कुछ तो गड़बड़ है… ‘डैमेज’ से पहले ‘कंट्रोल’ की कवायद में जुटी भाजपा

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भाजपा सूत्रों के अनुसार उपचुनाव में कांग्रेस को 18 से 20 सीटें मिलने की संभावना

हर संभावित स्थिति से निपटने की रणनीति बना रही भाजपा

निर्दलीय, बसपा और सपा विधायकों पर डाले जा रहे डोरे

भोपाल, मप्र की 28 विधानसभा सीटों पर 3 नवंबर को मतदान होगा और 10 नवंबर को परिणाम आएंगे। उपचुनाव का ऊंट किस ओर करवट लेगा यह दावे के साथ तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता, लेकिन जिस तरह की तैयारी भाजपा कर रही है, उससे यह संकेत मिल रहा है कि सीटों के गणित में कांग्रेस काफी आगे रहेगी। इसलिए उपचुनाव के नतीजों से पहले भाजपा ने सरकार मिशन-2 के लिए प्लान-बी पर काम शुरू कर दिया है। उसकी कोशिश है कि वह कांग्रेस को किसी भी तरह सरकार न बनाने दे। इसके लिए भाजपा ने निर्दलीय, बसपा और सपा विधायकों पर डोरे डालना शुरू कर दिया है।

भाजपा सूत्रों के अनुसार उपचुनाव में कांग्रेस को 18 से 20 सीटें मिलने की संभावना है। इस संभावना को देखते हुए भाजपा को यह डर सताने लगा है कि कांग्रेस निर्दलीय, बसपा, सपा के विधायकों के साथ ही भाजपा के कुछ विधायकों को तोड़कर सरकार बनाने का दावा कर सकती है। कांग्रेस ऐसा कुछ करे उससे पहले ही भाजपा ने सरकार मिशन-2 के लिए अपना गणित बिठाना शुरू कर दिया है।

मिशन पर काम कर रही पूरी टीम

उपचुनाव के नतीजे कुछ भी हो, लेकिन भाजपा सरकार में बने रहने की हर संभावित स्थिति से निपटने की रणनीति बना रही है। इसके लिए पर्दे के पीछे एक पूरी टीम काम कर रही है। इस टीम में वे नेता शामिल हैं, जो मार्च में भाजपा एवं कांगे्रस के विधायकों को दीगर राज्यों में लेकर गए और उनके संपर्क में थे। इसी कड़ी में गत दिनों सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया ने खरगौन जिले की भगवानपुरा सीट से निर्दलीय विधायक केदार सिंह डाबर को भाजपा के पाले में लाकर उनसे सरकार को समर्थन देने का ऐलान करवाया। इस तरह अभी तक भाजपा ने दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है। अब उनकी नजर 2 निर्दलीय, 2 बसपा और 1 सपा विधायक पर है।

सत्ता बरकरार रखने के लिए 9 विधायकों की ही जरूरत

सरकार मिशन-2 के लिए भाजपा जिस तरह निर्दलीय, बसपा और सपा विधायकों पर डोरे डाल रही है, उससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या भाजपा 28 में से 9 सीटें भी नहीं जीत पा रही है। क्योंकि वर्तमान स्थिति में भाजपा को अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए 9 विधायकों की ही जरूरत है। गौरतलब है कि 230 सदस्यों वाली मप्र विधानसभा में 28 सीट रिक्त हैं। ऐसे में अभी सदस्य संख्या 202 है। उपचुनाव के नतीजों के बाद भाजपा को सरकार में बने रहने के लिए 116 सदस्यों की जरूरत होगी। वर्तमान में भाजपा की सदस्य संख्या 107 है। ऐसे में भाजपा को खुद के बलबूते पर सरकार में बने रहने के लिए उपचुनाव में सिर्फ 9 सीट जीतनी होंगी।

क्या 9-10 सीटें भी जीतने की स्थिति में नहीं है भाजपा 

उपचुनाव के दौरान प्रचार में भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां अपनी-अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही है। लेकिन इस बीच केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और मप्र के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बयान ने प्रदेश के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि हमारे पास 114 विधायकों का समर्थन है और सरकार बनाने के लिए मात्र 2 सीटें चाहिए। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि हम 8 सीट भी जीत जाते हैं तो हमारी सरकार पूर्ण बहुमत में होगी। इससे प्रदेशभर में यह संदेश जा रहा है कि उपचुनाव में भाजपा 9-10 सीटें भी जीतने की स्थिति में नहीं है।

हर स्थिति से निपटने को तैयार

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा को इस बात की आशंका सता रही है कि कांग्रेस 18-20 सीटें जीतने के बाद सरकार बनाने का दावा न कर दे। दरअसल, भाजपा सरकार को इंटेलीजेंस से रिपोर्ट मिली है कि अगर कांग्रेस 18 सीट भी जीतती है तो उसके विधायकों का आंकड़ा 106 (88+18) हो जाएगा। वहीं वह निर्दलीय, बसपा और सपा के साथ विधायकों मिला लेगी। इससे आंकड़ा 113 का पहुंच जाएगा। इस आंकड़े के बाद कांग्रेस भाजपा के आधा दर्जन से अधिक विधायकों को तोड़ लेगी। जिससे वह सरकार बनाने की स्थिति में आ जाएगी। ऐसी स्थिति निर्मित न हो इसके पहले ही भाजपा ने सरकार मिशन-2 के लिए प्लान-बी पर काम शुरू कर दिया है।

जिन्होंने सरकार बनवाया उन्हीं को सौंपी जिम्मेदारी
भाजपा ने प्लान बी का जिम्मा उन्हीं नेताओं को सौंपा है, जिन्होंने मार्च में भाजपा की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। भाजपा ने इन नेताओं को उपचुनाव में प्रचार-प्रसार से दूर रखा है। इनमें सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया, संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी, भूपेन्द्र सिंह शामिल हैं। मार्च में जब प्रदेश में राजनीतिक उठापठक चल रही थी, तब ये नेता दीगर राज्यों में ठहरे मप्र के विधायकों के संपर्क में थे। दूसरे राज्यों से विधायकों को भोपाल लाने और बाहर ले जाने का दायित्व इन्हीं के पास था। अब इन्हीं पर सरकार मिशन-2 प्लान को सफल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।

भाजपा को उपचुनाव में मात्र 2 सीट ही जरूरत
भाजपा के रणनीतिकारों ने सरकार मिशन-2 के लिए 116 के जादुई को पाने के लिए जो गणित बनाया है उसके अनुसार भाजपा को उपचुनाव में मात्र 2 सीट ही जरूरी है। वहीं कांगे्रस को सरकार बनाने के लिए भाजपा में तोडफ़ोड़ की संभावना जताई गई है।

भाजपा
अपने विधायक-107
निर्दलीय, सपा, बसपा-7
उपचुनाव से-2
कुल-116

कांग्रेस
अपने विधायक-88
निर्दलीय, सपा, बसपा-7
उपचुनाव से-18
भाजपा से बागी-6
कुल-119