कम पड़ रही अस्थियां रखने की जगह, 5 अलमारियों में रखे 300 अस्थि कलश
भोपाल
कोरोना की दूसरी लहर भयावह होती जा रही है। राजधानी भोपाल में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे है। पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर ज्यादा डरावनी है, क्योंकि इस लहर में मरने वालों की संख्या भी काफी ज्यादा हो रही है। अभी तक तो ऐसा था कि अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को श्मशान घाट में लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन भोपाल में तो अब ऐसे हालात भी बन गए हैं कि श्मशान घाट के लॉकर्स में अस्थि कलश रखने तक की जगह नहीं बची है।
भोपाल के भदभदा श्मशान घाट में 5 बड़ी अलमारियां हैं, जिनमें यहां होने वाले अंतिम संस्कार के बाद अस्थि कलश को रखा जाता है। कल ही भदभदा श्मशान घाट पर करीब 118 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। इनमें से ज्यादातर का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत किया गया है। अंतिम संस्कार के बाद अस्थि कलश को श्मशान घाट के लॉकर में रखा जाता है और जैसे-जैसे परिजन अपनों की अस्थियां लेने आते हैं उन्हें अस्थियां दे दी जाती है। लेकिन बीते कुछ दिनों से बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार होने के कारण यहां अस्थि कलश का ढेर बढ़ता जा रहा है। लॉकडाउन के कारण ज्यादातर लोग अस्थि कलश लेने पहुंच ही नहीं पा रहे है। जिसके चलते लॉकर में अब जगह कम पड़ने लगी है।
भदभदा श्मशान घाट समिति के सचिव ममतेश शर्मा के मुताबिक भोपाल गैस त्रासदी के बाद अभी तक कभी भी इतनी बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार नहीं हुए हैं। फिलहाल 5 अलमारियों के लॉकर में 300 से ज्यादा अस्थि कलश रखे हुए हैं, जिसे लेने परिजन पहुंचे नहीं हैं। इसके चलते विश्राम घाट समिति के लॉकर भर चुके हैं। हमने स्वयंसेवी संस्थाओं से बात की है और पांच नए लॉकर वाली अलमारियां मिली हंै, ताकि अस्थि कलश रखने की जगह बनाई जा सके। अब अस्थियों को पंडितों की मौजूदगी में विधिविधान से नर्मदा किनारे विसर्जन की करने की तैयारी है। इसके लिए भी कई दानदाता सामने आ रहे हैं।
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