CM भजनलाल का वित्त एवं विनियोग विधेयक पर जवाब, कहा- हमारा बजट गत सरकार के अंतिम बजट से 41 प्रतिशत अधिक
हमारे दो साल का मतलब पक्के इरादे-ठोस नीतियां, काम ज्यादा-समय आधा - मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को राजस्थान विधानसभा में वित्त एवं विनियोग विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि हमारी जनकल्याणकारी नीतियों और बड़े आर्थिक सुधारों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। हमारा दृष्टिकोण टकराव और विरोध का नहीं, समाधान और विकास का है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में नवाचार, सुधार और सतत प्रयास से राजस्थान को विकसित राजस्थान बनाने की दिशा में हम अग्रसर हैं। राजस्थान भी भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक मजबूत ग्रोथ इंजन की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को तेज रफ्तार से विकास करना है तो हमे भविष्य की ओर देखकर ही चलना होगा।
प्रति व्यक्ति आय पहली बार 2 लाख रुपये पार
शर्मा ने कहा कि हमारे दो साल के अब तक के कार्यकाल में पक्के इरादों और ठोस नीतियों से राजस्थान में नई कार्य संस्कृति का उदय हुआ है। आधे समय में ही हमारी सरकार में काम ज्यादा हुए हैं। शर्मा ने कहा कि राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय पहली बार बढ़कर 2 लाख 2 हजार 349 रुपये होने जा रही है। वर्ष 2023-24 की (1 लाख 67 हजार 27 रुपये) की तुलना में इसमें लगभग 21.15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि उद्योग, कृषि, सेवा क्षेत्र सहित हर सेक्टर में प्रगति हो रही है। वर्ष 2026-27 का बजट 6 लाख 10 हजार 956 करोड़ रुपये है। वर्ष 2023-24 की तुलना में यह लगभग 41 प्रतिशत अधिक है।
हमारी सरकार के प्रयासों से जीएसडीपी में अभूतपूर्व वृद्धि
शर्मा ने कहा कि वर्ष 2026-27 में राज्य की जीएसडीपी लगभग 21 लाख 52 हजार 100 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यह वर्ष 2023-24 की तुलना में 41 प्रतिशत से भी अधिक वृद्धि है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के 5 वर्षों में जीएसडीपी में लगभग 6 लाख 10 हजार 544 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। लेकिन हमारी सरकार के 2 साल के कार्यकाल में ही 6 लाख 30 हजार 37 करोड़ रुपये से अधिक वृद्धि का अनुमान है। हमारे आर्थिक सुधारों और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के प्रयासों के कारण औसत वृद्धि दर गत सरकार के 10.92 से बढ़कर 12.25 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि स्थिर मूल्यों पर यह दर पिछली सरकार के पांच साल में केवल 5.3 प्रतिशत थी। लेकिन हमारे सिर्फ दो साल में ही यह बढ़कर 8.7 प्रतिशत हो गई है।
वर्ष 2026-27 में राजस्व प्राप्तियां 3 लाख 25 हजार 740 करोड़ रुपये अनुमानित
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने राजस्व बढ़ाने के ठोस और योजनाबद्ध प्रयास किए हैं। वर्ष 2026-27 में प्रदेश की कुल राजस्व प्राप्तियां 3 लाख 25 हजार 740 करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जो गत वर्ष से 14.08 प्रतिशत अधिक है। आज की अनुमानित प्राप्तियां गत सरकार के अंतिम वर्ष से लगभग 60 प्रतिशत अधिक हैं।
अब तक का सबसे अधिक पूंजीगत व्यय हुआ, वर्ष 2026-27 में गत सरकार के मुकाबले दो गुने से भी अधिक का प्रावधान
शर्मा ने कहा कि वर्ष 2024-25 में हमारी सरकार ने अब तक का सबसे अधिक 30 हजार 700 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया। इससे प्रदेश में नयी सड़कें बनी, पुलों का निर्माण हुआ, औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए आधारभूत संरचनाओं पर 53 हजार 978 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है, जो कि गत सरकार के अंतिम वर्ष 2023-24 में किए गए 26 हजार 646 करोड़ रुपये के मुकाबले दो गुने से भी अधिक है। आगामी वर्ष में राज्य का कुल पूंजीगत व्यय 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। गत सरकार के कार्यकाल में औसत पूंजीगत व्यय जीएसडीपी का मात्र 1.64 प्रतिशत ही था, वहीं हमारी सरकार में यह औसत लगभग 2.51 प्रतिशत रखा जा रहा है।
गत सरकार का औसत राजकोषीय घाटा 4.34 प्रतिशत, हमारे तीन वर्षों का औसत 3.94 प्रतिशत
शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार ने वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा 3.69 प्रतिशत पर सीमित रखा है, जबकि गत सरकार के अंतिम वर्ष में यह 4.31 प्रतिशत था। इसी तरह गत सरकार में पांच वर्षों का औसत राजकोषीय घाटा 4.34 प्रतिशत रहा, जबकि हमारी सरकार के तीन वर्षों का औसत केवल 3.94 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि डेब्ट-जीएसडीपी अनुपात 36.8 प्रतिशत पर रखने का प्रावधान किया है। जबकि पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्षों का औसत डेब्ट-जीएसडीपी अनुपात 37.83 प्रतिशत था।
गत सरकार की तुलना में हमारा कृषि बजट 34 प्रतिशत अधिक
शर्मा ने कहा कि विकास के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन भी हमारी सरकार का संकल्प है। हमारी सरकार ने वर्ष 2026-27 में कृषि बजट 1 लाख 19 हजार 408 करोड़ रुपये रखा है, जो गत सरकार के अन्तिम वर्ष 2023-24 के कृषि बजट 89 हजार 190 करोड़ रुपये से 34 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि गत दो वर्षों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में प्रदेश के किसानों को लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की राशि उनके बैंक खातों में पूर्ण पारदर्शिता से ट्रांसफर की गई है। हमारी सरकार ने दो वर्षों में पिछली सरकार के पांच वर्षों की तुलना में तारबंदी में तीन गुना, फार्मपौंड निर्माण में सवा गुना, लैम्पस का गठन में डेढ गुना और शेडनेट में सवा गुना अधिक किसानों को लाभान्वित किया है।
रामजल सेतु लिंक परियोजना उतर रही धरातल पर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राम जल सेतु लिंक परियोजना को हम धरातल पर ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि शेखावाटी क्षेत्र में यमुना का जल लाने के लिए डीपीआर का कार्य जल्द पूरा होने वाला है। पाइपलाइन के अलाइनमेंट का सर्वे और प्रस्तावित अलाइनमेंट का फील्ड वैरिफिकेशन किया जा चुका है। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार से सहमति पत्र प्राप्त हो चुका है।
गत सरकार के समय विभिन्न पेयजल परियोजनाओं पर काम डबल जीरो
शर्मा ने कहा कि गत सरकार के समय कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना से शेखावाटी के सीकर तथा झुंझुनूं जिलों के गांवों और कस्बों को पेयजल के लिए काम जीरो रहा। बाड़मेर जिले की 4 तहसीलों के 889 गांवों तथा झुंझुनूं जिले की 2 तहसीलों के 921 गांवों व इनकी ढाणियों को पेयजल उपलब्ध कराने हेतु 4 हजार 765 करोड़ रुपये की योजना की घोषणा पर जीरो काम हुआ। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में पांच हजार 766 करोड़ रुपये की लागत से चंबल-अलवर-भरतपुर पेयजल परियोजना, तीन हजार 523 करोड़ रुपये की परवन पेयजल परियोजना से हाड़ौती संभाग के विभिन्न हिस्सों में जलापूर्ति, जाखम बांध से उदयपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ एवं राजसमंद जिलों में पेयजल योजना, दो हजार 245 करोड़ रुपये से चंबल नदी से बेगूं, निंबाहेड़ा एवं चित्तौड़गढ़ पेयजल परियोजना और एक हजार 620 करोड़ रुपये की लागत से जाखम बांध से प्रतापगढ़, अरनोद एवं पीपलखूंट में क्षेत्रीय जल प्रदाय परियोजना की घोषणा पर भी काम डबल जीरो था।
गत सरकार के समय विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं पर काम जीरो
मुख्यमंत्री ने कहा कि गत सरकार में प्रदेश के प्रत्येक उपखंड में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की घोषणा कर युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के सपने दिखाए गए। लेकिन वास्तविकता में 107 उपखंडों में भूमि आवंटन का काम जीरो था। इसी तरह सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र ग्रेटर भिवाड़ी तथा बोरानाडा जोधपुर में 250-250 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी स्टोरिड इंडस्ट्रीयल कॉम्पलेक्स, भिवाड़ी शहर व औद्योगिक क्षेत्र में ड्रेनेज संबंधी समस्या के निवारण हेतु 100 करोड़ रुपये की परियोजना, वर्ष 2022-23 में 220 करोड़ रुपये की लागत से 11 मिनी फूड पार्क और निवाई (टोंक) में मिनी एग्रो पार्क की घोषणा पर भी काम जीरो था।
विकास व्यय 68.8 से बढ़ाकर 74 प्रतिशत किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय राज्य का विकास व्यय 68.8 प्रतिशत रह गया था, हमने इसे बढा़कर वर्ष 2026-27 में लगभग 74 प्रतिशत प्रस्तावित किया है। हमारी सरकार ने राज्य में ग्रीन ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए गतवर्ष प्रदेश का प्रथम ग्रीन बजट प्रस्तुत किया था तथा इस वर्ष 33 हजार 476 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो वर्ष 2025-26 में 27 हजार 854 करोड़ रुपये से 20.18 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण को प्राथमिकता देते हुए जनसंख्या के अनुपात में क्रमशः 46 हजार 996 करोड़ रुपये तथा 36 हजार 184 करोड़ रुपये व्यय किये जा रहे हैं।
शिक्षा पर वर्ष 2026-27 में 68 हजार 989 करोड़ रुपये का प्रावधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक सुधार कर संसाधन भी उपलब्ध करवा रही है। जहां गत सरकार के अन्तिम वर्ष 2023-24 में शिक्षा के क्षेत्र में केवल 51 हजार 243 करोड़ रुपये व्यय किए गए थे, वहीं हमारी सरकार ने वर्ष 2026-27 में 68 हजार 989 करोड़ रुपये व्यय का प्रावधान किया है, जो वर्ष 2023-24 से 35 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने कौषल प्रषिक्षण, राजकीय महाविद्यालयों के भवन निर्माण, टेबलेट और लेपटॉप वितरण, नये पॉलिटेक्निक कॉलेज, अनुप्रति कोचिंग योजना, महाविद्यालय स्नातकोत्तर पर क्रमोन्नत, महाविद्यालय स्नातकोत्तर पर नवीन विषय, महाविद्यालयों में नवीन विषय (स्नातक), नवीन प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना और विद्यालय भवन निर्माण में गत सरकार की तुलना में डेढ गुना से चार गुना तक अधिक कार्य किए हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर गत दो वर्षों में 8 प्रतिशत से अधिक का प्रावधान
शर्मा ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रकाशित स्टेट फाइनेंस 2025 रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2025-26 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर सभी राज्यों का औसत व्यय जहां 6.19 प्रतिशत है। वहीं हमने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर वर्ष 2025-26 में 31 हजार 888 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026-27 में 32 हजार 526 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। यह कुल प्रावधान का 8.4 प्रतिशत एवं 8.02 प्रतिशत है, जो कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 एवं वित्त आयोग की अभिशंषा द्वारा निर्धारित 8 प्रतिशत के बैंचमार्क से अधिक है। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी महामारी की अवधि में भी गत सरकार ने 7 हजार 357 करोड़ रुपए ही स्वास्थ्य बीमा योजना में व्यय किए थे, जबकि हमारी सरकार द्वारा 2 वर्ष में मा योजना में कुल 7 हजार 445 करोड़ रुपये व्यय कर आमजन को कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की गई है।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने दो वर्षों में पूर्ववर्ती सरकार की तुलना में स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेकों उपलब्धियां हासिल की हैं। हमारी सरकार ने दो वर्ष में 14 जिला अस्पताल एवं 61 उप जिला अस्पताल की स्थापना की है, जबकि गत सरकार दोनों श्रेणी में 1-1 ही अस्पताल स्थापित कर सकी। इसी प्रकार पूर्ववर्ती सरकार की 150 की तुलना में हमारी सरकार ने 292 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण, 52 की तुलना में 86 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण, शुन्य की तुलना में 16 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 1270 की तुलना में 2519 शैय्या (बेड) वृद्धि, 30 की तुलना में 89 सोनोग्राफी मशीन, 2 की तुलना में 7 नवीन मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का काम किया है।
हमारी सरकार ने पेंशन बढ़ाई, समय से कर रही भुगतान
मुख्यमंत्री ने कहा कि गत सरकार के समय पेंशन का भुगतान 3 से 4 महीने देरी से होता था। हमने इस व्यवस्था में सुधार किया, जिससे अब दिसम्बर माह की पेंशन का भुगतान जनवरी में ही कर दिया गया। हमने वर्ष 2026-27 के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अंतर्गत 16 हजार 579 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि गत सरकार के अंतिम वर्ष 2023-24 में केवल 9 हजार 590 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए थे। हमने पहले साल से ही न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाया, जो अब 1300 रुपये हो गई है।
उन्होंने कहा कि नए सामाजिक सुरक्षा पेंशनर्स में 10 लाख 60 हजार 625 जोड़े गए, जबकि पूर्ववर्ती सरकार के पहले दो वर्षों में 3 लाख 18 हजार 694 ही जोड़े गए। इसी तरह मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन योजना में 16 हजार 69 करोड़ रुपये व्यय किया, जबकि पूर्ववर्ती सरकार में 9 हजार 913 करोड़ रुपये व्यय किए। वहीं, मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना पर 1 हजार 737 करोड़ रुपये व्यय किए, जबकि गत सरकार ने 965 करोड़ रुपये ही व्यय किए।
शर्मा ने कहा कि एमएलए लेड योजना में गत सरकार ने अपने दो वर्षों में 748 करोड़ 21 लाख रुपये खर्च किए। वहीं, हमारी सरकार ने केवल दो वर्षों में 1 हजार 958 करोड़ 66 लाख रुपये व्यय किए हैं। यह गत सरकार की तुलना में यह ढ़ाई गुना से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि गत सरकार ने अपने पहले दो वर्षों में पंचायतों को 1 हजार 862 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए। जबकि हमारी सरकार ने अपने पहले दो वर्षों में ही 8 हजार 816 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2028-29 तक 350 बिलियन डॉलर का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि दो वर्षों में हमने प्रदेेश के आर्थिक विकास की मजबूत बुनियाद रखी है। अब इस नींव पर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2028-29 तक 350 बिलियन डॉलर और वर्ष 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रस्तुत किये गये बजट की घोषणाएं पूरी करते हुए विकसित राजस्थान 2047 के माइलस्टोन्स को भी अर्जित करेंगे। हमने वर्ष 2030, 2035, 2040 एवं विजन 2047 के लिए सभी क्षेत्रों में हासिल किये जाने वाले लक्ष्य भी तय किये हैं। उन्होंने कहा कि हमारे दो वर्ष के कार्यकाल में ही 91 सूचकांकों में गत सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल की तुलना में अधिक उपलब्धियां अर्जित की गई हैं।
बजट में कोई भी अतिरिक्त कर नहीं लगाया
शर्मा ने कहा कि बजट में कोई भी अतिरिक्त कर नहीं लगाकर आमजन को राहत दी गई है। वहीं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए विभिन्न कदम उठाये गये हैं। आमजन, निवेशकों एवं उद्यमियों को स्टाम्प्स ड्यूटी में राहत दी गई है। ई-स्टाम्प एवं ऑनलाइन/एनीवेयर रजिस्ट्रेशन के माध्यम से पंजीयन सेवाओं का सरलीकरण एवं समयबद्ध निस्तारण होगा एवं आमजन को अत्यधिक सुविधा सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी कर दाताओं की सुविधा के लिए अपीलीय प्राधिकारी के यहां ऑनलाइन सुनवाई सुनिश्चित की जायेगी। उद्यमियों तथा आमजन के लिये विभिन्न अधिनियमों के अन्तर्गत एम्नेस्टी यथा- वेट, कृषि विपणन, परिवहन, खनन योजनाएं लाई गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावी रेवेन्यू मोबिलाईजेशन के परिणामस्वरूप राज्य की स्वयं की राजस्व प्राप्तियां (कर एवं गैर कर राजस्व) वर्ष 2023-24 की तुलना में वर्ष 2026-27 में 69 प्रतिशत वृद्धि के साथ 1 लाख 91 हजार 103 करोड़ रुपये होनी अनुमानित है।
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