अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे लोक कल्याणकारी योजनाओं और बजट घोषणाओं का लाभ: जोगाराम पटेल

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे लोक कल्याणकारी योजनाओं और बजट घोषणाओं का लाभ: जोगाराम पटेल

ग्रीष्मकालीन पेयजल प्रबंधन, बजट घोषणाओं एवं सेवा वितरण की गुणवत्ता पर विशेष जोर

जयपुर। जयपुर जिले का समग्र विकास राजस्थान सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन से ही सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंचे। इसके लिए प्रशासनिक तंत्र को पूर्ण संवेदनशीलता, जवाबदेही एवं समन्वय के साथ कार्य कर रहा है। यह कहना है जयपुर जिले के प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल का।

प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल ने गुरुवार को जिले के समग्र विकास, सेवा वितरण की गुणवत्ता में सुधार तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभिन्न विभागों की प्रगति की गहन समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।

प्रभारी मंत्री ने ग्रीष्मकाल के दृष्टिगत पेयजल प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समर कंटींजेंसी प्लान को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संकट संभावित क्षेत्रों की पूर्व पहचान कर वहां वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही टैंकर प्रबंधन को सुव्यवस्थित किया जाए तथा खराब हैण्डपंप एवं नलकूपों की त्वरित मरम्मत कर आमजन को निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

बजट घोषणाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने लंबित कार्यों को समयबद्ध पूर्ण करने पर बल दिया तथा वर्ष 2026-27 की घोषणाओं के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में वैकल्पिक भवन चिन्हीकरण कर विकास कार्यों को बाधित नहीं होने दिया जाए। उन्होंने कहा कि बजट घोषणाओं का प्रभाव धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए और इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री द्वारा जयपुर जिला प्रशासन के “पंच गौरव” कार्यक्रम पर आधारित लघु फिल्म का विमोचन भी किया गया। उन्होंने कहा कि पंच गौरव जैसे कार्यक्रम स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने, उद्यमिता को प्रोत्साहन देने तथा रोजगार सृजन के प्रभावी माध्यम हैं। इन योजनाओं को जनभागीदारी के साथ और अधिक सशक्त रूप से लागू किया जाना चाहिए।

प्रभारी मंत्री ने टीएसपी एवं एससीएसपी निधियों के प्रभावी उपयोग पर बल देते हुए निर्देश दिए कि निर्धारित संसाधनों का उपयोग लक्षित वर्गों के वास्तविक उत्थान के लिए किया जाए तथा योजनाओं का लाभ पूर्ण पारदर्शिता के साथ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे।

नागरिक सेवाओं में विलंब पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने बोनाफाइड, जाति प्रमाण-पत्र, छात्रवृत्ति सहित अन्य सेवाओं के प्रकरणों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए उनके लाभार्थियों तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

“नमो नर्सरी” के तहत पौधरोपण अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए लक्ष्य के अनुरूप पौध उत्पादन एवं वितरण की ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही विद्यालय भवनों की स्थिति का आंकलन कर आवश्यक मरम्मत एवं सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने को कहा।

“राइजिंग राजस्थान” के तहत हुए एमओयू की समीक्षा करते हुए प्रभारी मंत्री ने निवेश परियोजनाओं में आ रही बाधाओं को चिन्हित कर उनके त्वरित समाधान हेतु कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। एलपीजी आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्बाध एवं सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

मीडिया से रूबरू होते हुए प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जिला प्रशासन टीम भावना के साथ नवाचार, पारदर्शिता एवं जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

इस अवसर पर उन्होंने जयपुर जिला प्रशासन द्वारा संचालित रास्ता खोलो अभियान, सक्षम जयपुर अभियान एवं नरेगा आखर अभियान जैसे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि इन पहलों से जिले में विकास को नई दिशा मिली है।

बैठक में जिला प्रभारी सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़, जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती प्रतिभा वर्मा, उप वन संरक्षक वी. केतन कुमार, अतिरिक्त जिला कलक्टर श्रीमती विनीता सिंह, मेघराज मीणा, संजय कुमार माथुर, आशीष कुमार, मुकेश कुमार मूंड सहित जयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, जिला परिषद, पुलिस विभाग, वन विभाग, स्वायत्त शासन विभाग, परिवहन विभाग, कृषि विभाग, शिक्षा विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, रसद विभाग, आबकारी विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।