अन्य नियम, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम के तहत लाइसेंस लेने वाले संस्थान ही पुरस्कार के लिए आवेदन कर पाएंगे।
प्रदूषण की शिकायतें और उपचारात्मकउपय,कर्मचारियों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशिक्षण, ठोस एवं द्रव अपशिष्ट प्रबंधन, वृक्षारोपण,उर्जा संरक्षण, उद्योग के विरुद्ध विधानसभा प्रश्न, शिकायतें, सामाजिक पहलू, जल, वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय सहित अन्य जरूरी उपाय।
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