केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की पांच योजनाओं में मध्यप्रदेश देश में अव्वल

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की पांच योजनाओं में मध्यप्रदेश देश में अव्वल

भोपाल
कृषि कर्मण का अवार्ड सात बार प्राप्त करने वाले मध्यप्रदेश सरकार का ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस अब और रंग लाने लगा है। इसके चलते मध्यप्रदेश केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की पांच योजनाओं के क्रियान्वयन में इस समय देश में टॉप पर चल रहा है।

 स्वसहायता समूहों के जरिए संचालित इन योजनाओं के जरिए जहां मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिली है। वहीं स्वसहायता समूहों को आर्थिक और सामाजिक रुप से सक्षम बनाने में मदद मिली है। कोरोना काल में इससे मजदूरों का अन्य राज्यों में पलायन भी रुका है।

मध्यप्रदेश में ग्रामीण आजीविका मिशन और अन्य योजनाओं में काफी संख्या में स्वसहायता समूह मिलकर काम कर रहे है। इससे एक साथ कई महिलाओं को घर बैठे काम मिल रहा है। वे अपना खुद का काम शुरु कर आत्मनिर्भर बन रही है। इन स्वसहायता समूहों को बैंको से कर्ज दिलाकर सबल बनाने में मदद मिल रही है।

मध्यप्रदेश में बैंको में  स्व सहायता समूहों के बैंक लिंकेज हेतु प्रकरण भेजने के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर है। अभी तक मध्य प्रदेश में एक लाख 2 हजार 765 समूहों के प्रकरण बैंको को भेजे गए है। इसके जरिए  2609 करोड़ 18  लाख के ऋण प्रकरण बैंको तक पहुंचे है।

बैंको द्वारा  स्व सहायता समूहों  के ऋण प्रकरण  स्वीकृति में भी मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है। प्रदेश में बैंको द्वारा 45 हजार 498  प्रकरणों में एक करोड़ 16 लाख  रुपए  स्वीकृत किए गए है। कर्ज लेकर ये स्वसहायता समूह कई क्षेत्रों में उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों में आगे बढ़ रहे है।  घरेलु उत्पादों को भी प्रोत्साहन मिला है और स्थानीय कामगारों को क्षेत्रीय उत्पादों की उपलब्धता बाजारों में बढ़ी है।

ग्रामीण उद्यमिता के मामले में भी मध्यप्रदेश देश में टॉप पर है। प्रारंभिक ग्रामीण उद्यमिता  कार्यक्रम (एसवीईपी ) में 13 हजार 111 उद्यम गठित कर मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।

प्रशिक्षण केन्द्र शुरु करने में भी मध्यप्रदेश देश में अव्वल चल रहा है। प्रदेश में सबसे अधिक कुल 46 सामुदायिक प्रशिक्षण केन्द्र सीटीसी संचालित किए जा रहे है।

 मध्यप्रदेश द्वारा अधिकतम गांवों में कृषि गतिविधियां संचालित है। इसमें भी प्रदेश की महिलाएं देश में अव्वल चल रही है। अभी तक प्रदेश में 23 हजार 458 गांवों में कृषि गतिविधियां महिलाओं द्वारा प्रारंभ की गई है।