अफसर मेहरबान, रिटायर होने के कगार पर रेंजर भी बना पहलवान

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दो जिलों की विपरित दिशा की दो रेंज का एक रेंजर, हो गया टीपी घोटाला

आगर के एक मात्र वन रक्षक को निलंबित कर पुरे घोटाले को दबाने की कवायद

मामला विभाग के भोपाल स्तर के अधिकारियों के समक्ष पहुंचा,कार्रवाई का इंतजार

brijesh parmar
उज्जैन/ भोपाल।वन संरक्षक वन वृत्त उज्जैन के आगर,शाजापुर,उज्जैन जिले के बीच हुए टीपी घोटाले में नित नए खुलासे सामने आ रहे हैं।पुरा घोटाला वरिष्ठ अफसरों के प्रश्रय में अंजाम देना विभाग में चर्चा का विषय है।जिन दो जिलों की विपरित दिशा में करीब 80 किलोमीटर दूर की दो रेंज में इस घोटाले की सबसे ज्यादा टीपी काटी गई हैं दोनों का रेंजर एक ही है और सेवानिवृत्ति के कगार पर है।

वन विभाग के वन संरक्षक उज्जैन वृत के शाजापुर और आगर जिले में टीपी कांड को अंजाम दिया गया है। इस कांड को लेकर विभाग के उज्जैन मुख्य वन संरक्षक कुल्हड में गुड फोड कर मिडिया को भ्रमित करने में लग गए थे।मिडिया ने पूरे मामले की बाल की खाल निकाल कर रख दी।-मामला विभाग के भोपाल स्तर के अधिकारियों के समक्ष पहुंचा, कार्रवाई का इंतजार है। हाल यह हैं कि मुख्य वन संरक्षक शुजालपुर हो कर आए हैं मुख्यालय के अधिकारियों को भी मिडिया की तरह गुमराह किया जा रहा है। उसके बाद भी वे मिडिया को बताने से कतरा रहे हैं और तो और आगर के एक मात्र वन रक्षक को निलंबित कर पुरे घोटाले को दबाने की कवायद की गई है।रेंजर को हर तरह से प्रश्रय देते हुए बचाया जा रहा है।यही नहीं शुक्रवार को आगर-शुजालपुर के रेंजर घंटो उज्जैन मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में उपस्थित रहे। विभागीय सूत्रों के मुताबिक पुरे मामले को दफन करने के लिए शतरंज बिछाने के लिए ऐसा हुआ है। चेंबर के अंदर की चर्चा दो लोगों के बीच ही हुई बताई जा रही है।

रेकार्ड कायम किया रेंजर ने…!
इस पूरे मामले के मुख्य कर्ताधर्ता रेंजर मूलत: उज्जैन से संबंधित बताए जा रहे हैं। वे 62 की उम्र में रनिंग हैं।उनका मुख्यालय आगर जिला है। आगर रेंज के साथ उन्हे शाजापुर जिले के शुजालपुर रेंज का प्रभार दिया गया। सेवानिवृत्ति की कगार पर बैठे रेंजर ने आगर और शाजापुर जिले की शुजालपुर दो जिलों की करीब 80 किलोमीटर दूरी की दो रेंज में एक साथ काम को अंजाम दिया।इसी काम के दौरान उन्होंने 6 माह में लाकडाउन समय के साथ 4380 ट्राजिस्ट परमिट जारी कर दिए। खास बात तो यह है कि विभाग के युवा अधिकारियों को मात देते हुए 62 वर्ष के अपने अनुभव से इस रेंजर ने इतने काम को अंजाम दिया है।

एक दिन, एक समय, दो रेंज में कटी टीपी
टीपी कांड में 62 साल के रेंजर ने विभाग को विश्व रेकार्ड में शामिल कर दिया है। उन्होंने एक ही दिन एक ही समय में करीब 80 किलोमीटर दुरी की आगर और शुजालपुर दो रेंज में दो अलग अलग टीपी जारी की है। दोनों का भौतिक सत्यापन भी अंजाम दिया गया है।ऐसा एक ही मामला नहीं है कई मामले हैं।एक ही समय की दो रेंज की टीपी में उनके हस्ताक्षर भी उजागर हो रहे हैं।

विभागीय अधिकारियों की जांच की जाए
विभाग के सुत्रों के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग के आदेशानुसार सेवानिवृत्ति के दो साल के दरमियान गृह मुख्यालय पर पदस्थ किए जाने के आदेश हैं उसमें भी सेवा के 6 माह के दौरान मुख्यालय पर ही रखे जाने का पक्ष कर्मचारी संगठन देते रहते हैं। इस मामले में न तो रेंजर ने विभाग से इस अधिकार की मांग की और न अधिकारियों ने अपने कर्तव्य को निभाया। जबकि विभाग के एक डिप्टी रेंजर बनाम प्रभारी रेंजर पिछले कई वर्षों से यहीं जमें हुए हैं और नोलखी को छोडने को तैयार नहीं हैं यहां तक की इन्होंने बीड की जमीन को भी परबारे पूर्ति कर एक निजी को सौंप दी जिसे लेकर भी अधिकारी की कान पर जूं नहीं रेंगी और उन्हे उज्जैन में ही बनाए रखा गया वे भी सेवानिवृत्ति की कगार पर आने तक।

लकडकट्टों में चर्चा-
पूरा टीपी कांड वन विभाग के साथ ही वन माफियाओं में चर्चा का विषय बना हुआ है।वन माफियाओं के अनुसार एक टीपी पर 12 से 15 भिंड्डी (हजार) का रेट है। इस मान से 4380 टीपी का योग लकडकट्टों में चर्चा का विषय है।

पहले प्रश्रय तो अब कार्रवाई कैसे हो…!
रेंजर को पहले बडे साहब के आदेश पर ही दो रेंज का काम शाजापुर के साहब ने दिया।पुरे समय प्रश्रय के चलते मामला उजागर होने पर भी कार्रवाई न करते हुए मिडिया को बडे साहब यानि मुख्य वन संरक्षक ने गुमराह किया। इससे विभाग में चर्चा है कि साहब जिस थाली में खाते हैं उसमें छेद नहीं करते हैं। मामला अब उनके गले में हड्डी की तरह अटक गया है। शतरंज के तहत अब सांप भी न मरे और लाठी भी साबूत बचाने की जुगत भिडाई गई है।

अहम सवाल
दो जिलों में हुए टीपी कांड को लेकर मात्र एक वन रक्षक को निलंबित किया जाना और रेंजर एवं एसडीओ पर निलंबन सहित विभागीय जांच की कार्रवाई न करना मुख्य वन संरक्षक को कटघरे में खड़ा कर रहा है। यही नहीं इसके चलते कई सारे अहम सवाल विभागीय कर्मचारियो में बन रहे हैं।