मोहन का एक साल : जो सहेजा गया वही परिस्कृत हुआ

डा आनंद प्रकाश शुक्ल
अपनी मौलिकता और जमीन से जुडे रहना सभी का नैतिक धर्म है। क्योंकि यही नैतिकता हमें समाज को साथ लेकर आगे चलना और आने वाली चुनौतियों से सामना करना सिखाती हैं। राज्य की मोहन सरकार को एक साल पूरे हुए और हमने यह निरंतर देखा और पाया कि वे अपने मूल से जुडे रहने की कोशिशों में जुटे रहे । उनका मानना रहा कि जो अपने मूल को नहीं जानता वही भ्रमित होता है । इसलिये जरूरत है हमें अपने समृद अतीत को सहेजने की क्योंकि जो सहेजा गया वही परिस्कृत हुआ है।जो नहीं सहेजा गया उसका अस्तित्व ही मिट गया । यही कारण है कि उज्जैन में महाकाल कारिडोर से लेकर राम वन पथ गमन , कृण्ण पाथेय के साथ गुरूपूर्णिमा प्रतिवर्ष मनाने , विजयादशमी को शस्त्र पूजन रक्षावंधन पर्व आदि की परंपरा को पुनरस्थापित किया गया। आने वाली पीढी अपनी इस परंपरा पर गौरव का अनुभव करेगी। वर्तमान परिवेश में हमारे युवा अपनी मूल संस्कृति और उसके वैभव जानें ,समझे उसका अध्ययन करें ताकि भविष्य में अपने अतीत के गौरव को साथ में लेकर अपने सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकें।
मध्य प्रदेश के सेवा की बागडोर डा मोहन यादव बीते एक साल से संभाल रहे हैं। वे प्रदेश को विकास और सुशासन की राह पर आगे बढाते हुए सांस्कृतिक वैभव के चरम पर ले जाने के लिए संकल्पित हैं। यह कहा जाना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सीएम डा मोहन यादव, पीएम नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के विजन को मिशन के रूप में संकल्प मानकर पूरा करने में जी जान से जुटे हैं।
विकास का मतलब केवल आर्थिक सशक्त होना नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक ढंग से विकसित होना भी जरूरी है। यही कारण है कि डा मोहन यादव आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सांस्कृतिक और विरासतों को सजोने का काम किया हैं। प्रदेश की सांस्कृतिक वैभव की बात करें तो राम वन पथ गमन का निर्माण होना शुरू हो गया है साथ ही भगवान कृण्ण के पाथेय का भी निर्माण किया जाना है। सांदीपनी के आश्रम में शिक्षा पाने के बाद भगवान ने जहां- जहां अपने कदम रखे उन जगहों को सरकार तीर्थ के रूप में विकसित करेगी । सरकार का मानना है कि विकास का सही माडल भगवान कृण्ण् की शिक्षा और संदेशो को आधार मानकर ही किया जा सकता है। यही कारण है कि मोहन यादव की सरकार ने विशाल स्वरूप में श्रीमद्भगवद गीता की प्रेरणा से मध्यप्रदेश में विकास यात्रा आरंभ हुई है। मोहन सरकार का संकल्प है "विकास के साथ विरासत"। इसीलिए एक ओर जहां विकास के लिये बहुआयामी योजनाओं पर काम हो रहा है वहीं भावी पीढ़ी के निर्माण और उन्हें अपने कर्म-कर्तव्य की प्रेरणा देने के लिये विरासत को भी संजोया जा रहा है। मध्यप्रदेश के विभिन्न स्थानों में योगेश्वर और कर्मेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियां बिखरी हुई हैं। इसी क्रम में सरकार ने समाज में पुनरजागरण के लिये अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव भी धूमधाम से मनाया। सरकार का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का उत्सव है।
एक और खास बात यह है कि डा मोहन यादव ने मोदी के विजन के अनुरूप ही अपने विकास का माडल तैयार किया है जो चार प्रमुख स्तंभो पर खडा है। ये चार स्तंभ हैं गरीब, युवा, नारी और किसान । आपको बता दें कि मप्र की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। ऐसे में किसान और खेती सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। दूसरी ओर महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना ही सरकार ने अपना परम कर्तव्य माना है क्योंकि जिस समाज में महिलाएं सशक्त होंगी वहां का समाज विकसित और आत्मनिर्भर होगा । परिवार में खुशहाली होगी। तीसरी कोशिश युवाओं के रोजगार को आगे बढाने वाला है जिससे पूंजी का निर्माण होगा। ऐसे में युवाओं को भी मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। गरीब को मजबूत करना सरकार और समाज का परम कर्तव्य है। सचमुच समाज के चार पाये यदि मजबूत हो जायें तो राज्य को रामराज्य बनने में देर नहीं लगेगी।
सीएम के रूप में डा मोहन यादव ने बीते एक वर्षों में तमाम राजनीतिक चुनौतियों के बीच विकास का नया कीर्तिमान गढा है। जिस सधे कदमों से मोहन आगे बढ रहे हैं ऐसा जान पडता है कि वे पांव अंगद की तरह हैं। इसके पहले पूर्व सीएम शिवराज ने जो विकास का माडल स्थापित किया उसे आगे बढाने का काम मोहन यादव कर रहे हैं। शिवराज ने बीमारू से निकाल कर विकासशील की राह पकडाई थी अब विकसित की ओर प्रदेश को बढाने का काम निरंतर हो रहा है।
राज्य की मौजूदा स्थिति पर गौर करें तो आने वाले 5 साल में राज्य सरकार का बजट दोगुना हो जायेगा इसके लिये सरकार प्रतिबद्ध है। सीएम मोहन यादव ने प्रदेश में ऐसा नवाचार किया है जो आने वाले समय में विकास का इतिहास लिखेगा । रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव का आयोजन कोई साधारण बात नहीं है । इस प्रकार के आयोजन स्थानीय रोजगार और उदमियों को बढावा देने के लिये संजीवनी की तरह है। सीएम ने यह कार्य करके प्रदेश के उदोग जगत में उर्जा का संचार कर दिया है और युवा शक्ति को प्रेरित करने का काम किया है । उज्जैन , जबलपुर , सागर , ग्वालियर , रीवा और अब नर्मदापुरम संभाग में यह आयोजन एक मिशाल बन गया है। ऐसे आयोजन प्रदेश के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आईटी, टूरिज्म, खनन, उर्जा सहित सभी सेक्टर में गतिविधियों के विस्तार की हर संभव प्रगति के रास्ते को खोल दिया है। खेती और किसानों को मजबूत करने के लिये भी कई प्रयोग किये जा रहे हैं। सिंचाई के लिये अब किसानों को इंतजार नहीं करना होगा बल्कि सोलर पंप लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में निवेश को बढावा देने के लिये विदेश का दौरा करके सीएम डा मोहन यादव ने मप्र में होने वाले विकास को लेकर अपने इरादों को साफ कर दिया है। इसका परिणाम आने वाले निकट भविष्य में दिखेगा।
एक और बात कि प्रदेश में डा मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के गठन के 1 वर्ष पूर्ण होने पर 11 दिसंबर से 26 जनवरी 2025 तक जनकल्याण अभियान और 11 से 26 दिसम्बर तक जनकल्याण पर्व मनाया जा रहा है। इससे सबसे अधिक लाभ वंचित बर्ग को मिलेगा । रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव की सफलता के साथ ही सीएम बुंदेलखंड के लिये विकास की नई रौशनी को धरातल पर उतारने की कोशिश कर रहे हैं। संभव है कि नये साल में वह भी साकार रूप ले सके । केन बेतवा लिंक परियोजना का भूमिपूजन शीघ्र ही हो सकता है।
कुल मिलाकर मात्र एक साल ही हुये हैं किंतु सीएम के रूप में डा मोहन यादव ने प्रदेश के विकास को लेकर अपनी सोच को प्रकट कर दिया है। उनका विजन साफ है इसलिये मिशन भी सफल होगा। इसे पूरा करने के लिये वे परिश्रम की पराकाष्ठा के लिये तैयार हैं, कर्मयोगी बनकर ।
लेखक – वरिष्ठ पत्रकार हैं।
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