परिवहन मंत्रालय बना रहा पॉलिसी, 10 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ीयां होंगी CNG से रिप्लेस

भोपाल
प्रदेश में प्रदूषण फैला रहे दस साल पुराने डीजल और पेट्रोल चलित आॅटो रिक्शा को अब राज्य सरकार परमिट जारी नहीं करेगी। इनकी जगह सीएनजी चलित आॅटो को परमिट दिए जाएंगे। वहीं प्रदेश में अब ई-रिक्शा परमिट की आवश्यकता नहीं होगी।

परिवहन मंत्रालय ने आॅटो रिक्शा विनियमन योजना 2021 तैयार की है। इसपर आमजन से दावे-आपत्तियां मांगे गए है। 15 दिन बाद राज्य सरकर इन दावे-आपत्तियों का निराकरण करते हुए इस नई पॉलिसी को लागू करेगी। हाईकोर्ट जबलपुर के आदेश के तहत राज्य सरकार ने आॅटो रिक्शा वाहनों को विनियमित करते हुए इनके लिए प्रावधान तैयार किए है और अब इन्हीं नियमों से इनका संचालन किया जाएगा। इसके दायरे में वे सभी आॅटो रिक्शा आएंगे जिनमें चालक को छोड़कर तीन सवारियां बिठाई जा सकती है।

प्रदेश में ई-कार्ट अथवा ई-रिक्शा को परमिट की आवश्यकता से छूट प्रदान की गई है। परिवहन विभाग की इलेक्ट्रिकल वाहन नीति में ई-वाहनों को पंजीयन शुल्क में तथा मोटरयान कर में छूट प्रदान की गई है इसलिए इन वाहनों को परमिट के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। पंजीयन शुल्क और मोटरयान कर के संबंध में वर्ष 2019 में जारी प्रावधान इन पर लागू होंगे। दस साल तक की आयु से पहले वाले डीजल, पेट्रोल आॅटो को पांच वर्ष की अवधि के लिए स्थायी परमिट जारी किए जाएंगे। अस्थाई परमिट नवीनीकरण किए जाने की दिनांक से चार माह तक की अवधि के लिए जारी होंगे।

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी आॅटो रिक्शा, ई-कार्ट और ई-रिक्शा के संचालन के लिए नगरीय, उपनगरीय एवं ग्रामीण मार्ग का सूत्रीकरण और निर्धारण करेंगे और उन मार्ग के रूट नंबर आवंटित किए जाएंगे। कलर कोडिंग के अनुसार परमिट स्वीकृत किए जाएंगे। कलर कोडिंग के उल्लंघन पर आॅटो रिक्शा को जब्त किया जा सकेगा। 4 रंगों में ये आॅटो होंगे। पहले में उपरी भाग पीला, निचला भाग काला। दूसरे में उपरी भाग लाल तथा निचला भाग काला, तीसरे में उपरी भाग हरा तथा निचला भाग काला और चौथे में उपरी भाग नीला तथा निचला भाग काला होगा। प्रमुख शहरों के हिसाब से एक जैसे रंग के आॅटो संचालित करने की अनुमति दी जाएगी।

प्रदेश में ई-गाड़ी या ई-रिक्शा भी इसके तहत चलाए जा सकेंगे। तीन पहियों और चार हजार वाट से बिजली बैटरी चलित वाहन इस नये नियम के तहत संचालित किए जा सकेंगे। आॅटो रिक्शा के लिए ये नियम लागू होने के बाद निर्माण के दस वर्ष पूरे कर चुके डीजल और पेट्रोल चलित रिक्शा को किसी भी मार्ग पर परिवहन विभाग परमिट जारी नहीं करेगा। दस साल पुराने डीजल-पेट्रोल आॅटो के परमिटधारी वाहन स्वामियों को सीएनजी आॅटो रिक्शा के परमिट जारी किए जाएंगे लेकिन इसके लिए उन्हें सीएनजी युक्त आॅटो रिक्शा लेना होगा।  

ऐसे चालक जिनका साल में दो बार से रेड लाइट जंपिंग, लेन अनुशासन उल्लंघन में चालान किया गया होगा तो ऐसे चालक को वाहन चलाने के कार्य पर नहीं रखा जाएगा। इसी तरह वर्ष में एक बार भी अत्यधिक गति से वाहन चलाने, खतरनाक तरीके से, नशे की स्थिति में वाहन चलाने पर चालान बना तो उन्हें भी काम पर नहीं रखा जा सकेगा। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन, धूम्रपान नहीं कर सकेंगे। नशे की हालत में भी वाहन नहीं चला सकेंगे।

प्रदेश में यात्रियों के परिवहन में लगे सभी आॅटो रिक्शा में चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की गति को नियंत्रित करने के लिए अधिकृत गति नियंत्रक लगाए जा सकेंगे। इसके अलावा सभी आॅटो रिक्शा में व्हीकल ट्रेकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे। इन डिवाइस का परिवहन विभाग के सेंट्रल सर्वर से इंटीग्रेशन कराना अनिवार्य होगा।